-Friday World-April 4,2026
वाशिंगटन की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में हाल ही में एक द्विपक्षीय विधेयक पेश किया गया है, जो ताइवान की महत्वपूर्ण अंडरसी कम्युनिकेशन केबलों और अन्य क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास करता है। यह विधेयक Critical Undersea Infrastructure Resilience Initiative Act के नाम से जाना जाता है।
रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि माइक लॉलर (न्यूयॉर्क), डेमोक्रेटिक पार्टी के डेव मिन (कैलिफोर्निया) और ग्रेग स्टैंटन (एरिजोना) ने इस विधेयक को संयुक्त रूप से पेश किया। सीनेट में इसका साथी विधेयक सीनेटर जॉन कर्टिस (रिपब्लिकन, यूटा) और जैकी रोजेन (डेमोक्रेट, नेवादा) द्वारा पहले ही पेश किया जा चुका है, जो विदेश संबंध समिति में मार्कअप पास कर चुका है।
यह विधेयक चीन की बढ़ती "ग्रे जोन" रणनीति और संभावित तोड़फोड़ के खिलाफ ताइवान की रक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार, ताइवान के आसपास की समुद्री केबलें वैश्विक संचार और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन चीन इन्हें निशाना बनाकर ताइवान को अलग-थलग करने की कोशिश कर सकता है।
ताइवान की अंडरसी केबलों का महत्व क्यों?
ताइवान दुनिया की सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उसकी इंटरनेट, दूरसंचार, वित्तीय लेनदेन और यहां तक कि सैन्य संचार ज्यादातर अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबलों पर निर्भर है। ये केबलें ताइवान को विश्व के बाकी हिस्सों से जोड़ती हैं। अगर ये केबलें क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो ताइवान में इंटरनेट और संचार व्यवस्था ठप हो सकती है, जिसका असर न सिर्फ ताइवान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
पिछले कुछ वर्षों में ताइवान के आसपास कई बार अंडरसी केबलों को नुकसान पहुंचाया गया है। 2023 में मत्सु द्वीप समूह के पास दो केबलें कट गई थीं, जबकि 2025 में चूनघवा टेलीकॉम ने एक अंतरराष्ट्रीय केबल क्षति की सूचना दी, जिसमें एक चीनी लिंक्ड कार्गो जहाज शुनक्सिन39 को संदिग्ध माना गया। ताइवान की कोस्ट गार्ड ने भी ऐसे जहाजों पर नजर रखी है, जो जानबूझकर तोड़फोड़ कर सकते हैं। ये घटनाएं "ग्रे जोन" रणनीति का हिस्सा मानी जाती हैं—यानी न तो पूर्ण युद्ध, न शांति, बल्कि निरंतर दबाव और छोटी-छोटी कार्रवाइयों से विरोधी को कमजोर करना।
चीन की पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) इन रणनीतियों का इस्तेमाल करके ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक जुड़ाव को खतरे में डाल सकती है। अगर कोई बड़ा संघर्ष हुआ तो सबसे पहले इन्हीं केबलों को निशाना बनाया जा सकता है, ताकि ताइवान दुनिया से कट जाए और मदद न पहुंच सके।
विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
यह द्विपक्षीय विधेयक अमेरिकी प्रशासन को कई ठोस कदम उठाने का निर्देश देता है:
1. उन्नत निगरानी प्रणाली की तैनाती: समुद्र के नीचे एडवांस्ड सेंसर्स लगाए जाएंगे, जो वास्तविक समय में तोड़फोड़ या व्यवधान का पता लगा सकें। ये सेंसर्स गुप्त गतिविधियों पर नजर रखेंगे और शुरुआती चेतावनी प्रदान करेंगे।
2. ताइवान को रीयल-टाइम इंटेलिजेंस: अमेरिका ताइवान को जरूरी खुफिया जानकारी साझा करेगा, ताकि वह अपनी केबल नेटवर्क की सुरक्षा खुद कर सके।
3. त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल: केबलों को नुकसान पहुंचने पर तेजी से मरम्मत और सेवा बहाल करने की व्यवस्था। इससे डाउनटाइम कम होगा और अर्थव्यवस्था पर असर सीमित रहेगा।
4. सहयोगी देशों के साथ समन्वय: अमेरिका अपने सहयोगी राष्ट्रों (जैसे जापान, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस आदि) को सतर्क करेगा और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण में मदद करेगा। ताकि पूरे इंडो-पैसिफिक में अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा हो सके।
