- Friday World Oct 2,2026
फ्रांस की शान और दुनिया के सबसे मशहूर स्मारक एफिल टावर का प्रबंधन करने वाली कंपनी SETE के मुखिया को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। कंपनी के डायरेक्टर जनरल पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। यह फैसला उस बड़े विवाद के बाद आया है जिसने फ्रांस में धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक समानता पर बड़ी बहस छेड़ दी थी।
क्या हुआ था 5 सितंबर को?
गत 5 सितंबर 2026 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्वामिनारायण संप्रदाय की संस्था BAPS - बोचासणवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्था के लगभग 100 लोगों का प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर घूमने पहुंचा था। यह ग्रुप पेरिस में बन रहे पारंपरिक हिंदू पत्थर मंदिर के उद्घाटन समारोह के सिलसिले में वहां था।
कर्मचारी यूनियन की प्रतिनिधि डायेन डेवोइने ने बताया कि इस दौरे के दौरान प्रबंधन ने महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटने को कहा और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगा दिया। कुछ महिलाओं को दूसरे एरिया में भेज दिया गया और सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक प्रतिनिधिमंडल वहां है, वे कुछ खास रास्तों से न गुजरें।
इस घटना से कर्मचारियों में भारी गुस्सा फैल गया। डेवोइने ने रॉयटर्स को बताया, "इससे कर्मचारियों, खासकर महिलाओं को बहुत दुख पहुंचा, वे अपमानित महसूस कर रही थीं।" इसके विरोध में 7 सितंबर को कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी, जिसके कारण 7 मिलियन सालाना विजिटर्स वाला एफिल टावर एक दिन के लिए बंद करना पड़ा।
कंपनी ने क्या माना?
विवाद बढ़ने पर SETE ने खुद माना कि BAPS प्रतिनिधिमंडल ने दौरे के लिए "महिलाओं से बातचीत सीमित रखने" की शर्त रखी थी और कंपनी ने माना कि "ये शर्तें कभी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं"।
आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने 30 सितंबर को जारी बयान में कहा कि पैट्रिक ब्रांको रुइवो 2018 से डायरेक्टर जनरल हैं और साल के अंत में पद छोड़ देंगे। जांच में "संचालन की खामियां और कमियां" मिलीं जिनके कारण महिलाओं को हटाने जैसी "अस्वीकार्य स्थिति" पैदा हुई।
SETE के बोर्ड चेयरमैन एरियल वेल ने कहा कि अब एक नया "प्रोटोकॉल विभाग" बनाया जाएगा और लैंगिक समानता के लिए नए प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।
फ्रांस की राजनीति में भूचाल
इस मामले ने पूरे फ्रांस को हिला दिया। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने इसे "बेतुका, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य फैसला" बताया और दो अलग-अलग जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा, "स्त्री और पुरुष के बीच समानता कभी भी हमारे ऐतिहासिक स्मारकों के सामने नहीं रुकनी चाहिए।"
फ्रांस की धुर-दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने कहा, "फ्रांस में हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि महिलाओं की मौजूदगी को 'सीमित' कर दिया जाए।" पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रियल अत्ताल ने कहा, "कोई भी संस्कृति, कोई भी आस्था यह तय नहीं कर सकती कि फ्रांस में महिलाओं की जगह क्या है।"
नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवेट ने भी कहा कि वह विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करने के लिए महिलाओं को पीछे हटने के लिए मजबूर करना स्वीकार नहीं करेंगी।
BAPS का क्या कहना है?
विवाद के बाद BAPS ने बयान जारी कर कहा था, "यह समन्वय पूरी तरह से परिचालन सुविधा के लिए किया गया था ताकि बड़े समूह की यात्रा सुचारू रूप से हो सके। यह कभी भी लिंग पर आधारित अनुरोध नहीं था।" पेरिस स्थित BAPS मंदिर ने भी कहा कि उन्होंने इस चिंता को गंभीरता से लिया है और "किसी भी पीड़ा के लिए माफी" मांगी है।
फिलहाल, इस एक दौरे की कीमत एफिल टावर के सबसे बड़े अधिकारी को अपनी कुर्सी गंवाकर चुकानी पड़ रही है। यह मामला पूरी दुनिया के लिए एक सबक है कि धार्मिक मान्यताओं और कार्यस्थल पर समानता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 2,2026
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