-Friday World September 22,2026
अमरीका आज एक अजीब और दर्दनाक दौर से गुजर रहा है। वह देश जो कभी अवसरों की भूमि कहलाता था, आज अपने ही नागरिकों के लिए महंगा और बेगाना होता जा रहा है। सुपरमार्केट की कतार में खड़ा आम अमरीकी जब अपने बिल को देखता है तो उसका दिल बैठ जाता है। दूध, अंडे, ब्रेड, पेट्रोल, किराया, दवाइयां, हर चीज की कीमत आसमान छू रही है। लोगों की सैलरी वहीं है, पर खर्चे दोगुने हो गए हैं। मिडिल क्लास परिवार जो कभी साल में एक बार घूमने जाता था, आज महीने के आखिर में क्रेडिट कार्ड के बिल से डर रहा है।
इस भयावह महंगाई के बीच जब देश को एक गंभीर, जमीन से जुड़े नेता की जरूरत है, तो खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। कहा जा रहा है कि व्हाइट हाउस के अंदर का माहौल किसी गंभीर प्रशासन जैसा कम और हॉलीवुड के सेट जैसा ज्यादा लगता है। ट्रम्प अपने कमरे में अकेले सुपरमैन जैसी फिल्में देखते हुए, खुद को भी उसी सुपरहीरो के रूप में देखने लगे हैं जो एक इशारे से दुनिया बदल देगा।
समस्या यह है कि असली दुनिया कोई कॉमिक बुक नहीं है। अमरीका की जनता को सुपरमैन नहीं, सस्ता इलाज, सस्ता राशन और सुरक्षित नौकरी चाहिए। लेकिन जब फैसले फिल्मी अंदाज में लिए जाएंगे, तो उनका अंजाम भी फिल्मी ही होगा, अवास्तविक और खतरनाक।
कीमतें क्यों बेकाबू हैं?
पिछले दो सालों में अमरीका में रोजमर्रा की जिंदगी की लागत ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। किराने का सामान 25 से 30 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। एक साधारण परिवार का मासिक खर्च जो 2021 में 3000 डॉलर था, आज 4500 डॉलर से ऊपर चला गया है। किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, टेक्सास जैसे राज्यों में एक बेडरूम अपार्टमेंट का किराया 2000 डॉलर पार कर गया है। छात्र लोन, मेडिकल बिल और क्रेडिट कार्ड का कर्ज लोगों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है। लोग दो-दो नौकरियां करने पर मजबूर हैं।
छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान हैं। उन्हें कच्चा माल महंगा मिल रहा है, ट्रांसपोर्ट महंगा है, और ग्राहक के पास पैसे नहीं हैं। कई स्टोर बंद हो रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसानों को खाद और डीजल की कीमतों ने रुला दिया है।
हॉलीवुड स्टाइल में युद्ध के आदेश
एक तरफ जनता महंगाई से लड़ रही है, दूसरी तरफ नेतृत्व युद्ध की भाषा बोल रहा है। कहा जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन हर अंतरराष्ट्रीय संकट को एक एक्शन फिल्म के सीन की तरह देख रहा है। धमकी भरे बयान, कैमरे के सामने जोशीले आदेश, सोशल मीडिया पर युद्ध का ऐलान। जैसे कोई डायरेक्टर कह रहा हो - लाइट्स, कैमरा, एक्शन।
लेकिन युद्ध कोई फिल्म नहीं है। युद्ध का मतलब है अरबों डॉलर का खर्च, जो अंत में अमरीकी टैक्सपेयर की जेब से ही निकलेगा। युद्ध का मतलब है तेल की कीमतें और बढ़ना, सप्लाई चेन टूटना, और महंगाई का और भड़कना। जब अमरीका मध्य पूर्व या किसी और क्षेत्र में नया मोर्चा खोलने की बात करता है, तो वॉल स्ट्रीट कांपता है और मेन स्ट्रीट का बजट बिगड़ता है।
यह हॉलीवुड अप्रोच अमरीका को दुनिया में अकेला कर रही है। सहयोगी देश भी अब अमरीका के फैसलों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्हें लगता है कि यह नीति नहीं, पब्लिसिटी स्टंट है।
सुपरमैन सिंड्रोम का खतरा
सुपरमैन फिल्म देखना बुरी बात नहीं है, लेकिन खुद को ही सुपरमैन समझ लेना खतरनाक है। सुपरमैन को कभी चुनाव नहीं लड़ना पड़ता, उसे कभी महंगाई के आंकड़े नहीं देखने पड़ते, उसे कभी कांग्रेस को मनाना नहीं पड़ता। वह उड़कर समस्या सुलझा देता है। असली राष्ट्रपति को फाइलें पढ़नी पड़ती हैं, विशेषज्ञों से बात करनी पड़ती है, धैर्य रखना पड़ता है।
जब एक नेता खुद को अजेय समझने लगता है तो वह सुनना बंद कर देता है। वह अर्थशास्त्रियों की चेतावनी को नजरअंदाज करता है, वह आम लोगों की चीख को बैकग्राउंड म्यूजिक समझता है। यही आज हो रहा है। जनता कह रही है हमें सस्ता घर चाहिए, जवाब मिल रहा है हम दुनिया में सबसे ताकतवर हैं। जनता कह रही है हमारे बच्चों की स्कूल फीस कम करो, जवाब मिल रहा है हम दुश्मनों को मिटा देंगे।
यह डिस्कनेक्शन ही सबसे बड़ा संकट है। महल और झोपड़ी के बीच की दूरी बढ़ गई है। एक तरफ एयर कंडीशन कमरे में बड़ी स्क्रीन पर सुपरमैन उड़ रहा है, दूसरी तरफ बाहर धूप में खड़ा डिलीवरी बॉय पेट्रोल के पैसे गिन रहा है।
अमरीकी अवाम का बुरा हाल
इस पूरी नीति का खामियाजा कौन भुगत रहा है? वही आम अमरीकी। सिंगल मदर जो अपने बच्चे के लिए दवा नहीं खरीद पा रही। बुजुर्ग जो रिटायरमेंट के बाद भी काम करने पर मजबूर हैं। युवा जो कॉलेज की फीस के लिए कर्ज में डूबा है। वेटरन जो देश के लिए लड़े और आज हेल्थकेयर के लिए लाइन में हैं।
जब सरकार का ध्यान युद्ध और शो बाजी पर होगा तो स्कूल, अस्पताल, सड़कें, पुल पीछे छूट जाएंगे। अमरीका के कई शहरों में आज भी बुनियादी ढांचा टूटा हुआ है। महंगाई के कारण लोग सेविंग नहीं कर पा रहे, उनका भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है। यह वह अमरीका नहीं है जिसका सपना दुनिया देखती थी।
अमरीका को आज एक ऐसे नेता की जरूरत है जो सुपरमैन की तरह उड़ने का सपना न दिखाए, बल्कि जमीन पर उतरकर लोगों के साथ खड़ा हो। जो कैमरे के लिए नहीं, जनता के लिए काम करे। जो युद्ध के आदेश हॉलीवुड स्टाइल में नहीं, बल्कि शांति की नीति ठंडे दिमाग से बनाए। क्योंकि जब तक शासक अपने कमरे में फिल्मों में खोया रहेगा, तब तक बाहर असली जिंदगी और भी मुश्किल होती जाएगी। अमरीका को ड्रामा नहीं, राहत चाहिए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 22,2026
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