-Friday World September 25,2026
नई दिल्ली: देखिए, बात अब साफ हो जानी चाहिए, बिना लाग-लपेट के। आज दो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुईं - एक युवाओं की और दूसरी राहुल गांधी की। दोनों का निशाना एक ही था - वोट चोरी और लोकतंत्र की हत्या।
पहला मोर्चा: Gen-Z का वोटर लिस्ट से गायब होना
युवा संगठनों का आरोप है कि पिछले करीब दो साल से मतदाता सूची में 18 साल पूरे कर चुके नए मतदाताओं के नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की अगुवाई वाले चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप इसी वजह से लग रहा है।
इन युवाओं का दावा है कि अगर मतदान का हक नहीं मिला तो Gen-Z फिर सड़क पर उतरेगा और इस्तीफे की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से "आप समर्थक" या "RSS की B-टीम" होने का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। जो लोग उन पर ये आरोप लगा रहे हैं, वही असली B-टीम हैं, ऐसा उनका कहना है।
यह सवाल बड़ा है - अगर युवा वोट ही नहीं दे पाएगा तो लोकतंत्र में उसकी भागीदारी कैसे होगी?
दूसरा मोर्चा: राहुल गांधी का हमला - वोट चोरी मतलब कानून की हत्या
राहुल गांधी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वोट चोरी का मतलब सिर्फ एक वोट की चोरी नहीं, बल्कि कानून की हत्या है। उनका तर्क है कि जब वोट चोरी होगा तो संसद में गलत लोग आएंगे, अपने फायदे के लिए गलत कानून बनाएंगे और संस्थाओं पर कब्जा करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 में विपक्ष के सांसदों को निलंबित करके चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा दी गई, जिसे वे चुनाव आयोग पर राजनीतिक कब्जे के तौर पर देखते हैं।
राहुल गांधी का दावा है कि इसी वजह से बीजेपी को लगता है कि चाहे जो हो, सत्ता उसी की रहेगी, और इसका सबसे बुरा असर यह है कि संसद और विधानसभाओं में दागी चेहरे बढ़ रहे हैं, जिनका काम कॉर्पोरेट से सत्ता की दलाली करना है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने सत्ता के लिए ऐसे अंडे दिए हैं कि पैदा नाग ही होंगे, जो संसद में आकर संस्थाओं को डसेंगे, समाज में जहर उगलेंगे।
खेल खत्म करने की गारंटी?
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने इस खेल को खत्म करने की गारंटी दी है और इस पूरे मामले के सूत्रधार के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है।
उनके समर्थकों का मानना है कि कल अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसे भारत में लोकतंत्र समर्थकों के आंदोलन के रूप में पेश करेगा और G20 जैसे मंचों पर भारत सरकार पर दबाव बढ़ेगा।
उनका कहना है कि अगर सरकार युवाओं पर डंडे बरसाती है तो उस पर लोकतंत्र समर्थकों को कुचलने का आरोप लगेगा।
युवाओं ने मेधा रूपम मामले का हवाला देते हुए कहा कि जैसे 5 लाख बचाने के लिए 30 लाख की कानूनी फीस देनी पड़ी, वैसे ही मौजूदा सरकार एक संकट को बचाने के चक्कर में दूसरे बड़े संकट में उलझ गई है।
अगले 48 घंटे अहम
चाहे आप किसी भी विचारधारा के हों, वोट का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। Gen-Z का वोटर लिस्ट में नाम न जुड़ना और विपक्ष का वोट चोरी का आरोप, दोनों ही गंभीर सवाल हैं। आने वाले 48 घंटे तय करेंगे कि यह मुद्दा सड़क का आंदोलन बनता है या संसद में जवाबदेही की बहस।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 25,2026
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