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Friday, 13 March 2026

ईरान पर हमले का बहाना, खुद के नुकसान का रोना: अमेरिका-इजरायल की 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में ईरान की कोई भूमिका नहीं, सब 'दुर्घटना' और 'फ्रेंडली फायर' के नाम पर!

ईरान पर हमले का बहाना, खुद के नुकसान का रोना: अमेरिका-इजरायल की 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में ईरान की कोई भूमिका नहीं, सब 'दुर्घटना' और 'फ्रेंडली फायर' के नाम पर!-
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (अमेरिका) और 'ऑपरेशन रोअरिंग लायन' (इजरायल) शुरू किया। यह ऑपरेशन ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के साथ शुरू हुआ, जिसे अमेरिका-इजरायल ने 'न्यूक्लियर खतरा खत्म करने' का बहाना बताया। लेकिन सच्चाई यह है कि ईरान ने कोई आक्रामक कदम नहीं उठाया – न कोई हमला किया, न मिसाइल दागी, न ड्रोन भेजे। सब कुछ अमेरिका-इजरायल के अपने ही ऑपरेशन में 'अपने आप' हुआ। ईरान सिर्फ जवाबी कार्रवाई का दावा करता रहा, लेकिन असल में उसके पास कोई सक्रिय भूमिका नहीं थी। इस युद्ध में अमेरिका-इजरायल को जो नुकसान हुआ, वह उनकी अपनी गलतियों, तकनीकी खराबी और 'फ्रेंडली फायर' का नतीजा है। ईरान पर जो हमले हुए, उनकी जिम्मेदारी पूरी तरह अमेरिका-इजरायल पर है – क्योंकि उन्होंने बिना उकसावे के युद्ध छेड़ा। 

यह रिपोर्ट उन सभी घटनाओं पर आधारित है, जहां अमेरिका-इजरायल ने खुद को नुकसान पहुंचाया, लेकिन ईरान को दोषी ठहराने की कोशिश की। आइए विस्तार से देखें कि कैसे यह 'युद्ध' असल में एकतरफा आक्रमण था, और नुकसान भी खुद के हाथों हुआ। 

 ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: शुरूआत और बहाना यह सब 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। लक्ष्य थे – ईरान की न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल बेस, कमांड सेंटर और लीडरशिप। पहले ही दिन अली खामेनेई की हत्या कर दी गई, साथ ही कई सीनियर अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने दावा किया कि यह 'न्यूक्लियर खतरा खत्म करने' और 'रेजीम चेंज' के लिए था। लेकिन ईरान ने कोई पूर्व हमला नहीं किया था। वार्ताएं चल रही थीं, फिर अचानक हमले! ईरान की तरफ से कोई मिसाइल या ड्रोन नहीं चला – सब अमेरिका-इजरायल के प्लान के मुताबिक हुआ। 

ईरान ने सिर्फ अपनी रक्षा की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी प्रोपगैंडा में इसे 'हमला' बताया गया। असल में ईरान निर्दोष था – युद्ध अमेरिका-इजरायल ने छेड़ा, और नुकसान भी उन्हें ही हुआ। 

 अमेरिका-इजरायल को हुआ नुकसान: सब 'अपने आप'! युद्ध में अमेरिका और इजरायल को जो नुकसान हुआ, वह ईरान की कोई कार्रवाई नहीं थी। सब तकनीकी खराबी, गलतफहमी या 'फ्रेंडली फायर' (अपने ही बलों से गोलीबारी) से हुआ। ईरान ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली – क्योंकि उसने कुछ किया ही नहीं! 

 अमेरिकी फाइटर जेट्स और विमानों का नुकसान - **3 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स**: 1 मार्च 2026 को कुवैत में 'फ्रेंडली फायर' से गिरे। कुवैती एयर डिफेंस ने गलती से इन्हें दुश्मन समझ लिया। सभी 6 पायलट बच गए, लेकिन जेट्स पूरी तरह नष्ट। प्रत्येक की कीमत 94 मिलियन डॉलर – कुल 282 मिलियन डॉलर का नुकसान। ईरान का इसमें कोई हाथ नहीं – बस अमेरिकी गलती! 

- **केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग विमान**: 12 मार्च 2026 को पश्चिमी इराक में क्रैश। CENTCOM ने कहा – 'दुश्मन फायर या फ्रेंडली फायर नहीं', बल्कि मिड-एयर कोलिजन (हवा में टकराव)। दो विमान थे, एक क्रैश, दूसरा सुरक्षित लैंड। क्रू में 3-6 लोग थे, हताहतों की पुष्टि नहीं। यह युद्ध का चौथा अमेरिकी विमान नुकसान था। ईरान ने दावा भी नहीं किया – क्योंकि उसने कुछ किया ही नहीं!

