-Friday World September 26,2026
देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी NIA द्वारा UAPA जैसे गंभीर कानून के तहत जांच के बीच दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने उनके पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद वैनडाइक शुक्रवार शाम को अमेरिका के लिए रवाना हो गया।
कोर्ट ने शर्त रखी है कि इन सभी विदेशी नागरिकों को 24 घंटे के अंदर अपना सटीक विदेशी पता, फोन नंबर, ईमेल आईडी और एक करीबी संपर्क व्यक्ति की जानकारी NIA को देनी होगी। और जब भी जरूरत होगी, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें 30 दिन के अंदर भारत वापस आना होगा। वैनडाइक ने 21 अक्टूबर की वापसी की टिकट बुक की है।
आरोप क्या हैं? - ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग
NIA का आरोप बहुत गंभीर है। एजेंसी का कहना है कि ये 7 लोग दिसंबर 2025 में भारत आए, बिना परमिट के मिजोरम के रास्ते म्यांमार में घुसे और वहां लगभग 3 महीने तक म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही समूहों - चिन नेशनल फ्रंट (CNF) और कचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी। इस मिशन को एक विद्रोही कमांडर के जरिए फंड किया गया था।
इन सभी को 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था। वैनडाइक तिहाड़ जेल में और 6 यूक्रेनी रोहिणी जेल में बंद थे।
तो फिर कोर्ट ने जाने क्यों दिया? - कानूनी पेंच
असल पेंच चार्जशीट में है। NIA ने UAPA के तहत 180 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं की। 8 सितंबर को एजेंसी ने जो पहली चार्जशीट दाखिल की, उसमें UAPA नहीं, बल्कि सिर्फ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लगाई गई थी, जो अवैध प्रवेश और वीजा उल्लंघन से जुड़ी हैं।
कोर्ट ने इस चार्जशीट को "piecemeal" यानी अधूरी बताया। कोर्ट ने कहा कि जब तक UAPA के तहत चार्जशीट नहीं आती, आरोपियों का डिफॉल्ट जमानत का वैधानिक अधिकार बनता है। इसी आधार पर 18 सितंबर को वैनडाइक और 23 सितंबर को 6 यूक्रेनियों को डिफॉल्ट जमानत मिली। इमिग्रेशन केस में 5.5 लाख रुपये जुर्माना भरने के बाद उन्हें उस मामले से डिस्चार्ज कर दिया गया।
सबसे बड़ी बात - सुनवाई के दौरान NIA के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी ने खुद कहा कि एजेंसी को फिलहाल इनकी भारत में फिजिकल मौजूदगी की जरूरत नहीं है। UAPA की जांच अभी समय लेगी।
राजनीति गरमाई - कांग्रेस ने उठाए सवाल
जैसे ही विदेशी नागरिकों के जाने की खबर आई, कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोल दिया। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा, "हमारे Compromised PM ने फिर वही किया। साफ है कि अमेरिकी दबाव में यह फैसला हुआ, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? मोदी देश के चुनाव, संस्थाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं।"
विपक्ष पूछ रहा है कि इन लोगों को भारतीय वीजा कैसे मिला? वे बिना वैध प्रक्रिया के म्यांमार कैसे पहुंचे? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इतने गंभीर मामले में विदेशी दबाव काम कर रहा है? हालांकि सरकार और NIA की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
NIA का कहना है कि UAPA के तहत जांच अभी भी जारी है और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 26,2026
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