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Thursday, 1 October 2026

देश खुशियो से भर गया!! भारत पर कर्ज़ का पहाड़ - विदेशी कर्ज पहली बार फॉरेक्स रिज़र्व से ज्यादा, 778 अरब डॉलर पर पहुंचा बाहरी कर्ज

देश खुशियो से भर गया!! भारत पर कर्ज़ का पहाड़ - विदेशी कर्ज पहली बार फॉरेक्स रिज़र्व से ज्यादा, 778 अरब डॉलर पर पहुंचा बाहरी कर्ज
- Friday World Oct 2,2026 
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश का विदेशी कर्ज अब हमारे विदेशी मुद्रा भंडार से भी ज्यादा हो गया है।

मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में भारत का विदेशी कर्ज 15.4 बिलियन डॉलर बढ़कर 778.2 बिलियन डॉलर हो गया है। वहीं 18 सितंबर 2026 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 765.901 बिलियन डॉलर था। मतलब हम जितना कमाकर रिजर्व में रखे हैं, उससे ज्यादा हम पर बाहर का उधार है।


हालांकि पूरी तस्वीर बुरी नहीं है। RBI ने बताया कि जून 2026 के अंत में GDP के प्रतिशत के रूप में विदेशी कर्ज घटकर 20.8% रह गया, जो मार्च 2026 में 20.9% था। इसका मतलब है कि हमारी अर्थव्यवस्था कर्ज लेने की रफ्तार से ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।

डॉलर के येन और यूरो जैसी बड़ी करेंसी के मुकाबले मजबूत होने से वैल्यूएशन में 900 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ है। अगर इस असर को हटा दें तो असल में कर्ज 16.4 बिलियन डॉलर बढ़ा है।

कर्ज का हिसाब-किताब

- लॉन्ग टर्म कर्ज: 1 साल से ज्यादा समय वाला कर्ज 624.7 बिलियन डॉलर हो गया, जो मार्च से 11.2 बिलियन ज्यादा है।
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- शॉर्ट टर्म कर्ज: कुल कर्ज में 1 साल तक की अवधि वाले कर्ज का हिस्सा 19.6% से बढ़कर 19.7% हो गया।
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- रिजर्व पर दबाव: विदेशी मुद्रा भंडार में शॉर्ट टर्म कर्ज का अनुपात 21.6% से बढ़कर 23% हो गया। अगले 12 महीने में चुकाए जाने वाले कर्ज की कुल राशि विदेशी भंडार का 50.5% है, जो मार्च में 47.3% थी।

किस करेंसी में है सबसे ज्यादा कर्ज?

RBI के मुताबिक, 54.8% कर्ज अमेरिकी डॉलर में है। इसके बाद भारतीय रुपये में 29.8%, जापानी येन में 6.9%, SDR में 4.1% और यूरो में 3.5% कर्ज है।

कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा *लोन (34.3%)* है, फिर करेंसी और डिपॉजिट, ट्रेड क्रेडिट और डेट सिक्योरिटीज। सरकारी और गैर-सरकारी दोनों सेक्टर का कर्ज बढ़ा है। गैर-वित्तीय कंपनियों पर सबसे ज्यादा 36.1% कर्ज है।

तो क्या घबराने की बात है?

एक्सपर्ट मानते हैं कि स्थिति अभी कंट्रोल में है। भारत का डेट-टू-GDP अनुपात 21% से कम है, जो कई विकासशील देशों से बहुत कम है। कर्ज की सर्विसिंग (ब्याज + मूलधन) अभी भी हमारी कुल कमाई का सिर्फ 5.6% है, जो मार्च तिमाही जितनी ही है।

लेकिन शॉर्ट टर्म कर्ज का बढ़ना और रिजर्व का घटना एक चेतावनी है। अगर दुनिया में डॉलर और महंगा होता है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कर्ज चुकाना महंगा हो सकता है।

सरकार को अब निर्यात बढ़ाने, FPI पर निर्भरता कम करने और रुपये में कर्ज को बढ़ावा देने पर ध्यान देना होगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 2,2026 

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