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Saturday, 26 September 2026

36 साल का रिकॉर्ड टूटा: मिडटर्म से पहले ट्रंप की लोकप्रियता 32% पर लुढ़की, व्हाइट हाउस में हड़कंप!

36 साल का रिकॉर्ड टूटा: मिडटर्म से पहले ट्रंप की लोकप्रियता 32% पर लुढ़की, व्हाइट हाउस में हड़कंप!
-Friday World September 26,2016 
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरी खबर आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेटेस्ट पोलिंग सर्वे के मुताबिक ट्रंप का अप्रूवल रेटिंग गिरकर सिर्फ 32 प्रतिशत पर आ गया है।

यह आंकड़ा सामान्य नहीं है। 1990 के बाद यानी पिछले 36 सालों में मिडटर्म चुनाव से पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह सबसे कम रेटिंग है। इससे पहले इतनी कम रेटिंग किसी राष्ट्रपति की नहीं देखी गई। जो ट्रंप कुछ दिन पहले तक रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी जीत का दावा कर रहे थे, उनके लिए यह सर्वे किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

आखिर क्यों गिरी रेटिंग? दो बड़े कारण

सर्वे में शामिल लोगों से जब नाराजगी की वजह पूछी गई तो दो बातें सबसे आगे निकलकर आईं।

 1. महंगाई और अर्थव्यवस्था: अमेरिका में पिछले कुछ महीनों में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। मध्यम वर्गीय परिवार खुद को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहा है। ट्रंप प्रशासन इस मोर्चे पर लोगों को राहत देने में नाकाम रहा है।

 2. विदेश नीति और युद्ध का डर: दूसरा बड़ा कारण है मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव। ईरान के साथ अमेरिका का सैन्य टकराव बढ़ रहा है। लोग नहीं चाहते कि अमेरिका एक और बड़े युद्ध में फंसे। इससे देश में असुरक्षा और चिंता का माहौल है।

ईरान वाला बयान बना आग में घी

इसी बीच ईरान को लेकर ट्रंप के सख्त बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए 7 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिया था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और परमाणु बातचीत फिर से शुरू करने की बात थी। लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि ट्रंप ने इशारा किया है कि मिडटर्म चुनाव खत्म होते ही ईरान पर फिर से बमबारी शुरू की जा सकती है। 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा था, "मेरे पास दो विकल्प हैं - एक ईरान के साथ समझौता करना या इस्लामिक रिपब्लिक का तेजी से पूरी तरह सफाया कर देना। मुझे यकीन है कि चुनाव के बाद वे खुद समझौते के लिए तैयार हो जाएंगे।" इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी आलोचना हो रही है।

अब ट्रंप का प्लान क्या है?

रेटिंग गिरने के बाद रिपब्लिकन खेमे में हलचल तेज हो गई है। पॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। वह अपनी पार्टी के पारंपरिक गढ़ों में ताबड़तोड़ रैलियां करने जा रहे हैं।

उनके निशाने पर आयोवा, फ्लोरिडा, टेक्सास, अलास्का और ओक्लाहोमा जैसे राज्य हैं, जहां रिपब्लिकन का जनाधार मजबूत माना जाता है। ट्रंप वहां जाकर अपने उम्मीदवारों के लिए वोट मांगेंगे और अपनी छवि सुधारने की कोशिश करेंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप चुनाव से पहले के इस एक महीने में अपनी गिरी हुई लोकप्रियता को वापस पा सकेंगे? क्या महंगाई और युद्ध के डर के बीच अमेरिकी जनता उन पर फिर से भरोसा करेगी? 3 नवंबर का नतीजा न सिर्फ कांग्रेस का भविष्य तय करेगा, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा भी तय कर देगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 26,2016 

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