28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध अब 33 दिनों से ज्यादा हो चुके हैं। शुरू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भरोसा था कि कुछ दिनों के भीतर ईरान “टूट जाएगा”, खामेनी की शहादत
से शासन पलट जाएगा और ईरान के तेल खजाने पर कब्जा आसान हो जाएगा। लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट निकली। ईरान ने न सिर्फ सख्त प्रतिरोध किया, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से ब्लॉक कर विश्व अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया। आज अमेरिका युद्ध को जल्दी समाप्त करने के लिए बेकरार दिख रहा है, जबकि ईरान मजबूती से डटा हुआ है।
ट्रंप की शुरुआती उम्मीदें और गलत गणना
युद्ध शुरू होते ही इजरायली एयरस्ट्राइक्स में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनी की हत्या हो गई। ट्रंप ने इसे “बड़ी जीत” बताया और दावा किया कि अब ईरान में शासन परिवर्तन (regime change) आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा था कि ईरानी लोग “सत्ता से तंग आ चुके हैं” और जल्द ही विद्रोह कर देंगे।
लेकिन खामेनी की शहादत के बाद भी ईरान में कोई बड़े पैमाने का विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ। इसके बजाय खामेनी के बेटे मोजतबा खामेनी को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया। हालांकि ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि मोजतबा “गंभीर रूप से घायल” या “मृत” हो सकते हैं, लेकिन ईरानी मीडिया ने उनके नाम से संदेश जारी किए, जिससे सत्ता की निरंतरता साबित हुई।
ट्रंप की मुख्य रणनीति तीन बिंदुओं पर टिकी थी:
- ईरान की सैन्य क्षमता को तेजी से नष्ट करना
- शासन पलट कर नया अनुकूल शासन स्थापित करना
- ईरान के विशाल क्रूड ऑयल भंडारों पर नियंत्रण हासिल करना
33 दिनों बाद भी इनमें से कोई लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। इसके बजाय ईरान ने जवाबी हमलों में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त ठिकानों को निशाना बनाया और पड़ोसी देशों में अमेरिकी बेस पर भी हमले किए।
होर्मुज स्ट्रेट: ईरान की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक जीत
ईरान की सबसे प्रभावी चाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद करना रही। विश्व का लगभग 20-25% तेल और गैस इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को गुजरने से रोका, जबकि कुछ “मित्र देशों” को शर्तों पर अनुमति दी।
परिणाम:
- हजारों जहाज फंस गए
- वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं
- कई देशों के शेयर बाजार क्रैश हो गए
- अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ गईं, जिससे आम अमेरिकियों में नाराजगी बढ़ी
ट्रंप ने होर्मुज खुलवाने के लिए धमकियां दीं – “ईरान के पावर प्लांट्स को मिटा देंगे” – लेकिन ईरान ने जवाब में और भी सख्त चेतावनी दी। अमेरिका अब अकेले होर्मुज खोलने में असमर्थ दिख रहा है। NATO सहयोगी देश भी युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार कर चुके हैं।
NATO का इनकार और अंतरराष्ट्रीय अलगाव
ट्रंप को शुरू में उम्मीद थी कि NATO देश उन्हें पूरा साथ देंगे। लेकिन जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन समेत ज्यादातर सहयोगियों ने साफ मना कर दिया। कई देशों ने तो संयुक्त बयान जारी कर होर्मुज संकट को “वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा” बताया और शांतिपूर्ण समाधान की बात की।
इससे अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया। युद्ध अब सिर्फ अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान का नहीं, बल्कि अमेरिका की एकतरफा नीति के खिलाफ वैश्विक असंतोष का प्रतीक बन गया है।
ट्रंप के बार-बार बदलते बयान: असमंजस की तस्वीर
युद्ध के दौरान ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे, जो उनकी मजबूरी को उजागर करते हैं:
- शुरू में: “कुछ दिनों में ईरान समाप्त”
- फिर: “Regime change हमारा लक्ष्य नहीं”
- बाद में: “ईरान के साथ डील हो रही है”
- हाल ही में (1 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन): “युद्ध दो-तीन हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अगले दो-तीन हफ्तों में हम ईरान पर बहुत सख्त हमले करेंगे”
यह बार-बार पलटना अमेरिकी जनता और विश्व समुदाय दोनों को भ्रमित कर रहा है। अमेरिका में “No King Protest” जैसे प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां ट्रंप की “दादागीरी” की आलोचना हो रही है। उनकी अप्रूवल रेटिंग तेजी से गिर रही है।
ईरान की मजबूती के मुख्य कारण
1. आंतरिक एकता: खामेनी की मौत के बावजूद कोई बड़ा विद्रोह नहीं हुआ। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) अभी भी मजबूत नियंत्रण में है।
2. होर्मुज का रणनीतिक उपयोग: तेल आपूर्ति को हथियार बनाकर ईरान ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया।
3. जवाबी हमले: ईरान ने अमेरिकी बेस और इजरायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
4. क्षेत्रीय समर्थन: कुछ देशों (जैसे चीन, रूस के करीबी) ने ईरान को अप्रत्यक्ष समर्थन दिया।
अमेरिका पर पड़ रहे प्रभाव
- घरेलू स्तर पर ईंधन महंगा होने से मुद्रास्फीति बढ़ी
- वैश्विक बाजारों में अस्थिरता
- ट्रंप प्रशासन पर दबाव कि युद्ध जल्द खत्म करें
- सैन्य खर्च में भारी वृद्धि
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अब “विजय” की बजाय “सम्मानजनक निकास” (honorable exit) की तलाश में है।
युद्ध की सच्चाई
33 दिनों की जंग ने साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ सैन्य ताकत काफी नहीं होती। रणनीतिक धैर्य, क्षेत्रीय भूगोल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ईरान ने होर्मुज ब्लॉकेड और सख्त प्रतिरोध से अमेरिका को मजबूर कर दिया है। ट्रंप की जल्दबाजी और बदलते बयान अब उनकी कमजोरी को छिपा नहीं पा रहे।
अभी भी युद्ध जारी है और स्थिति बेहद नाजुक है। अगर दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते तो मध्य पूर्व की आग पूरी दुनिया को जला सकती है। होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति, तेल की कीमतें और कूटनीतिक प्रयास – ये तीन फैक्टर अगले कुछ हफ्तों में तय करेंगे कि युद्ध कब और कैसे खत्म होता है।
ईरान युद्ध ने एक बार फिर साबित कर दिया – कोई भी महाशक्ति अकेले पूरे क्षेत्र को नियंत्रित नहीं कर सकती। शक्ति संतुलन हमेशा बदलता रहता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 4,2026