-Friday World September 22,2026
वाशिंगटन: अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस फ्रीडम को लेकर अब तक का सबसे बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तीखे सवाल पूछने पर व्हाइट हाउस ने देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क CNN को प्रतिबंधित कर दिया है। लेकिन इस बार ट्रंप का दांव उल्टा पड़ गया। CNN के समर्थन में अमेरिका के चार सबसे बड़े चैनल - Fox News, ABC, NBC और CBS ने भी व्हाइट हाउस की कवरेज का बॉयकॉट कर दिया है, जिससे व्हाइट हाउस का TV पूल पूरी तरह ब्लैकआउट हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार 19 सितंबर को एक आदेश जारी कर तीन मीडिया संस्थानों - CNN, Politico और MS NOW के पत्रकारों के व्हाइट हाउस क्रेडेंशियल रद्द कर दिए। ट्रंप का आरोप है कि ये संस्थान "फेक न्यूज" फैलाते हैं।
दरअसल, सोमवार 22 सितंबर को CNN की बारी थी व्हाइट हाउस TV पूल के तौर पर राष्ट्रपति को कवर करने की। पूल सिस्टम में एक चैनल राष्ट्रपति को फॉलो करता है और उसका लाइव फुटेज सभी चैनलों को दिया जाता है। ट्रंप प्रशासन ने CNN को इस रोटा से हटा दिया।
Fox News भी ट्रंप के खिलाफ - अभूतपूर्व एकजुटता
यहां से कहानी ने नया मोड़ लिया। आमतौर पर ट्रंप के समर्थक माने जाने वाले Fox News सहित सभी पूल मेंबर्स - ABC, CBS, NBC और Fox News ने CNN की जगह लेने से साफ इनकार कर दिया।
पांचों नेटवर्क ने एक ऐतिहासिक संयुक्त बयान जारी किया:
> "जनता का अपनी सरकार के बारे में सटीक और स्वतंत्र जानकारी प्राप्त करना बेहद जरूरी है। किसी भी प्रशासन को इसलिए किसी समाचार संगठन को प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए क्योंकि उसे उसकी रिपोर्टिंग पसंद नहीं है।"
TV पूल के चेयरमैन और Fox News के ब्यूरो चीफ ब्रायन बॉटन ने साफ ईमेल में लिखा - "अब कोई रिप्लेसमेंट पूल नहीं होगा।" इसका मतलब है कि राष्ट्रपति के कार्यक्रमों - नए हेलीपैड के उद्घाटन से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरे तक की कोई लाइव तस्वीर अमेरिकी जनता को नहीं मिल रही है।
कोर्ट पहुंचा मामला, First Amendment का हवाला
बैन के खिलाफ CNN, Politico और MS NOW ने सोमवार को ही वाशिंगटन की फेडरल कोर्ट में व्हाइट हाउस के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। याचिका में कहा गया है कि बिना नोटिस के क्रेडेंशियल रद्द करना अमेरिकी संविधान के First Amendment पर सीधा हमला है, जो प्रेस की आजादी की गारंटी देता है।
यह पहली बार नहीं है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी 2018 में CNN के पत्रकार जिम अकोस्टा को बैन किया गया था, जिसे बाद में अदालत ने बहाल कर दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका में मीडिया और सरकार के बीच दशकों का सबसे बड़ा टकराव है। जब ट्रंप के सबसे करीबी माने जाने वाले Fox News ने भी बगावत कर दी है, तो यह व्हाइट हाउस के लिए एक बड़ी राजनीतिक और नैतिक हार मानी जा रही है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 22,2026
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