- Friday World September 24,2026
नई दिल्ली: कहा जाता है तारीख अपने आप को दोहराती है। 1400 साल पहले कर्बला के बाद जब हज़रत ज़ैनब (स.अ) को यज़ीद के दरबार में ले जाया गया, तो उन्होंने उसी ज़ालिम के महल में खड़े होकर उसे ज़लील किया था, उसका ज़ुल्म दुनिया के सामने उजागर किया था। आज उसी तारीख का एक अक्स फिर दिखा है।
इमाम हुसैन (अ.स) के चाहने वाले और ईरान के राष्ट्रपति जनाब मसूद पेज़ेश्कियान ने इस दौर के सबसे बड़े ज़ुल्म के दावेदार के घर में घुस कर, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के मंच से, उसे आइना दिखा दिया।
ईरान तो 1979 से ही आतंकवाद से जूझ रहा है
ईरान इस्लामी क्रांति 1979 के बाद से ही आतंकवाद का शिकार रहा है, खुद आतंकवाद का समर्थक नहीं:
1. सद्दाम का हमला और पूरा नाटो उसके साथ: क्रांति के फौरन बाद 1980 में सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया। उस 8 साल की जंग में अमेरिका, यूरोप और पूरा नाटो खुलेआम सद्दाम के साथ था। रासायनिक हथियारों तक की मदद दी गई। 10 लाख से ज़्यादा लोग मारे गए।
2. संसद में बम ब्लास्ट: 28 जून 1981 को तेहरान में इस्लामिक रिपब्लिकन पार्टी के हेडक्वार्टर में बम धमाका हुआ जिसमें 70 से ज्यादा बड़े नेता, मंत्री और सांसद शहीद हो गए, जिनमें चीफ जस्टिस आयतुल्लाह बेहिश्ती भी थे।
3. अमेरिका का नाकाम एयर ऑपरेशन: 1980 में अमेरिकी दूतावास के लोगों को छुड़ाने के लिए अमेरिका ने "ऑपरेशन ईगल क्लॉ" किया जो रेगिस्तान में ही तबाह हो गया।
4. ISIS / दाइश जैसे प्रॉक्सी वार: जब सीधी जंग से ईरान को नहीं तोड़ा जा सका तो अमेरिका-इजराइल समर्थित आतंकी संगठनों का इस्तेमाल किया गया। सीरिया और इराक में दाइश ने जो ज़ुल्म किया उसके पीछे किसका हाथ था, आज दुनिया जानती है। ईरान ने ही जनरल कासिम सुलेमानी की कयादत में इस आतंकवाद को खत्म करने की सबसे बड़ी जंग लड़ी।
तो असली आतंकवाद और उसका समर्थक कौन है?
आखिर बात यही निकलती है - आतंकवाद को पैदा करने वाले और उसकी हिमायत करने वाले अमेरिका-इजराइल ही हैं, और इल्जाम दूसरों पर लगाया जाता है।
दुनिया को लोकतंत्र और मानवाधिकार का पाठ पढ़ाने वाला अमेरिका ही है जिसने फिलिस्तीन में 40 हजार से ज़्यादा लोगों के कत्ल पर आंखें बंद कर रखी हैं।
पेज़ेश्कियान ने अमेरिका जाकर सच का आइना दिखाया
23 सितंबर को UN में पेज़ेश्कियान ने मीनाब हमले में मारे गए स्कूली बच्चों की तस्वीरें दिखाकर कहा - "हम पर आतंकवाद का इल्जाम लगाते हो? देखो आतंकवाद क्या होता है।" उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत चाहता है, जंग नहीं, लेकिन ज़ोर-जबरदस्ती की भाषा कभी कबूल नहीं करेगा।
यह वही जज़्बा है जो बीबी ज़ैनब (स.अ) ने दिखाया था - ज़ालिम के सामने झुकना नहीं, बल्कि उसी के घर में हक की आवाज़ बुलंद करना।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 24,2026
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