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Tuesday, 31 March 2026

होर्मुज पर ईरान का नया ‘टोल गेट’: दोस्तों को फ्री पास, दुश्मनों को भारी खर्च समुद्र की सबसे संकरी और सबसे खतरनाक गली

होर्मुज पर ईरान का नया ‘टोल गेट’: दोस्तों को फ्री पास, दुश्मनों को भारी खर्च समुद्र की सबसे संकरी और सबसे खतरनाक गली
-Friday World-April 1,2026
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज—अब पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में आ गई है। जहां पहले जहाज बिना किसी रोक-टोक के गुजरते थे, वहां अब ईरान की संसद ने कानून बना दिया है। सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नेविगेशन सेवाओं के नाम पर हर व्यावसायिक जहाज से भारी “सुरक्षा शुल्क” वसूला जाएगा। कुछ मामलों में यह शुल्क प्रति यात्रा 2 मिलियन डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) तक पहुंच रहा है। 

लेकिन इस कानून में एक दिलचस्प मोड़ है। ईरान ने अपनी कूटनीति का कमाल दिखाते हुए कुछ चुनिंदा देशों के जहाजों को पूरी छूट दे दी है। सबसे प्रमुख उदाहरण है मलेशिया। मलेशिया के परिवहन मंत्री एंथनी लोक (Anthony Loke) और ईरान के राजदूत ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि मलेशियाई जहाजों से कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी। दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को वजह बताते हुए ईरान ने कहा— “मलेशिया हमारे दोस्त हैं, हम उनसे पैसे नहीं लेंगे।”

 यह फैसला महज एक छूट नहीं है। यह ईरान की नई रणनीति का हिस्सा है—चुनिंदा पहुंच (Selective Access)। जो देश ईरान के साथ दोस्ती रखता है, उसके जहाज मुफ्त में गुजरेंगे। जो देश दुश्मनी पर उतारू है (खासकर अमेरिका और इजरायल), उनके जहाजों पर न सिर्फ भारी शुल्क, बल्कि कई बार पूर्ण प्रतिबंध भी लग सकता है। 

ईरान का कानून: संप्रभुता का नया दावा ईरानी संसद की सिविल अफेयर्स कमिटी और नेशनल सिक्योरिटी कमिशन ने हाल ही में “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मैनेजमेंट प्लान” को मंजूरी दी। इस योजना में शामिल हैं: 

- सुरक्षा व्यवस्था

 - जहाजों की सुरक्षा 

- पर्यावरण संरक्षण

 - वित्तीय प्रबंधन

 - रियाल आधारित टोल सिस्टम 

ईरानी सांसदों का कहना है कि होर्मुज कोई अंतरराष्ट्रीय मुक्त जलमार्ग नहीं, बल्कि ईरान की संप्रभुता के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र है। इसलिए यहां से गुजरने वाले जहाजों को “सुरक्षा सेवाओं” के लिए शुल्क देना चाहिए। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले ही कुछ जहाजों से अनौपचारिक रूप से 2 मिलियन डॉलर तक वसूले जा चुके हैं। अब यह व्यवस्था कानूनी रूप से स्थायी हो रही है।

 गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने इस कानून को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) का उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि होर्मुज प्राकृतिक जलडमरूमध्य है, सुएज या पनामा नहर की तरह मानव-निर्मित नहीं। इसलिए यहां टोल लगाना गैरकानूनी है। लेकिन ईरान इन विरोधों को खारिज कर रहा है और कह रहा है कि युद्ध के समय सुरक्षा प्रदान करने का खर्च भी तो कोई उठाए। 

 मलेशिया को क्यों मिली छूट? मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और परिवहन मंत्री एंथनी लोक ने स्पष्ट किया कि ईरान के राजदूत ने उन्हें आश्वासन दिया है— “मलेशियाई जहाज बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर सकते हैं।” 

ईरान इसे “दोस्ती का पारस्परिक सम्मान” बता रहा है। मलेशिया मुस्लिम-बहुल देश है और ईरान के साथ उसके संबंध अच्छे रहे हैं। फिलहाल सात मलेशियाई टैंकर होर्मुज में फंसे थे, उन्हें बिना फीस के क्लियरेंस मिल गया।

