Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 15 July 2026

अमेरिकी सैनिकों की 23 साल बाद पूर्ण वापसी: इराक से 'फॉरएवर वॉर' का अंत, ट्रंप की ऐतिहासिक घोषणा

अमेरिकी सैनिकों की 23 साल बाद पूर्ण वापसी: इराक से 'फॉरएवर वॉर' का अंत, ट्रंप की ऐतिहासिक घोषणा
-Friday World Jul 16 2026
नई दिल्ली/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया के राजनीतिक परिदृश्य में एक युगांतकारी बदलाव आ रहा है। वर्ष 2003 में सद्दाम हुसैन के शासन को समाप्त करने के लिए इराक में दाखिल हुई अमेरिकी सेना आखिरकार 23 वर्ष बाद देश से पूरी तरह बाहर निकल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के बीच व्हाइट हाउस में हुई ऐतिहासिक बैठक के बाद 30 सितंबर 2026 तक सभी अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। यह फैसला न केवल अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव का प्रतीक है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से आकार देने वाला है।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब दुनिया 'फॉरएवर वॉर्स' (अनंत युद्धों) से थक चुकी है। ट्रंप ने लंबे समय से वादा किया था कि वे अमेरिकी सैनिकों को अनावश्यक विदेशी मिशनों से वापस लाएंगे। अब इराक से यह वापसी उस वादे को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

 बैठक और घोषणा: ट्रंप-जैदी की ऐतिहासिक मुलाकात

व्हाइट हाउस में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम अब इराक में सैन्य उपस्थिति की जरूरत नहीं समझते। 30 सितंबर 2026 तक हमारे सभी सैनिक स्वदेश लौट आएंगे। अब संबंध सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक होंगे।" इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इराक अब पूर्ण संप्रभुता के साथ आगे बढ़ेगा। उन्होंने जोर दिया कि 30 सितंबर के बाद इराक में राज्य के अलावा कोई भी सशस्त्र समूह हथियार नहीं रख सकेगा।

यह बैठक इराक के नए प्रधानमंत्री की पहली अमेरिका यात्रा थी। दोनों नेताओं ने तेल, ऊर्जा, निवेश और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। ट्रंप ने इराकी तेल क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने का संकेत दिया, जबकि जैदी ने इराक के पुनर्निर्माण में अमेरिकी निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया।

2003 से 2026 तक: इराक युद्ध की पूरी कहानी

2003 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन ने 'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम' शुरू किया था। आधिकारिक तौर पर सद्दाम हुसैन के पास सामूहिक विनाश के हथियार होने का आरोप लगाया गया, हालांकि बाद में वे नहीं मिले। युद्ध में लाखों इराकी नागरिकों की मौत हुई, सद्दाम को फांसी दी गई और इराक में अराजकता फैल गई। 

इस युद्ध ने अमेरिका को हजारों सैनिकों की जान और ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्चा दिया। 2011 में बराक ओबामा ने मुख्य लड़ाकू मिशन समाप्त किया, लेकिन ISIS (इस्लामिक स्टेट) के उदय के बाद 2014 में वापसी हुई। अब 2026 में ट्रंप के नेतृत्व में पूर्ण वापसी हो रही है। यह अमेरिकी इतिहास में एक लंबे अध्याय का समापन है।

 ईरान की रणनीतिक जीत?

विश्लेषक इस फैसले को ईरान की लंबी अवधि की रणनीति की सफलता मान रहे हैं। ईरान लंबे समय से अमेरिका को इराक और पूरे मध्य पूर्व से सैन्य हटाने के लिए दबाव डाल रहा था। ईरान समर्थित शिया मिलिशिया समूहों ने हाल के वर्षों में अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट और ड्रोन हमलों की श्रृंखला चलाई। इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की गईं।