 - **कुल अमेरिकी विमान नुकसान**: 3 फाइटर जेट्स और 1 टैंकर क्रैश। ईरान ने 'और विमान गिराए' का दावा किया, लेकिन अमेरिका ने खारिज कर दिया। सब अमेरिकी ऑपरेशन की गड़बड़ी से हुआ। 

इजरायली नुकसान: ड्रोन और नागरिक - इजरायल के कोई मानवयुक्त फाइटर जेट नहीं गिरे। एफ-35 जैसे उन्नत जेट्स ने हमले किए, लेकिन कोई नुकसान नहीं।

 - **ड्रोन नुकसान**: 3 हर्मीस 900, 3 आईएआई ईटन, 1 आईएआई हेरोन – कुल 7 ड्रोन नष्ट। ये अनमैन्ड थे, निगरानी के लिए इस्तेमाल होते थे। ईरान ने दावा किया, लेकिन इजरायल ने इनकार किया। असल में तकनीकी फेलियर या ऑपरेशनल गलती। - नागरिक हानि: 17 नागरिक मारे गए, हजारों घायल। लेकिन ईरान के 'मिसाइल हमले' का कोई सबूत नहीं – सब इजरायली डिफेंस सिस्टम की गड़बड़ी से हो सकता है। 

मानवीय और आर्थिक नुकसान 

- **अमेरिका**: 9 सैनिक मारे गए (कुछ रिपोर्ट्स में 7-8), 170+ घायल। ज्यादातर ड्रोन अटैक या बेस पर 'हमले' से, लेकिन CENTCOM ने कहा 

– ईरान का सीधा हमला नहीं। ट्रंप और हेगसेथ ने कहा

 – 'और जानें जाएंगी'। लेकिन ईरान ने कोई प्रत्यक्ष हमला नहीं किया। 

- **इजरायल**: 2 सैनिक मारे गए, 14 घायल। नागरिक मौतें 15-17 तक।

 - **आर्थिक नुकसान**: अमेरिका को पहले 4-5 दिनों में 1.9 बिलियन डॉलर, बाद में 3.7 बिलियन तक। रडार सिस्टम (अल उदेद पर 1.1 बिलियन), सैटकॉम टर्मिनल्स आदि नष्ट। लेकिन ईरान का कोई मिसाइल हमला साबित नहीं – सब 'दुर्घटना'। 

- इजरायल की अर्थव्यवस्था को हफ्ते में 2.93 बिलियन डॉलर का नुकसान। तेल-गैस प्रभावित, लेकिन ईरान ने कुछ नहीं किया। 

 अन्य नुकसान: रडार, बेस और प्रोपगैंडा 

- कतर के अल उदेद बेस पर रडार क्षति 

– ईरानी मिसाइल का दावा, लेकिन अमेरिका ने 'प्रचार' बताया। 

- यूएई में THAAD रडार 500 मिलियन डॉलर का नुकसान। 

- बहरीन में सैटकॉम 20 मिलियन।

 - ईरान ने THAAD और अन्य सिस्टम नष्ट करने का दावा किया, लेकिन अमेरिका ने इसे झूठ बताया। असल में अमेरिकी ऑपरेशन में गड़बड़ी से हुआ। 

 व्यापक संदर्भ: ईरान निर्दोष, अमेरिका-इजरायल जिम्मेदार यह युद्ध अमेरिका-इजरायल ने छेड़ा – ईरान ने कोई उकसावा नहीं दिया। 2000+ लक्ष्यों पर हमले किए, ईरान की नेवी, मिसाइल और ड्रोन क्षमता कम की। लेकिन अमेरिका-इजरायल को खुद नुकसान हुआ – क्योंकि उनका ऑपरेशन इतना आक्रामक था कि खुद की गलतियां सामने आईं। ईरान ने सिर्फ अपनी रक्षा की, लेकिन कोई सक्रिय हमला नहीं। 

पेंटागन कहता है – युद्ध लंबा चलेगा। लेकिन सवाल यह है – ईरान पर हमला क्यों? न्यूक्लियर बहाना था, असल में रेजीम चेंज का प्लान। ईरान के लोग मारे गए (1200+), लेकिन अमेरिका-इजरायल ने खुद को चोट पहुंचाई। 

यह युद्ध याद दिलाता है कि आक्रामकता का नतीजा खुद को ही भुगतना पड़ता है। ईरान निर्दोष खड़ा रहा, जबकि अमेरिका-इजरायल के 'अपने आप' नुकसान ने दुनिया को दिखा दिया – युद्ध का बहाना कितना खोखला था। जैसे-जैसे समय बीतेगा, सच्चाई और सामने आएगी।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 14,2026