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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 1 April 2026

हूती अंसारुल्लाह का दावा: इसराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार, ईरान-हिज्बुल्लाह के साथ समन्वय में तीसरा हमला

हूती अंसारुल्लाह का दावा: इसराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार, ईरान-हिज्बुल्लाह के साथ समन्वय में तीसरा हमला
-Friday World-April 1,2026
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोही समूह अंसारुल्लाह ने बुधवार को इसराइल पर एक और बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया है। यह हमला अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में हूतियों की सक्रिय भागीदारी का हिस्सा बताया जा रहा है। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी (Yahya Saree) ने अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने “इसराइली दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों” पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की। 

यह हूतियों का तीसरा ऐसा हमला है, जिसे उन्होंने ईरान और लेबनान के हिज्बुल्लाह के साथ समन्वय में अंजाम दिया। हूतियों का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय “प्रतिरोध मोर्चों” (Axis of Resistance) की एकजुटता का प्रतीक है और वे तब तक हमले जारी रखेंगे, जब तक इजराइल और उसके सहयोगी ईरान, लेबनान, इराक और फिलिस्तीन पर आक्रामकता नहीं रोकते। 

 हमले का विवरण और हूतियों का बयान 

याह्या सरी ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि हमला दक्षिणी इसराइल में संवेदनशील सैन्य स्थानों को निशाना बनाकर किया गया। उन्होंने कहा, “ईश्वर की कृपा से हमारी सशस्त्र सेनाओं ने इसराइली दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार के साथ तीसरी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह ईरान और लेबनान के हिज्बुल्लाह भाइयों के साथ समन्वय में किया गया।”

 हूतियों ने दावा किया कि हमला सफल रहा और इसके उद्देश्य पूरे हो गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में आक्रामकता जारी रही, तो आगे और तीव्र हमले होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और 2026 के ईरान युद्ध ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया हुआ है।

 इसराइली सेना ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यमन से दागी गई एक मिसाइल को उनके एयर डिफेंस सिस्टम (Arrow या अन्य लेयर्स) ने बीच में ही रोक लिया। कोई हताहत या बड़ा नुकसान रिपोर्ट नहीं किया गया, हालांकि सायरन बजाए गए और दक्षिणी इसराइल (बीयरशेबा, एइलत क्षेत्र) में अलर्ट जारी रहा। 

हूतियों की क्षेत्रीय भूमिका और युद्ध में प्रवेश हूती अंसारुल्लाह यमन में 2014 से सत्ता पर काबिज एक शिया-ज़ैदी समूह है, जिसे ईरान हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। 2023-2024 में गाजा युद्ध के दौरान हूतियों ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले बढ़ाए थे, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ। अब 2026 के ईरान युद्ध में वे औपचारिक रूप से शामिल हो गए हैं।

 यह तीसरा हमला हूतियों की “प्रतिरोध की एकजुटता” की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हूती हमले इसराइल की रक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ाने और क्षेत्रीय ध्यान बंटाने का प्रयास हैं। इससे पहले मार्च के अंत में हूतियों ने दो हमले किए थे, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल हुआ।

 ईरान-इसराइल-अमेरिका संघर्ष में हूतियों का यह कदम “प्रतिरोध अक्ष” (Iran, Hezbollah, Houthis, Iraqi militias) की रणनीतिक एकता को दर्शाता है। हूतियों ने कहा कि वे लाल सागर में जहाजों पर हमले फिर शुरू कर सकते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नया खतरा पैदा कर सकता है। 

 क्षेत्रीय प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया इस हमले से मध्य पूर्व में युद्ध की आग और फैलने का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका ने हूती हमलों की निंदा की और उन्हें “आतंकवादी कार्रवाई” बताया। इसराइल ने कहा कि वह किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देगा। 

विश्लेषकों का मानना है कि हूतियों के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की क्षमता है, लेकिन इसराइल की बहुस्तरीय एयर डिफेंस (Iron Dome, David's Sling, Arrow) ने अब तक ज्यादातर हमलों को नाकाम किया है। फिर भी, बार-बार के हमले इसराइल की सेना को थका सकते हैं और संसाधनों का खर्च बढ़ा सकते हैं। 

यमन में हूतियों अंसारुल्लाह की पकड मजबूत है सऊदी अरब ने यमन पर थोपी गई सात साल की जंग मे डटकर मुकाबला किया था याह्या सरी जैसे प्रवक्ता मजबूती से “प्रतिरोध” की लाइन पर अड़े हुए हैं। 

 क्या आगे बढ़ेगा संघर्ष? हूतियों का यह दावा दिखाता है कि ईरान-समर्थित प्रॉक्सी ग्रुप्स युद्ध को एक मोर्चे तक सीमित नहीं रखना चाहते। लेबनान में हिज्बुल्लाह, इराकी मिलिशिया और अब यमन के हूती—सभी एक साथ सक्रिय हो रहे हैं। 

दूसरी ओर, इसराइल और अमेरिका का फोकस ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को नष्ट करने पर है। यदि हूती हमले जारी रहे, तो लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन फिर सक्रिय हो सकता है, जैसा 2024 में हुआ था। 

यह घटना वैश्विक स्तर पर भी चिंता पैदा कर रही है। तेल की कीमतें, शिपिंग रूट्स और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका असर पड़ रहा है। हूतियों का संदेश साफ है—वे “प्रतिरोध” की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे।  

एक जटिल और खतरनाक दौर हूती अंसारुल्लाह का तीसरा मिसाइल हमला मध्य पूर्व के मौजूदा युद्ध को नया आयाम दे रहा है। चाहे हूतियों का दावा कितना भी मजबूत हो, वास्तविकता यह है कि इसराइल की रक्षा प्रणालियां अभी मजबूत साबित हो रही हैं। लेकिन बार-बार के प्रयास क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं। 

शांति की उम्मीद तभी जगी सकती है, जब सभी पक्ष संवाद की राह अपनाएं और आक्रामकता रुकें। फिलहाल, हूतियों, ईरान और हिज्बुल्लाह की एकजुटता तथा इसराइल-अमेरिका की मजबूत प्रतिक्रिया के बीच मध्य पूर्व का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 1,2026