इरबिल और अल-असद जैसे ठिकानों पर हुए हमलों में अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई-टेक उपकरणों का नुकसान 2.3 से 2.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। ईरान ने इसे अपनी "प्रतिरोध की अक्षम्य शक्ति" बताया है। अब अमेरिकी सैनिकों की वापसी से ईरान समर्थित समूहों की स्थिति मजबूत हो सकती है, हालांकि इराकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह सभी हथियारों पर राज्य का नियंत्रण सुनिश्चित करेगी।

 आर्थिक संबंधों की नई शुरुआत

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि सैनिकों की वापसी का मतलब अमेरिका का इराक से पूर्ण अलगाव नहीं है। बल्कि, अब संबंध आर्थिक होंगे। इराक दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों वाला देश है। अमेरिकी कंपनियां यहां निवेश बढ़ा सकती हैं। इराक पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी पूंजी की तलाश में है।

जैदी ने कहा, "30 सितंबर को अमेरिकी सैनिक बाहर, लेकिन अमेरिकी कंपनियां अंदर आएंगी।" यह मॉडल मध्य पूर्व में अमेरिकी नीति के बदलाव को दर्शाता है — सैन्य कब्जे की जगह आर्थिक साझेदारी।

 क्षेत्रीय प्रभाव: मध्य पूर्व का नया समीकरण

1. इराक की संप्रभुता: इराक अब स्वतंत्र रूप से अपनी विदेश नीति चला सकेगा। हालांकि, आंतरिक चुनौतियां जैसे मिलिशिया समूह, आर्थिक संकट और ISIS के अवशेष बने रहेंगे।

2. ईरान का प्रभाव: ईरान की पहुंच बढ़ सकती है, लेकिन सऊदी अरब, इजराइल और खाड़ी देश सतर्क रहेंगे।

3. ISIS और आतंकवाद: अमेरिका ने ISIS के खिलाफ लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई थी। वापसी के बाद इराकी सेना और स्थानीय बलों की क्षमता पर निर्भर रहेगा।

4. कुरदिस्तान क्षेत्र: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, हरिर एयर बेस जैसे क्षेत्रों में सीमित उपस्थिति बनी रह सकती है, लेकिन मुख्य इराकी क्षेत्र से पूर्ण निकासी होगी।

5. वैश्विक प्रभाव: यह चीन और रूस जैसे देशों को मध्य पूर्व में अधिक सक्रिय होने का मौका दे सकता है।

चुनौतियां और अवसर

चुनौतियां:
- इराकी मिलिशिया समूह हथियार नहीं छोड़ना चाहते।
- आर्थिक अस्थिरता और बेरोजगारी।
- पड़ोसी देशों से सुरक्षा खतरे।
- अमेरिकी कंपनियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना।

अवसर:
- इराक का युवा वर्ग विकास चाहता है।
- तेल निर्यात बढ़ाकर अर्थव्यवस्था मजबूत करना।
- क्षेत्रीय शांति और सहयोग के नए रास्ते।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इराक अब खुद को संभाल सकता है। यह "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा है, जिसमें अनावश्यक विदेशी युद्धों से बचना शामिल है।

इतिहास का नया पन्ना

23 वर्षों के युद्ध, कब्जे, पुनर्निर्माण और संघर्ष के बाद इराक एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। अमेरिका के लिए यह महंगे युद्धों से मुक्ति का प्रतीक है। ट्रंप की यह घोषणा न केवल चुनावी वादों को पूरा करती है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगी।

दुनिया अब देखेगी कि बिना सैन्य उपस्थिति के अमेरिका-इराक संबंध कैसे मजबूत होते हैं। क्या यह मध्य पूर्व में स्थायी शांति की नींव बनेगा या नए संघर्षों को जन्म देगा? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, 30 सितंबर 2026 एक ऐतिहासिक तारीख बनने जा रही है — जब इराक आखिरकार पूर्ण स्वतंत्रता की ओर एक कदम और बढ़ जाएगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Jul 16 2026

#USWithdrawalFromIraq
#EndOfForeverWar
#TrumpAnnouncement
#TroopsComingHome
#IraqWarEnds
#Fridayworld