दुनिया की नजरें एक बार फिर मध्य-पूर्व और यूरोप के बीच चल रही कूटनीतिक जंग पर टिकी हैं। फ्रांस ने इस हफ्ते ईरान के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। फ्रांसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने बीएफएम टीवी और आरएमसी रेडियो को दिए संयुक्त साक्षात्कार में दो टूक कहा कि यूरोपीय संघ के प्रतिबंध तब तक नहीं हटाए जाएंगे जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल परियोजनाओं और क्षेत्र में "अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों" को पूरी तरह खत्म नहीं कर देता।
बैरो के इस बयान को यूरोप की ओर से ईरान के लिए सबसे कड़े संदेशों में से एक माना जा रहा है। उन्होंने कहा, _"ईरानी शासन पर प्रतिबंध तब तक नहीं हटेंगे जब तक वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा, क्षेत्र को अस्थिर करने वाली क्रांतिकारी परियोजना और अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को नहीं छोड़ देता। इनमें से कुछ मिसाइलें एक दिन यूरोप के लिए भी खतरा बन सकती हैं।"_
फ्रांस का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु समझौते को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें कई सालों से अटकी हुई हैं।
क्यों बढ़ा फ्रांस का दबाव?
फ्रांस का तर्क तीन बड़े बिंदुओं पर टिका है:
1. परमाणु कार्यक्रम
फ्रांस का मानना है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन के स्तर को लगातार बढ़ा रहा है। 2015 के जेसीपीओए समझौते के बाद भी तेहरान ने कई बार संवर्धन की सीमा तोड़ी है। पेरिस को डर है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर लेगा।
2. बैलिस्टिक मिसाइलें
ईरान का मिसाइल कार्यक्रम फ्रांस और पूरे यूरोप के लिए चिंता का विषय बन गया है। बैरो ने सीधे कहा कि कुछ ईरानी मिसाइलों की रेंज इतनी है कि भविष्य में वे यूरोपीय धरती को निशाना बना सकती हैं।
3. क्षेत्रीय अस्थिरता
फ्रांस का आरोप है कि ईरान यमन, सीरिया, लेबनान और इराक में सशस्त्र समूहों को समर्थन देकर पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है। पेरिस इसे "क्रांतिकारी परियोजना" कहता है जिसका मकसद मध्य-पूर्व में ईरान का वर्चस्व स्थापित करना है।
इसीलिए फ्रांस ने कहा कि प्रतिबंध सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं रहेंगे। जब तक ईरान _"अपने लोगों को अपना भविष्य खुद चुनने की स्वतंत्रता"_ नहीं देता, तब तक दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रतिबंधों में क्या शामिल है?
यूरोपीय संघ ने 2011 के बाद से ईरान पर कई चरणों में प्रतिबंध लगाए हैं:
- आर्थिक प्रतिबंध: ईरानी तेल और गैस के निर्यात पर रोक, बैंकों के साथ लेन-देन पर पाबंदी
- व्यक्तिगत प्रतिबंध: ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेताओं की यूरोप में संपत्ति फ्रीज करना और वीजा बैन
- तकनीकी प्रतिबंध: बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु तकनीक से जुड़े उपकरणों के निर्यात पर रोक
फ्रांस चाहता है कि ये सभी प्रतिबंध एक पैकेज के तौर पर रहें।
ईरान का जवाब
तेहरान पहले ही कह चुका है कि वह "दबाव और धमकी" की भाषा में बात नहीं करेगा। ईरान का तर्क है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और मिसाइलें उसकी "रक्षात्मक जरूरत" हैं।
ईरान ने साफ-साफ कह दिया है कि अणु संवर्धन और मिसाइल उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर अमेरिका और यूरोप प्रतिबंध हटाते हैं तभी वे जेसीपीओए में वापस आएंगे। लेकिन अब फ्रांस ने शर्तें और कड़ी कर दी हैं।
आगे क्या होगा?
अगले 6 महीने निर्णायक हो सकते हैं:
1. समझौता: ईरान बातचीत के लिए तैयार होता है
2. गतिरोध: संवर्धन बढ़ता है और नए प्रतिबंध लगते हैं
3. ध्रुवीकरण: ईरान रूस-चीन ब्लॉक के साथ और नजदीकी बढ़ाता है
फ्रांस अभी दूसरी स्थिति के लिए तैयारी कर रहा है।
कूटनीति या गतिरोध?
जीन-नोएल बैरो का यह बयान यूरोप की पूरी ईरान नीति का सार है। फ्रांस ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
एक तरफ ईरान संप्रभुता की बात कर रहा है, दूसरी तरफ फ्रांस क्षेत्रीय स्थिरता की। बीच में फंसी है कूटनीति।
फ्रांस ने अपना पत्ता खोल दिया है। अब गेंद ईरान के पाले में है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World | 13 July 2026
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