-Friday World-April 1,2026
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीजी (Ebrahim Azizi) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश दिया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट जरूर खुलेगा, लेकिन “आपके लिए नहीं”। अज़ीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “ट्रंप आखिरकार अपना ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) का सपना पूरा कर चुके हैं, लेकिन यह बदलाव क्षेत्र के समुद्री नियमों में हुआ है।”
अज़ीजी ने आगे कहा, “होर्मुज़ स्ट्रेट निश्चित रूप से खुलेगा, लेकिन सिर्फ उन देशों के लिए जो ईरान के नए कानूनों का पालन करेंगे। ४७ साल की मेहमाननवाज़ी हमेशा के लिए खत्म हो गई है।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर है और होर्मुज़ स्ट्रेट – दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग – बंदी या प्रतिबंधों की स्थिति में है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने हाल ही में एक योजना को मंजूरी दी है, जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (tolls) लगाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अमेरिका-इजराइल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल है।
इब्राहिम अज़ीजी का पूरा बयान और उसका अर्थ अज़ीजी का पोस्ट काफी तीखा और प्रतीकात्मक था। उन्होंने लिखा:
“ट्रंप ने आखिरकार अपना लंबे समय से चला आ रहा ‘रेजीम चेंज’ का सपना पूरा कर लिया है – लेकिन क्षेत्र के समुद्री व्यवस्था (maritime regime) में! होर्मुज़ स्ट्रेट निश्चित रूप से खुलेगा, लेकिन आपके लिए नहीं। यह केवल उन लोगों के लिए खुलेगा जो इस्लामी गणराज्य ईरान के नए कानूनों का अनुपालन करेंगे। ४७ साल की मेहमाननवाज़ी का दौर हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।”
यहाँ “४७ साल की मेहमाननवाज़ी” से तात्पर्य १९७९ की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ ईरान के संबंधों से है। ईरानी अधिकारी अक्सर १९७९ से पहले के शाह के शासन को अमेरिका की “मेहमाननवाज़ी” या हस्तक्षेप का प्रतीक मानते हैं। अब ईरान स्पष्ट रूप से कह रहा है कि पुराना दौर खत्म हुआ – अब नया समुद्री नियम लागू होगा।
ईरान का दावा है कि नया कानून समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा, क्षेत्रीय संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा करेगा। इसमें रियाल में टोल वसूलना, अमेरिकी और इजराइली जहाजों को प्रतिबंधित करना और सुरक्षा जांच बढ़ाना शामिल है।
होर्मुज़ स्ट्रेट: वैश्विक अर्थव्यवस्था की धमनी होर्मुज़ स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया का लगभग २०-२१% कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, UAE और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश इसके जरिए निर्यात करते हैं।
यदि यह स्ट्रेट लंबे समय तक बंद या प्रतिबंधित रहा, तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, शिपिंग रूट प्रभावित होंगे और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा। यूएई की एक मंत्री ने हाल ही में इसे “वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिल का दौरा” देने जैसा बताया था।
ट्रंप प्रशासन ने बार-बार होर्मुज़ स्ट्रेट को “मुक्त और खुला” रखने की मांग की है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि जब तक स्ट्रेट पूरी तरह खुला नहीं होता, अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखेगा। वहीं ईरान जवाब दे रहा है कि अब “मुक्त” का मतलब ईरानी नियमों के अनुसार होगा।
ईरान-अमेरिका युद्ध और समुद्री तनाव यह बयान वर्तमान ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच आया है। हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव, मिसाइल हमलों और कूटनीतिक बयानबाजी बढ़ी हुई है। ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हुए खुला रखने पर जोर दे रहे हैं।
ईरान की संसद की समिति द्वारा पारित योजना में शामिल प्रमुख बिंदु:
- होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों पर सुरक्षा शुल्क
- अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध
- समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना
- नेविगेशन के लिए नए विनियम और रियाल-आधारित भुगतान
ईरानी अधिकारी इसे “क्षेत्रीय संप्रभुता” का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि पश्चिमी देश इसे “अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अवैध नियंत्रण” का प्रयास मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव अज़ीजी के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है। तेल की कीमतें पहले ही अस्थिर हैं। यूरोप, एशिया और अमेरिका के कई देश इस स्ट्रेट पर निर्भर हैं।
- ट्रंप प्रशासन ने इसे “ईरान की धमकी” बताया और कहा कि अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
- यूएई और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश भी चिंतित हैं, क्योंकि उनका तेल निर्यात इसी रूट से होता है।
- चीन और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि वे ईरानी तेल और क्षेत्रीय स्थिरता पर निर्भर हैं।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ईरान का यह कदम “प्रतिरोध की रणनीति” का हिस्सा है, जिसमें हूती, हिज्बुल्लाह और अन्य ईरान-समर्थित समूह भी शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका और उसके सहयोगी स्ट्रेट को जबरन खुलवाने या वैकल्पिक रूट विकसित करने की बात कर रहे हैं।
इब्राहिम अज़ीजी का बयान ईरान की नई कूटनीतिक और सैन्य लाइन को साफ दर्शाता है – अब पुरानी “मेहमाननवाज़ी” नहीं चलेगी। ईरान चाहता है कि कोई भी देश होर्मुज़ स्ट्रेट का इस्तेमाल करे तो उसे ईरानी नियम मानने होंगे।
ट्रंप की तरफ से “रेजीम चेंज” की पुरानी बात को ईरान ने पलटकर “समुद्री रेजीम चेंज” कहकर जवाब दिया है। यह दिखाता है कि दोनों देश अब शब्दों के साथ-साथ रणनीतिक दबाव भी बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दोनों पक्ष संवाद की बजाय टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो होर्मुज़ स्ट्रेट क्षेत्रीय युद्ध का नया मोर्चा बन सकता है। वहीं यदि कूटनीति काम करती है, तो नए नियमों के तहत समझौता भी हो सकता है।
एक नया समुद्री युग? ईरानी सांसद इब्राहिम अज़ीजी का संदेश सिर्फ ट्रंप को नहीं, बल्कि पूरे विश्व को है – होर्मुज़ स्ट्रेट अब ईरान के शर्तों पर चलेगा। ४७ साल पुराना दौर खत्म हो चुका है। अब सवाल यह है कि वैश्विक शक्तियां इस नए वास्तविकता को कितना स्वीकार करेंगी और कितना चुनौती देंगी।
यह घटनाक्रम न केवल मध्य पूर्व की राजनीति, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अगले कुछ दिनों में होने वाले कूटनीतिक प्रयास या सैन्य गतिविधियां तय करेंगी कि होर्मुज़ स्ट्रेट का भविष्य क्या होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 1,2026