विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, “अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देश ईरान पर हमला करते हैं, तो रूस की सैन्य सहायता मॉस्को-तेहरान के बीच हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते के तहत होगी।”
ज़ाखारोवा ने जोर देकर कहा कि यह नया समझौता दोनों देशों के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार करता है। यानी अब सहायता कोई भावनात्मक फैसला नहीं, बल्कि कानूनी और रणनीतिक बाध्यता होगी।
रूसी प्रवक्ता ने पश्चिमी देशों को चेताया कि ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य दबाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक साबित होगा। उनका साफ संदेश था – “ईरान अकेला नहीं है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। रूस का यह कदम साफ बताता है कि वह ईरान के साथ खड़ा है – और जरूरत पड़ी तो सिर्फ शब्दों से नहीं, हथियारों से भी साथ देगा।
✒️सज्जाद अली नायाणी