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Friday, 3 April 2026

ईरान का चेतावनी भरा ‘हिट लिस्ट’: खाड़ी के 8 बड़े पुलों पर निशाना, “इट का जवाब पत्थर से” — मध्य पूर्व में तनाव चरम पर

ईरान का चेतावनी भरा ‘हिट लिस्ट’: खाड़ी के 8 बड़े पुलों पर निशाना, “इट का जवाब पत्थर से” — मध्य पूर्व में तनाव चरम पर-Friday World -April 3,2026 

अप्रैल 2026 — मध्य पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिका-इजरायल गठबंधन द्वारा ईरान के उत्तरी शहर करज के पास स्थित B1 ब्रिज (ईरान का सबसे ऊंचा और इंजीनियरिंग का शानदार पुल) पर हमला करने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की तैयारी दिखाते हुए खाड़ी देशों और जॉर्डन के 8 प्रमुख पुलों की ‘हिट लिस्ट’ जारी कर दी है। ईरानी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी (IRGC से जुड़ी) ने इस सूची को प्रकाशित करते हुए साफ संकेत दिया कि यह “टिट-फॉर-टैट" (जैसे को तैसा) की नीति का हिस्सा है। 

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल ने सार्वजनिक स्थानों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले करके साबित कर दिया है कि वे भी आतंकवादी तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब ईरान का जवाब भी उसी भाषा में होगा — “इट का जवाब पत्थर से”। 

 करज का B1 ब्रिज हमला: ईरान पर हमले की नई मिसाल 

2 अप्रैल 2026 को अमेरिकी-इजरायली हमले में करज के पास B1 हाईवे ब्रिज को निशाना बनाया गया। यह पुल तेहरान को पश्चिमी इलाकों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण लिंक था, जिसकी ऊंचाई 136 मीटर बताई जाती है और इसे मध्य पूर्व का सबसे ऊंचा पुल माना जा रहा था। हमले में कम से कम 8 नागरिकों की मौत हुई और 90 से ज्यादा लोग घायल हुए। कुछ रिपोर्ट्स में अस्पताल और सार्वजनिक स्थानों पर भी हमलों का जिक्र है, जिसे ईरान ने “नागरिक अवसंरचना पर जानबूझकर हमला” करार दिया। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले की जिम्मेदारी ली और सोशल मीडिया पर पुल के गिरने का वीडियो शेयर करते हुए चेतावनी दी कि “और भी बहुत कुछ बाकी है — ब्रिजेस के बाद पावर प्लांट्स”। ईरान का कहना है कि ये हमले न केवल सैन्य, बल्कि नागरिक जीवन को निशाना बनाने वाले हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। 

ईरान की ‘हिट लिस्ट’ — 8 प्रमुख पुल ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत निम्नलिखित 8 बड़े और रणनीतिक पुलों को संभावित लक्ष्य के रूप में नामित किया है: 

1. शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह सी ब्रिज (कुवैत)— लगभग 36-48 किमी लंबा यह समुद्री पुल कुवैत का उत्तरी जीवन रेखा माना जाता है।

 2. शेख जायद ब्रिज (UAE, अबू धाबी) — अबू धाबी को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल। 

3. अल मक़्ता ब्रिज (UAE) — अबू धाबी का एक प्रमुख यातायात लिंक, लगभग 300 मीटर लंबा। 

4. शेख खलीफा ब्रिज (UAE)— अबू धाबी क्षेत्र का अहम पुल। 

5. किंग फहद कॉजवे (सऊदी अरब — बहरीन) — 25 किमी लंबा यह कॉजवे दोनों देशों को जोड़ने वाला एकमात्र स्थायी सड़क मार्ग है।

 6. किंग हुसैन ब्रिज (जॉर्डन) — जॉर्डन और वेस्ट बैंक को जोड़ने वाला ऐतिहासिक पुल (80 मीटर)।

 7. दामिया ब्रिज (जॉर्डन) — जॉर्डन-वेस्ट बैंक सीमा पर स्थित। 

8. अब्दौन ब्रिज (जॉर्डन, अम्मान)— जॉर्डन की राजधानी में यातायात का महत्वपूर्ण हिस्सा।

 ये सभी पुल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, तेल परिवहन, दैनिक आवागमन और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर इनमें से एक भी प्रभावित होता है तो खाड़ी क्षेत्र में यातायात ठप हो सकता है, तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और वैश्विक बाजारों में झटका लग सकता है। 

ईरान का संदेश: प्रतिरोध और न्याय की लड़ाई ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि अमेरिका-इजरायल ने “आतंकवादी” तरीके अपनाकर ईरान की जनता पर हमले किए हैं। पुलों और अस्पतालों जैसी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना “नैतिक पतन” का प्रमाण है। अब ईरान का जवाब भी उसी स्तर पर होगा।

 ईरानी मीडिया में कहा गया है — “जो हमारी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाएगा, उसकी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचेगा।” यह सिर्फ सैन्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की रणनीति भी है। ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने और खाड़ी देशों की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की चेतावनी दे चुका है। 

 क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक चिंता यह ‘हिट लिस्ट’ खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों — कुवैत, UAE, सऊदी अरब, बहरीन — और जॉर्डन के लिए बड़ी चेतावनी है। ये देश पहले से ही ईरान के साथ तनावपूर्ण संबंध रखते हैं, लेकिन पूर्ण युद्ध की स्थिति में उनकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। 

- कुवैत और UAE: बड़े समुद्री और शहरी पुलों पर खतरा यातायात और व्यापार को ठप कर सकता है।

 - सऊदी-बहरीन: किंग फहद कॉजवे दोनों देशों की एकमात्र सड़क कड़ी है।

 - जॉर्डन: तीन पुलों पर खतरा वेस्ट बैंक और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करेगा। 

वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें पहले ही बढ़ रही हैं। अगर ये पुल प्रभावित हुए तो आपूर्ति श्रृंखला टूट सकती है, जिसका असर यूरोप, अमेरिका और एशिया पर पड़ेगा। कई विशेषज्ञ इसे “आर्थिक आतंकवाद” का नया रूप बता रहे हैं। 

 क्या है आगे का रास्ता? ईरान की यह चेतावनी स्पष्ट रूप से कह रही है कि वह अब सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि आक्रामक जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप प्रशासन की “स्टोन एज” वाली धमकियों के जवाब में ईरान ने साबित किया है कि वह अकेला नहीं है और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर जवाब दे सकता है। 

दुनिया भर के शांति प्रेमी लोग इस बढ़ते तनाव पर चिंता जता रहे हैं। यदि दोनों पक्ष नहीं रुके तो मध्य पूर्व में पूर्ण पैमाने का युद्ध छिड़ सकता है, जिसकी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ेगी — चाहे पुल टूटें, अस्पताल प्रभावित हों या तेल की आपूर्ति रुके। 

ईरान का “इट का जवाब पत्थर से” वाला रुख दिखाता है कि संघर्ष अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था तक पहुंच गया है। खाड़ी के 8 पुलों की हिट लिस्ट एक चेतावनी है — आगे बढ़ने से पहले सोच लो। क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय मूल्यों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत है।

 “जंग से कभी कोई नहीं जीतता — सिर्फ आम लोग हारते हैं।”

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World -April 3,2026