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Wednesday, 1 April 2026

ट्रंप का नाटो पर बड़ा हमला: “कागजी शेर” है गठबंधन, अमेरिका बाहर निकलने पर गंभीर विचार! ब्रिटेन की नौसेना पर भी तीखा तंज

ट्रंप का नाटो पर बड़ा हमला: “कागजी शेर” है गठबंधन, अमेरिका बाहर निकलने पर गंभीर विचार! ब्रिटेन की नौसेना पर भी तीखा तंज
-Friday World-April 1,2026 
ईरान युद्ध में सहयोग न करने के गुस्से में ट्रंप ने दिया नाटो को झटका – क्या टूट जाएगा विश्व का सबसे बड़ ै न्य गठबंधन? 

वाशिंगटन, 1 अप्रैल 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ को दिए विशेष इंटरव्यू में साफ कहा कि वे नाटो से अमेरिका को बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने नाटो को “कागजी शेर” (paper tiger) करार दिया और कहा कि यह फैसला अब “पुनर्विचार से भी आगे” की बात है। 

ट्रंप के इस बयान ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। खासकर जब यह बयान ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच आया है, जिसमें नाटो के अधिकांश सदस्य देश अमेरिका का पूरा समर्थन देने से बचते दिखे। 

ट्रंप ने क्या कहा? पूरा इंटरव्यू का सार द टेलीग्राफ के इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि ईरान संघर्ष के बाद क्या वे अमेरिका की नाटो सदस्यता पर पुनर्विचार करेंगे, तो उनका जवाब था: 

“ओह हां, मैं कहूंगा कि यह पुनर्विचार से भी आगे की बात है। मैं कभी भी नाटो से प्रभावित नहीं हुआ। मैं हमेशा जानता था कि वे एक **कागजी शेर** हैं, और व्लादिमीर पुतिन भी ये जानते हैं।” 

ट्रंप ने आगे कहा कि जब अमेरिका को सहयोग की जरूरत थी, तब नाटो “न सिर्फ वहां नहीं था, बल्कि यकीन करना मुश्किल था कि वे इतने अनुपस्थित रह सकते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका यूक्रेन में हमेशा यूरोप के साथ खड़ा रहा, लेकिन जब अमेरिका की बारी आई तो सहयोगी “नदारद” रहे। 

ब्रिटेन पर ट्रंप का तीखा हमला ट्रंप ने खासतौर पर ब्रिटेन को निशाने पर लिया। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा: 

“आपके पास तो नौसेना भी नहीं है। आप बहुत पुराने हो चुके हैं और आपके एयरक्राफ्ट कैरियर भी ठीक से काम नहीं करते।” 

ट्रंप ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी को “अप्रभावी” बताया और कहा कि लंदन को अब खुद की रक्षा के लिए “कुछ साहस जुटाना” चाहिए। उन्होंने स्टार्मर पर तंज कसते हुए कहा कि वे “महंगे पवन चक्कियों” (windmills) में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं, जो ब्रिटेन की ऊर्जा कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर रही हैं। 

 ईरान युद्ध का संदर्भ: क्यों भड़के ट्रंप? यह तीखा हमला इसलिए आया क्योंकि नाटो के सदस्य देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होने से इनकार कर दिया। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए नौसैनिक अभियान में यूरोपीय देशों ने सीमित या रक्षात्मक भूमिका निभाई, लेकिन पूर्ण समर्थन नहीं दिया। 

ट्रंप ने पहले भी नाटो देशों को “कायर” (cowards) कहा था और चेतावनी दी थी कि अगर वे मदद नहीं करेंगे तो अमेरिका “उनके लिए नहीं होगा”। उन्होंने कहा था – “अब हमें नाटो के लिए वहां रहने की जरूरत नहीं है।”

 ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप की शिकायतें बढ़ती गईं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने यूक्रेन संकट में यूरोप की मदद की, लेकिन जब अमेरिका को ईरान के खिलाफ लड़ाई में साथ चाहिए तो सहयोगी पीछे हट गए। 

नाटो क्या है और इसका महत्व? नाटो (North Atlantic Treaty Organization) 1949 में स्थापित हुआ था, मुख्य रूप से सोवियत संघ के विस्तार को रोकने के लिए। इसका मूल सिद्धांत आर्टिकल 5 है – एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा। इसकी सिर्फ एक बार (9/11 के बाद) सक्रियता देखी गई, जब यूरोपीय देशों ने अफगानिस्तान में अमेरिका का साथ दिया। 

ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं। वे कहते हैं कि यूरोपीय देश रक्षा पर कम खर्च करते हैं और अमेरिका पूरे बोझ को उठाता है। उनके पहले कार्यकाल में भी उन्होंने सहयोगियों से 2% जीडीपी रक्षा खर्च की मांग की थी।

 अब ईरान युद्ध ने इस पुरानी शिकायत को नया रूप दे दिया है। ट्रंप का मानना है कि नाटो “एक तरफा सड़क” बन गया है – अमेरिका सब कुछ देता है, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिलता। 

दुनिया की प्रतिक्रिया 

- ब्रिटेन: प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने नाटो को “दुनिया का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन” बताया और कहा कि ब्रिटेन इसे मजबूत रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ईरान युद्ध में ब्रिटेन की भूमिका को “रक्षात्मक” बताया और पूर्ण शामिल होने से इनकार किया। 

- यूरोप: कई देशों के नेता अभी चुप हैं, लेकिन पृष्ठभूमि में चिंता व्यक्त की जा रही है। जर्मनी ने नाटो के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 

- विश्लेषक: कुछ का मानना है कि ट्रंप के ये बयान रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर खतरा मान रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से बाहर निकला तो यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है और रूस-चीन को फायदा हो सकता है। 

आगे क्या? ट्रंप ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके शब्दों से साफ है कि ईरान युद्ध के बाद नाटो पर उनकी नजर सख्त हो गई है। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों को अब “अपना तेल खुद हासिल करना” सीखना चाहिए। 

यह विवाद न सिर्फ ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, तेल की कीमतों और भारत जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है। भारत, जो रूस और मध्य पूर्व दोनों से संबंध रखता है, इस स्थिति को बारीकी से देख रहा है। 

ट्रंप का यह इंटरव्यू एक बार फिर साबित करता है कि उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति अब नाटो जैसे लंबे समय से चले आ रहे गठबंधनों को भी चुनौती दे रही है। क्या यह सिर्फ गुस्से की अभिव्यक्ति है या वाकई नाटो के अंत की शुरुआत? समय बताएगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने द टेलीग्राफ इंटरव्यू में नाटो को “कागजी शेर” कहकर और ब्रिटेन की नौसेना पर तंज कसकर साफ संदेश दिया है – अमेरिका अब बिना शर्त सहयोग नहीं देगा। ईरान संघर्ष ने नाटो की कमजोरियां उजागर कर दी हैं और ट्रंप इसे भूलने वाले नहीं हैं। दुनिया अब इसकी अगली कड़ी का इंतजार कर रही है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 1,2026