-Friday World March 22,2026
वाशिंगटन डीसी में सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की सुनवाई ने अमेरिकी राजनीति में तूफान मचा दिया है। डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने लिखित बयान में स्पष्ट किया कि जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" के बाद ईरान का यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम पूरी तरह से नष्ट हो गया था। उन्होंने लिखा: "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के परिणामस्वरूप ईरान का न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम तबाह हो गया। उसके बाद से इसे दोबारा बनाने की कोई कोशिश नहीं की गई। भूमिगत सुविधाओं के प्रवेश द्वार को बमबारी से मलबे से ढक दिया गया और सीमेंट से बंद कर दिया गया।"
यह बयान सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर सवाल उठाता है, जिनमें उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर खतरे को फरवरी 28, 2026 से शुरू हुए युद्ध की मुख्य वजह बताया था। ट्रंप ने बार-बार कहा कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू कर रहा था और यह अमेरिका के लिए "इमिनेंट थ्रेट" (तत्काल खतरा) बन चुका था। लेकिन गबार्ड की गवाही से साफ होता है कि 2025 के हमलों के बाद ईरान ने एनरिचमेंट क्षमता बहाल करने की कोई कोशिश नहीं की। इससे युद्ध की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुनवाई में क्या हुआ? गबार्ड ने क्यों छोड़ा हिस्सा?
18 मार्च 2026 को सीनेट सिलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस (SSCI) के सामने गबार्ड ने अपना लिखित स्टेटमेंट सबमिट किया, लेकिन मौखिक बयान में उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के "नो एफर्ट्स टू रिबिल्ड" वाले हिस्से को पढ़ा ही नहीं। जब डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर और जॉन ओसॉफ ने इस पर सवाल किया, तो गबार्ड ने कहा कि "समय कम था, इसलिए कुछ हिस्से छोड़ दिए गए।" उन्होंने अपने आकलन से इनकार नहीं किया और पुष्टि की कि इंटेलिजेंस कम्युनिटी (IC) का मूल्यांकन यही है कि ईरान ने एनरिचमेंट क्षमता बहाल नहीं की।
यह omission (छोड़ना) विवादास्पद हो गया। डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया कि गबार्ड ने जानबूझकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जाने वाला हिस्सा छिपाया। सीनेटर वार्नर ने कहा, "यह ट्रंप के दावों को कमजोर करने वाला हिस्सा था, और इसे छोड़ना संयोग नहीं लगता।" गबार्ड ने जवाब में कहा कि IC का काम "इमिनेंट थ्रेट" तय करना नहीं है – यह राष्ट्रपति का फैसला है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का प्रोग्राम 2025 में "obliterated" (नष्ट) हो चुका था।
ट्रंप के दावे vs इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ट्रंप प्रशासन ने युद्ध की शुरुआत में कई वजहें बताईं – ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू होना, मिसाइल खतरा, क्षेत्रीय अस्थिरता। लेकिन गबार्ड की गवाही और 2026 एनुअल थ्रेट असेसमेंट से कई विरोधाभास उजागर हुए हैं:
- 2025 के हमलों के बाद ईरान ने एनरिचमेंट नहीं बहाल किया।
- IAEA (इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी) ने भी कोई स्ट्रक्चर्ड न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम नहीं पाया।
- इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स में ईरान को ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) विकसित करने में 2035 तक का समय लग सकता है।
- ओमान के विदेश मंत्री (जो अमेरिका-ईरान बातचीत में मध्यस्थ थे) ने युद्ध से पहले कहा था कि डिप्लोमेसी में प्रगति हो रही थी और कोई तत्काल जरूरत नहीं थी।
ट्रंप ने स्टेट ऑफ द यूनियन और अन्य बयानों में कहा कि ईरान "प्रोग्राम दोबारा शुरू कर रहा था," लेकिन IC का आकलन इससे अलग है। इससे युद्ध को "preventive strike" (रोकथाम हमला) बताने की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
जो केंट का इस्तीफा: इंटरनल विरोध की पहली बड़ी आवाज विवाद को और बढ़ावा मिला जब तुलसी गबार्ड के करीबी सलाहकार और नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने इस्तीफा दे दिया। केंट ने ट्रंप को लिखे पत्र में कहा: "ईरान अमेरिका के लिए कोई इमिनेंट थ्रेट नहीं था। यह युद्ध इजरायल और उसके अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू हुआ।" केंट ने आरोप लगाया कि "मिसइनफॉर्मेशन कैंपेन" ने ट्रंप को गुमराह किया।
केंट और गबार्ड दोनों पूर्व सैनिक हैं और "अमेरिका फर्स्ट" नीति के तहत विदेशी हस्तक्षेप के विरोधी माने जाते हैं। गबार्ड ने युद्ध शुरू होने (28 फरवरी 2026) से चुप्पी साध रखी थी और अब उनकी गवाही से लगता है कि वे भी युद्ध के पूर्ण समर्थक नहीं हैं।
युद्ध का वर्तमान हाल और ग्लोबल प्रभाव युद्ध अब तीसरे हफ्ते में है। "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत अमेरिका-इजरायल ने ईरान के नेतृत्व, मिसाइल साइट्स और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए। सुप्रीम लीडर अली खमेनेी की मौत के बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल हमले किए, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी प्रभावित हुए। ग्लोबल शिपिंग, तेल कीमतें और इंटरनेट केबल्स पर खतरा बढ़ गया है।
गबार्ड ने गवाही में कहा कि ईरानी रेजीम "intact लेकिन largely degraded" है – उसकी मिलिट्री प्रोजेक्शन क्षमता नष्ट हो गई है, लेकिन नेतृत्व बरकरार है। IC का अनुमान है कि अगर रेजीम बचा तो वह बदला लेगा।
बड़ा सवाल: जंग की असली वजह क्या थी? गबार्ड के खुलासे ने वाशिंगटन में बहस छेड़ दी है। क्या युद्ध न्यूक्लियर खतरे से ज्यादा इजरायल के दबाव, क्षेत्रीय राजनीति या अन्य कारणों से हुआ? डेमोक्रेट्स इसे "war based on a lie" कह रहे हैं। रिपब्लिकन्स इसे "preventive action" बता रहे हैं।
यह घटना ट्रंप प्रशासन में दरार दिखाती है। गबार्ड जैसी प्रमुख फिगर का बयान युद्ध की नैरेटिव को चुनौती दे रहा है। अगर इंटेलिजेंस कम्युनिटी और प्रशासन के बीच ऐसा अंतर है, तो अमेरिकी जनता और विश्व को सच्चाई जानने का हक है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 22,2026