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Thursday, 10 September 2026

ईरानी शाहेद की नकल पर पाकिस्तान का नया कामिकेज़ ड्रोन: POF में तैयार हो रहा है 3000 KM तक मार करने वाला आत्मघाती हथियार

ईरानी शाहेद की नकल पर पाकिस्तान का नया कामिकेज़ ड्रोन: POF में तैयार हो रहा है 3000 KM तक मार करने वाला आत्मघाती हथियार
-Friday World September 11,2026
पाकिस्तान की सेना अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर सस्ते, घातक और लंबी दूरी तक मार करने वाले आत्मघाती ड्रोन की रेस में शामिल हो गई है। 29 अगस्त को पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री (POF) वाह कैंट में हुए एक हाई-प्रोफाइल दौरे ने इस गुप्त प्रोजेक्ट से पर्दा उठा दिया। इस दौरे में पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) जनरल असीम मुनीर मौजूद थे, जिन्हें ईरान के कुख्यात शाहेद-135 और शाहेद-136 ड्रोन की डिजाइन पर आधारित नए लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम के बारे में ब्रीफिंग दी गई।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पाकिस्तान में विकसित हो रहा इस तरह का कम से कम दूसरा सिस्टम है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस्लामाबाद अपनी स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक क्षमता को पूरी तरह से बदलने की तैयारी में है।

क्या है नया हथियार?

जानकारी के मुताबिक, POF में प्रदर्शित किया गया ड्रोन एक वन-वे-अटैक (OWA) लोइटरिंग म्यूनिशन है। यानी यह एक बार उड़ान भरने के बाद वापस नहीं आता, बल्कि अपने लक्ष्य पर जाकर विस्फोटक के साथ फट जाता है। इसी कारण इसे आत्मघाती या कामिकेज ड्रोन भी कहा जाता है।

इसका डिजाइन ईरानी शाहेद-136 से हूबहू मिलता-जुलता है - डेल्टा-विंग बॉडी, पीछे लगा पिस्टन इंजन और तेज आवाज करने वाला प्रोपेलर। शाहेद-136 को दुनिया ने पहली बार 2021 में देखा था, लेकिन असली खौफ तब पैदा हुआ जब रूस ने इसे यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना शुरू किया। रूस इसे गेरान-2 (Geran-2) नाम से इस्तेमाल करता है। अमेरिकी मैगजीन न्यूजवीक की एक रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया गया था कि यमन के हूती विद्रोही 2020 से ही इसके पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रहे थे।

रेंज और ताकत - असली खेल यहीं है

हालांकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इस नए ड्रोन की रेंज का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सैन्य सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान आर्मी की मांग बहुत बड़ी है। सेना को 2000 से 3000 किलोमीटर तक मार करने वाले हथियारों की जरूरत है। ईरानी शाहेद-136 की रेंज ही 1000 से 2500 किलोमीटर तक मानी जाती है, इसलिए पाकिस्तान का नया वर्जन भी इसी क्लास का होगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा है - कम लागत। एक बैलिस्टिक मिसाइल या लड़ाकू जेट के मुकाबले इस तरह के पिस्टन-पावर्ड ड्रोन को बनाना 50 से 100 गुना सस्ता है। इन्हें बड़ी संख्या में बनाकर एक साथ दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया जा सकता है। इसे ही मिलिट्री भाषा में 'स्वार्म अटैक' कहा जाता है।

भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

पाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए दो मोर्चों पर चुनौती पैदा करता है। पहला, 2000-3000 किमी की रेंज का मतलब है कि यह ड्रोन पाकिस्तान के अंदर से ही भारत के लगभग किसी भी बड़े शहर, मिलिट्री बेस या रणनीतिक ठिकाने को निशाना बना सकता है। दूसरा, यह ड्रोन रडार पर बहुत छोटा दिखाई देता है और कम ऊंचाई पर उड़ता है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यूक्रेन युद्ध ने साबित कर दिया है कि महंगे एयर डिफेंस सिस्टम भी इन सस्ते ड्रोन के झुंड के सामने कई बार फेल हो जाते हैं।

POF में क्या हो रहा है?

पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री अब सिर्फ गोलियां और तोप के गोले बनाने वाली फैक्ट्री नहीं रही। पिछले दो सालों में इसे ड्रोन और स्मार्ट म्यूनिशन के विकास केंद्र के रूप में बदला जा रहा है। जनरल मुनीर का यह दौरा इसी बदलाव का हिस्सा था। उन्हें ब्रीफिंग के दौरान बताया गया कि कैसे यह नया सिस्टम GNSS/INS गाइडेंस से लैस होगा, यानी जीपीएस जैम होने पर भी यह अपने रास्ते से नहीं भटकेगा।

यह पाकिस्तान का दूसरा लॉइटरिंग म्यूनिशन प्रोजेक्ट है। इससे पहले पाकिस्तान के प्राइवेट डिफेंस सेक्टर ने भी एक छोटे रेंज का कामिकेज ड्रोन विकसित किया था, लेकिन POF वाला प्रोजेक्ट कहीं बड़ा और लंबी दूरी वाला है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान ईरान-रूस मॉडल को कॉपी करके एक ऐसी ताकत बनना चाहता है जो कम पैसे में ज्यादा दूर तक चोट पहुंचा सके। यह युद्ध का भविष्य है - सस्ता, साइलेंट और सुसाइडल।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 11,2026

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