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Thursday, 19 March 2026

स्वेज से होर्मुज: ब्रिटेन-इज़राइल अब अमेरिका-इज़राइल-इतिहास की दोहराती हुई त्रासदी?

स्वेज से होर्मुज: ब्रिटेन-इज़राइल अब अमेरिका-इज़राइल-इतिहास की दोहराती हुई त्रासदी?
-Friday 🌎 World March 19, 2026
1956 का स्वेज संकट आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति की किताबों में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज है। उस समय ब्रिटेन और फ्रांस, इज़राइल के साथ मिलकर, मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासेर द्वारा स्वेज नहर के राष्ट्रीयकरण के जवाब में सैन्य कार्रवाई में उतरे थे। ब्रिटेन ने सैन्य रूप से शुरुआती सफलता हासिल की—उनकी सेनाएँ नहर के किनारे उतर गईं, इज़राइली बल सिनाई में आगे बढ़े। लेकिन असल जीत मिस्र की हुई। नासेर न केवल सत्ता में बने रहे, बल्कि अरब दुनिया के नायक बन गए। उनकी राष्ट्रवादी छवि और मजबूत हो गई।

 ब्रिटेन के लिए यह सैन्य विजय एक भारी राजनीतिक और आर्थिक हार साबित हुई। 

अंतरराष्ट्रीय समुदाय—खासकर अमेरिका—ने ब्रिटेन और फ्रांस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने ब्रिटेन पर आर्थिक दबाव डाला: पाउंड स्टर्लिंग की रिजर्व करेंसी की स्थिति पर हमला किया गया, ब्रिटेन के डॉलर रिजर्व तेजी से घटे, और आईएमएफ से मदद मिलना बंद हो गई। परिणामस्वरूप ब्रिटेन को पीछे हटना पड़ा। 

इस संकट ने ब्रिटेन की वैश्विक सुपरपावर स्थिति को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। पाउंड स्टर्लिंग अब रिजर्व करेंसी नहीं रहा—डॉलर ने उसकी जगह ले ली। ब्रिटेन अब "दूसरी पंक्ति" की शक्ति बन गया। एंथनी ईडन जैसे प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। फ्रांस भी प्रभावित हुआ, लेकिन ब्रिटेन की गिरावट सबसे गहरी थी। स्वेज नहर फिर से मिस्र के नियंत्रण में आ गई, और नासेर की जीत ने अरब राष्ट्रवाद को नई ऊर्जा दी। 

अब इतिहास खुद को दोहरा रहा है—स्वेज से होर्मुज तक

आज, मार्च 2026 में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मचा तमाशा ठीक वैसा ही महसूस हो रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए—ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत सैन्य ठिकाने, परमाणु सुविधाएँ, और नेतृत्व को निशाना बनाया। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। शुरुआती चरण में अमेरिका-इज़राइल की सैन्य श्रेष्ठता स्पष्ट थी—सैकड़ों हमले, ईरानी मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान। 

लेकिन जैसे स्वेज में हुआ, वैसे ही यहां भी असल जीत ईरान की तरफ झुकती दिख रही है। ईरान ने जवाबी हमले किए—अमेरिकी ठिकानों, इज़राइली क्षेत्रों, और खाड़ी देशों में मिसाइल-ड्रोन हमले। सबसे महत्वपूर्ण: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। जहाजों पर हमले, खतरों की चेतावनी, और कुछ मामलों में माइन बिछाने की रिपोर्ट्स। दुनिया का 20% तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। परिणाम? तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर, वैश्विक ऊर्जा संकट, एशिया में ईंधन राशनिंग, और शिपिंग रूट्स में बदलाव। 

ईरान की रणनीति स्पष्ट है:

 सैन्य रूप से ताकतवर पर भारी पड़ा ओर युद्ध को अंतरराष्ट्रीय बनाना। अमेरिका और इज़राइल की सैन्य शक्ति से डटकर मुकाबला, ओर वैश्विक अर्थव्यवस्था को इतना महंगा बना सकता है कि दबाव बढ़े और मध्यस्थता की मांग हो। ठीक वैसे ही जैसे नासेर ने स्वेज में किया था—नहर बंद करके यूरोप की अर्थव्यवस्था को झटका दिया। 

अमेरिका की सबसे बड़ी गलती: स्वेज की याद

1956 में ब्रिटेन ने सोचा था कि सैन्य बल से पुरानी महाशक्ति की हैसियत बहाल हो जाएगी। लेकिन अमेरिका ने उन्हें रोक दिया। आज अमेरिका खुद उसी जाल में फंसता दिख रहा है। यह "अमेरिका की जंग नहीं है"—यह इज़राइल के एजेंडे में खिंचकर अपनी विदेश नीति का नियंत्रण खोने जैसा है। 

परिणाम पहले से दिख रहे हैं: 

→ तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा। 

→ सहयोगी देश चुप हैं या विरोध कर रहे हैं—ट्रंप ने ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन से जहाज भेजने को कहा, लेकिन कोई साथ नहीं दे रहा। 

→ NATO में दरार, यूरोपीय देश डिप्लोमेसी की बात कर रहे हैं। 

→ अमेरिका अलग-थलग पड़ता जा रहा है, ठीक जैसे ब्रिटेन 1956 में हुआ था। 

स्वेज में पाउंड स्टर्लिंग की जगह डॉलर ने ली। आज क्या होगा? डॉलर की रिजर्व स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं—यदि यह संकट लंबा चला, तो वैकल्पिक मुद्राओं (युआन, यूरो) की ओर दुनिया मुड़ सकती है। अमेरिका की "अनलॉफुल वॉर" की छवि मजबूत हो रही है, और उसके मित्र राष्ट्र सच बोलने से हिचकिचा रहे हैं। 

ओमान जैसी आवाजें: संवाद का रास्ता अभी बाकी है

ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी जैसे लोग चेतावनी दे रहे हैं—यह जंग अमेरिका के हितों के खिलाफ है। क्षेत्रीय अस्थिरता, ऊर्जा संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा। स्वेज के बाद ब्रिटेन ने यूरोपीय एकीकरण की ओर रुख किया। आज अमेरिका को भी अपने सहयोगियों की सुननी होगी—युद्ध रोकना होगा, बातचीत की मेज पर लौटना होगा। 

इतिहास से सीखने का समय** स्वेज संकट ने साबित किया कि सैन्य विजय हमेशा राजनीतिक जीत नहीं होती। ब्रिटेन ने सुपरपावर का ताज खो दिया, पाउंड की हैसियत गई। आज होर्मुज पर वही कहानी दोहराई जा रही है—अमेरिका और इज़राइल सैन्य रूप से मजबूत हैं, लेकिन असल में हार रहे हैं। ईरान मजबूत हो रहा है, क्षेत्रीय राष्ट्रवाद उभर रहा है, और अमेरिका की वैश्विक छवि धूमिल हो रही है। 


क्या अमेरिका स्वेज की गलती दोहराएगा? या दुनिया अब जागेगी और इस "अवैध जंग" को रोकेगी? समय बता रहा है—शांति चुनना होगा, वरना विनाश की यह राह और लंबी हो जाएगी। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday 🌎 World March 19, 2026