5. कोस्ट गार्ड पेट्रोलिंग: ताइवान जलडमरूमध्य और आसपास संयुक्त अमेरिका-ताइवान कोस्ट गार्ड गश्त की अनुमति। इससे समुद्री क्षेत्र में निगरानी बढ़ेगी।
6. डिप्लोमैटिक दबाव और प्रतिबंध चीन पर अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करने के लिए दबाव बढ़ाया जाएगा। केबल तोड़फोड़ में शामिल व्यक्तियों या संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।
7. क्रॉस-स्ट्रेट कंटिंजेंसी प्लानिंग ग्रुप: परिदृश्य-आधारित अभ्यास, कमजोरियों की पहचान और आपातकालीन योजना तैयार करने के लिए एक समूह का गठन।
कांग्रेसमैन माइक लॉलर ने कहा, “अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक संचार और आर्थिक स्थिरता की रीढ़ है। चीन के खतरे बढ़ रहे हैं, इसलिए अमेरिका को नेतृत्व करना चाहिए ताकि ये सिस्टम सुरक्षित और लचीले रहें। यह विधेयक तोड़फोड़ को रोकने, तेज प्रतिक्रिया देने और ताइवान तथा इंडो-पैसिफिक सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़े होने की हमारी क्षमता को बढ़ाएगा।”
कांग्रेसमैन डेव मिन ने जोर दिया कि चीन की बार-बार की गई तोड़फोड़ संयोग नहीं है। यह लोकतांत्रिक ताइवान को अलग-थलग करने और बिना गोली चलाए दबाव बनाने की जानबूझकर की गई मुहिम है।
कांग्रेसमैन ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि ताइवान की केबलें न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए, बल्कि अमेरिका और एरिजोना की आर्थिक हितों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
सीनेटर जॉन कर्टिस और जैकी रोजेन ने भी इस विधेयक को चीन की आक्रामकता के खिलाफ स्पष्ट संदेश बताया।
भू-राजनीतिक संदर्भ और प्रभाव
यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब चीन-ताइवान तनाव बढ़ रहा है। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और नियमित रूप से सैन्य अभ्यास, जहाजों की आवाजाही और ग्रे जोन कार्रवाइयों से दबाव बनाता रहता है। अंडरसी केबलों पर हमला "हाइब्रिड युद्ध" का एक सस्ता और प्रभावी तरीका है, जिसमें पारंपरिक युद्ध के बिना बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
अमेरिका के लिए ताइवान सिर्फ एक लोकतांत्रिक साथी नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था (खासकर सेमीकंडक्टर चिप्स) और इंडो-पैसिफिक स्थिरता का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इस विधेयक से अमेरिका ताइवान को मजबूत समर्थन दे रहा है और चीन को स्पष्ट चेतावनी दे रहा है कि ऐसी कार्रवाइयों का जवाब मिलेगा।
यह द्विपक्षीय सहमति (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों का समर्थन) दिखाती है कि ताइवान की सुरक्षा अमेरिकी राजनीति में कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है। सीनेट का साथी विधेयक पहले ही विदेश संबंध समिति से गुजर चुका है, जो विधेयक के आगे बढ़ने की संभावना बढ़ाता है।
एक मजबूत संदेश
चीन के बढ़ते खतरे के बीच यह विधेयक सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र, स्वतंत्रता और वैश्विक स्थिरता की रक्षा का प्रतीक है। अगर यह कानून बनता है तो ताइवान की केबल सुरक्षा मजबूत होगी, क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा और चीन की ग्रे जोन रणनीति पर अंकुश लगेगा।
अमेरिका का यह कदम साबित करता है कि वह ताइवान के साथ खड़ा है और समुद्र के नीचे छिपी कमजोरियों को भी नजरअंदाज नहीं करेगा। भविष्य में अगर चीन ने कोई तोड़फोड़ की कोशिश की तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय तैयार रहेगा—निगरानी, प्रतिक्रिया और प्रतिबंधों के साथ।
यह विकास न सिर्फ ताइवान और अमेरिका के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज की डिजिटल दुनिया में एक छोटी सी केबल कटौती भी लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 4,2026