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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं – ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल-डीजल की ऐतिहासिक बढ़ोतरी, आम लोगों पर महंगाई का बोझ
कैनबरा, 1 अप्रैल 2026: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने पूरे देश को संबोधित करते हुए साफ कहा कि मध्य पूर्व में चल रही अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग के कारण आने वाले महीने आसान नहीं होंगे। उन्होंने खुलकर माना कि कोई भी सरकार इस संघर्ष से पैदा हुए आर्थिक दबावों को पूरी तरह खत्म करने का वादा नहीं कर सकती।
यह दुर्लभ राष्ट्रीय संबोधन ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और कई इलाकों में ईंधन की कमी की शिकायतें बढ़ रही हैं। अल्बनीज़ ने आम ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों से अपील की कि वे सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करें और ग्रामीण क्षेत्रों तथा जरूरी सेवाओं के लिए ईंधन बचाएं।
अल्बनीज़ का पूरा बयान: क्या कहा पीएम ने? अपने राष्ट्र को संबोधन में प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने कहा:
“आने वाले महीने आसान नहीं हो सकते। मैं इस बारे में खुलकर बात करना चाहता हूं। कोई भी सरकार इस जंग की वजह से पैदा हुए दबावों को पूरी तरह खत्म करने का वादा नहीं कर सकती। मैं वादा कर सकता हूं कि हम ऑस्ट्रेलिया को इस संकट के सबसे बुरे प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ये अनिश्चित समय हैं, लेकिन मैं इस बात पर पूरी तरह आश्वस्त हूं कि हम इन चुनौतियों का सामना ऑस्ट्रेलियाई तरीके से करेंगे – साथ मिलकर और एक-दूसरे का ख्याल रखते हुए, जैसा हम हमेशा करते आए हैं।”
उन्होंने आगे कहा:
“ऑस्ट्रेलिया इस जंग में सक्रिय रूप से शामिल नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हर ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बढ़ी हुई कीमतों का बोझ उठा रहा है।”
अल्बनीज़ ने स्पष्ट अपील की कि लोग ईंधन की होर्डिंग न करें, खासकर ईस्टर छुट्टियों के दौरान। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर संभव हो तो काम पर जाने के लिए ट्रेन, बस या ट्राम का इस्तेमाल करें। इसका मकसद था कि ईंधन नर्सों, शिफ्ट वर्कर्स, ट्रेड्सपर्सन, खनन मजदूरों और ग्रामीण समुदायों के लिए बचाया जा सके।
कई राज्यों ने भी प्रतिक्रिया दी है। विक्टोरिया राज्य ने ट्रेन, ट्राम और बसों को मुफ्त करने की घोषणा की है ताकि लोगों को ड्राइविंग से बचाया जा सके।
ईरान जंग का ऑस्ट्रेलिया पर असर: क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों से क्षेत्रीय संघर्ष तेजी से फैला। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया – यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% समुद्री कच्चे तेल और 20% LNG का परिवहन करता है।
ऑस्ट्रेलिया खुद मध्य पूर्व से सीधा कच्चा तेल नहीं आयात करता, लेकिन उसका 90% से ज्यादा परिष्कृत ईंधन (पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल) सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के रिफाइनरियों से आता है, जो होर्मुज पर निर्भर हैं। नतीजा:
- पेट्रोल की कीमतों में 25 से 60 सेंट प्रति लीटर की बढ़ोतरी - डीजल में 50 से 100 सेंट प्रति लीटर तक उछाल
- कुछ इलाकों में पेट्रोल पंपों पर स्थानीय कमी
- खाद्य पदार्थों, उर्वरकों, प्लास्टिक और परिवहन लागत में वृद्धि
ब्रेंट क्रूड की कीमतें $104 से ऊपर पहुंच गईं और कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो यह $200-$250 प्रति बैरल तक जा सकती है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने तत्काल कदम उठाए:
- तीन महीने के लिए पेट्रोल और डीजल पर फ्यूल एक्साइज टैक्स को आधा कर दिया (26.3 सेंट प्रति लीटर की राहत)
- ईंधन सुरक्षा योजना के चार चरणों की घोषणा
- ACCC (Australian Competition and Consumer Commission) द्वारा मूल्य वृद्धि की जांच
वैश्विक संदर्भ: एक जंग, कई प्रभाव यह संकट सिर्फ ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने भी अपने नागरिकों से कहा कि “यह आसान नहीं होगा”। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कल राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं।
ट्रंप प्रशासन ईरान से जल्द निकलने की बात कर रहा है, लेकिन होर्मुज की स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी, शेयर बाजार प्रभावित होंगे और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।
ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर खासतौर पर खनन, कृषि और परिवहन क्षेत्र में दिख रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी कमजोर हुआ है।
अल्बनीज़ सरकार की रणनीति: राहत और अपील सरकार का फोकस दो तरफा है:
1. तत्काल राहत: फ्यूल टैक्स में कटौती, कुछ राज्यों में मुफ्त सार्वजनिक परिवहन।
2. लंबी अवधि की तैयारी: ईंधन आयात के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश और रणनीतिक भंडारण बढ़ाना।
अल्बनीज़ ने जोर दिया कि ऑस्ट्रेलिया “साथ मिलकर” इन चुनौतियों का सामना करेगा। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आवश्यक सेवाओं और ग्रामीण ऑस्ट्रेलिया का विशेष उल्लेख किया, जिन पर इस संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
भारत और अन्य देशों के लिए सबक भारत, जो खुद तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर है, इस स्थिति को बारीकी से देख रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की कोई भी अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, मुद्रास्फीति और व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकती है। कई विश्लेषक कह रहे हैं कि इस जंग ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
आगे क्या? ट्रंप के आगामी संबोधन पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अगर अमेरिका और इजराइल जल्द कोई समझौता या डी-एस्केलेशन का रास्ता निकालते हैं तो तेल की कीमतें स्थिर हो सकती हैं। लेकिन अगर संघर्ष बढ़ा तो आने वाले महीनों में महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक मंदी की आशंका बनी रहेगी।
प्रधानमंत्री अल्बनीज़ का यह संबोधन न सिर्फ सच्चाई स्वीकार करने का उदाहरण है, बल्कि नागरिकों से सामूहिक जिम्मेदारी की अपील भी है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश, जो युद्ध में सीधे शामिल नहीं हैं, फिर भी इसके आर्थिक झटके महसूस कर रहे हैं – यह वैश्वीकरण की सच्चाई है।
आने वाले महीने वाकई चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। पेट्रोल की बढ़ती कीमतें, परिवहन पर बोझ और मुद्रास्फीति हर घर को प्रभावित कर रही है। लेकिन अल्बनीज़ सरकार का संदेश साफ है – घबराएं नहीं, साथ मिलकर सामना करेंगे। ऑस्ट्रेलियाई लोग अपनी मजबूत एकजुटता के लिए जाने जाते हैं और इस संकट में भी वही भावना काम आएगी।
समय बताएगा कि होर्मुज कब खुलता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी जल्दी सामान्य होती है। फिलहाल, हर नागरिक का छोटा-छोटा योगदान – सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, ईंधन की बचत – बड़ा फर्क ला सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
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