-Friday World-April 5,2026
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में पिछले कई हफ्तों से चले आ रहे तनाव और ईरान के लगाए गए प्रतिबंधों के बीच एक सकारात्मक खबर सामने आई है। ईरान द्वारा बनाए गए विवादास्पद “टोल बूथ” रूट को पूरी तरह बायपास करते हुए कम से कम चार बड़े वाणिज्यिक जहाज़ – जिनमें दो सुपरटैंकर, एक एलएनजी कैरियर और एक भारतीय ध्वज वाला कार्गो जहाज शामिल हैं – ओमान की प्रादेशिक जलसीमा का उपयोग करके सफलतापूर्वक गुजर गए हैं।
यह नया मार्ग अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से दूर, ओमान की साँकड़ी समुद्री धुनी (मुसंदम प्रायद्वीप के आसपास) से होकर जाता है, जो ईरान के नियंत्रित रूट से पूरी तरह अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास परिवहन लागत कम करने, सुरक्षा बढ़ाने और वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति को स्थिर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
क्या है यह नया सुरक्षित रूट?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ दुनिया का सबसे संकरी समुद्री गलियारा है, जहाँ से वैश्विक तेल का लगभग 20% और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कई जहाजों पर हमले किए और एक लंबा, जटिल रूट बनाया जो उसके नौसैनिक अड्डों (खासकर लारक और क़ेश्म द्वीपों) के पास से गुजरता है।
इस रूट को “तेहरान टोल बूथ” का नाम दिया गया, क्योंकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जहाजों से प्रति बैरल करीब 1 डॉलर (कुछ मामलों में प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक) का शुल्क वसूल रहा था। जहाजों को IRGC की मंजूरी लेनी पड़ती थी, दस्तावेज जमा करने पड़ते थे और “दोस्ताना” देशों को प्राथमिकता दी जाती थी।
अब रिमोट सेंसिंग, AIS डेटा और सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि चार जहाज़ों ने इस टोल रूट को पूरी तरह अवॉइड किया और ओमान की प्रादेशिक जलसीमा (Musandam Peninsula के करीब) का सहारा लिया। यह मार्ग दक्षिणी तरफ है, जहाँ जहाज ओमान की तटरेखा से सटकर गुजरे। तीन जहाजों ने AIS सिग्नल बंद कर दिए जब वे मुसंदम प्रायद्वीप के सिरे पर पहुँचे, और बाद में ओमान के पास दोबारा दिखे।
यह रूट ईरान के Larak Island वाले उत्तरी गलियारे से पूरी तरह अलग है और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से भी बचता हुआ ओमान की 12 नॉटिकल माइल की प्रादेशिक सीमा में रहता है।
कौन-कौन से जहाज गुजरे?
- हबरुत (Habrut) और धलकुत (Dhalkut): मार्शल आइलैंड्स ध्वज वाले दो बहुत बड़े क्रूड ऑयल कैरियर (VLCC)। ये सुपरटैंकर लाखों बैरल तेल ले जा रहे थे।
- सोहर एलएनजी (Sohar LNG): पनामा ध्वज वाला एलएनजी कैरियर, जो युद्ध शुरू होने के बाद का पहला एलएनजी जहाज है जो हॉर्मुज़ से सफलतापूर्वक गुजरा। यह जापान की Mitsui O.S.K Lines के आंशिक स्वामित्व में है।
- एमएसवी कुबा (MSV Quba MNV 2183): भारत का ध्वज वाला कार्गो जहाज, जो दुबई से रवाना हुआ था। यह चारों में चौथा जहाज था जो ओमान की जलसीमा से गुजरा।
ये जहाज ओमान शिप मैनेजमेंट कंपनी से जुड़े दिख रहे हैं और ट्रांसपोंडर पर “ओमानी शिप” का संदेश प्रसारित कर रहे थे, जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण था।
ईरान का टोल बूथ और IRGC बेस पर आग
ईरान ने इस रूट को “सुरक्षा प्रोटोकॉल” का नाम दिया था, लेकिन वास्तव में यह नियंत्रण और राजस्व कमाने का माध्यम बन गया। IRGC के क़ेश्म द्वीप (Qeshm Island) पर स्थित मुख्य नौसैनिक अड्डे को “टोल कलेक्टर” बेस कहा जा रहा था। हाल ही में इस बेस पर भयंकर आग लगी, जिसमें चार वेयरहाउस नष्ट हो गए। सैटेलाइट इमेज में धुएँ के गुबार साफ दिखे। माना जा रहा है कि यह आग हवाई हमलों का नतीजा हो सकती है, जिससे ईरान की निगरानी क्षमता प्रभावित हुई है।
यह घटना ठीक उसी समय हुई जब जहाज ओमान रूट से गुजर रहे थे, जिससे ईरान की पकड़ कमजोर पड़ने के संकेत मिले।
भारत और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। हॉर्मुज़ बंद होने या महँगे टोल के कारण परिवहन लागत बढ़ गई थी और आपूर्ति प्रभावित हुई थी। भारतीय जहाज MSV कुबा का इस नए रूट से गुजरना भारत के लिए राहत की खबर है।
वैश्विक स्तर पर:
- तेल और एलएनजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है।
- बीमा लागत घट सकती है।
- परिवहन समय और खर्च दोनों में बचत संभव है।
ओमान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ओमान ने तटस्थता बनाए रखते हुए अपनी जलसीमा का उपयोग करने की अनुमति दी लगती है, जो क्षेत्रीय संतुलन में मददगार साबित हो रहा है।
आगे क्या?
यह पहला सफल प्रयास है, लेकिन अभी पूरी तरह स्थायी रूट नहीं माना जा रहा। यदि अधिक जहाज इस ओमान रूट को अपनाते हैं, तो ईरान का “टोल बूथ” प्रभावहीन हो सकता है। हालांकि, क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है, इसलिए नौसेना सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे।
भारत सरकार और भारतीय नौसेना पहले से ही ऑपरेशन संकल्प और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अभियानों के तहत भारतीय जहाजों की सुरक्षा कर रही है। इस नए विकास से उम्मीद है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जल्द सामान्य हो सकेगी।
यह घटना दिखाती है कि भू-राजनीतिक तनाव के बीच भी वैकल्पिक रास्ते निकल सकते हैं। ओमान की साँकड़ी धुनी से गुजरने वाला यह मार्ग न केवल सुरक्षित साबित हो रहा है, बल्कि ईरान के एकतरफा नियंत्रण को चुनौती भी दे रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 5,2026