 यह छूट सिर्फ मलेशिया तक सीमित नहीं लग रही। कुछ रिपोर्ट्स में भारत जैसे देशों के जहाजों को भी बिना शुल्क के गुजरने की बात कही गई है। वहीं अमेरिका, इजरायल और उनके करीबी सहयोगियों के जहाजों पर सख्ती बरती जा रही है। 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: तेल, व्यापार और मुद्रास्फीति होर्मुज से दुनिया का करीब 20% तेल और बड़ा हिस्सा LNG गुजरता है। अगर हर बड़े टैंकर को 1-2 मिलियन डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना पड़े, तो शिपिंग लागत में भारी उछाल आएगा। कंपनियां या तो यह लागत उपभोक्ताओं पर डालेंगी या फिर लंबे रास्ते (केप ऑफ गुड होप) चुनेंगी, जो समय और ईंधन दोनों बढ़ा देगा। 

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह टोल सिस्टम स्थायी हो गया तो: 

- वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ेंगी 

- शिपिंग कंपनियों के बीमा प्रीमियम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, उनमें और इजाफा होगा 

- भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे आयातक देशों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा 

- मुद्रास्फीति बढ़ने से आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा 

पहले बीमा कंपनियां युद्ध रिस्क के नाम पर प्रीमियम 1000 गुना तक बढ़ा चुकी हैं। अब ईरान का यह “सुरक्षा शुल्क” उस आग में घी डालने का काम कर रहा है। 

आधुनिक युद्ध की नई कला: बंदूक नहीं, बटुआ यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने होर्मुज को हथियार बनाया। पहले वह जहाजों पर हमले या जब्ती की धमकी देता था। अब वह कानूनी और आर्थिक रास्ता अपनाकर कह रहा है— “रास्ता चाहते हो? तो कीमत चुकाओ।” 

यह आर्थिक युद्धकला है। ईरान बिना बड़े सैन्य टकराव के अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। एक तरफ वह कहता है कि हमने जलडमरूमध्य नहीं बंद किया, दूसरी तरफ चुनिंदा देशों को फ्री पास देकर अपनी कूटनीतिक ताकत दिखा रहा है। 

मलेशिया को छूट देकर ईरान संदेश दे रहा है— “हमारे दोस्तों का स्वागत है, लेकिन दुश्मनों को महंगा पड़ेगा।” 

 क्या होगा आगे? अभी यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन संसद की कमिटी ने इसे मंजूरी दे दी है। अगर ईरान इसे लागू करता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अर्थतंत्र पर भारी बोझ 

 दूसरी तरफ, ईरान का तर्क है कि जब युद्ध चल रहा है, तो सुरक्षा का खर्च उठाना पड़ता है। जो देश हमला कर रहे हैं, उन्हें रास्ता देने का कोई कारण नहीं। 

भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। हमारा बड़ा हिस्सा तेल आयात होर्मुज से होता है। MEA ने कुछ रिपोर्ट्स को “भ्रामक” बताया है और कहा है कि भारतीय जहाज बिना शुल्क के गुजर रहे हैं। लेकिन अगर टोल सिस्टम स्थायी हुआ तो भारत को भी नई रणनीति बनानी पड़ेगी—चाहे वैकल्पिक मार्ग हों या कूटनीतिक प्रयास बढ़ाए जाएं।

 होर्मुज का यह नया ‘टोल गेट’ याद दिलाता है कि आज की जंग सिर्फ मिसाइलों और ड्रोनों से नहीं लड़ी जाती। बीमा प्रीमियम, सुरक्षा शुल्क, और चुनिंदा पहुंच भी हथियार बन गए हैं।

 ईरान ने दिखा दिया कि समुद्र की संप्रभुता सिर्फ नक्शे पर नहीं, बल्कि वास्तविक नियंत्रण में होती है। जो देश इस अदृश्य मोर्चे को समझ लेगा, वही आने वाले समय में व्यापार की लड़ाई में आगे रहेगा। 

समंदर शांत दिखता है, लेकिन उसकी लहरों में अब पैसे की गिनती हो रही है—और ईरान कैश काउंटर पर बैठ गया है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 1,2026