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Saturday, 29 November 2025

पतंजलि के विवादों का काला अध्याय: झूठे दावों से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा!!

पतंजलि के विवादों का काला अध्याय: झूठे दावों से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा!!
बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद, जो आयुर्वेदिक उत्पादों के नाम पर 'स्वदेशी क्रांति' का दावा करती है, लंबे समय से विवादों के घेरे में रही है। गुणवत्ता, भ्रामक विज्ञापनों और झूठे स्वास्थ्य दावों को लेकर कंपनी पर दर्जनों केस दर्ज हैं। हाल ही में पिथौरागढ़ कोर्ट ने घटिया घी बेचने पर ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया, लेकिन यह सिर्फ टिप आइसबर्ग है। आइए, पतंजलि के प्रमुख विवादों पर नजर डालें: 

 1. कोरोनिल कांड: कोविड का 'चमत्कारी इलाज' 2021 में पतंजलि ने कोरोनिल किट को कोविड-19 का '100% इलाज' बताकर लॉन्च किया। बाबा रामदेव ने दावा किया कि यह 7 दिनों में वायरस मिटा देगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट' का उल्लंघन माना। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने मुकदमा दायर किया, जिसमें एलोपैथी को 'विषैली' बताने पर आपत्ति जताई गई। कोर्ट ने विज्ञापनों पर रोक लगाई, लेकिन कंपनी ने जारी रखा। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को कंटेम्प्ट नोटिस जारी किया, जिसमें माफी मांगने पर भी जुर्माना लगाया गया। 

 2. भ्रामक विज्ञापन: कैंसर से एड्स तक के 'इलाज' पतंजलि ने डायबिटीज, मोटापा, लिवर फेलियर, कैंसर, HIV और यहां तक कि 'समलैंगिकता' को ठीक करने के दावे किए। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में IMA की याचिका पर कंपनी को चेतावनी दी कि आयुर्वेदिक उत्पादों को 'क्रॉनिक बीमारियों का इलाज' न बताए। 2024 में कोर्ट ने फिर फटकार लगाई, कहते हुए कि यह 'सार्वजनिक स्वास्थ्य से खिलवाड़' है। उत्‍तराखंड सरकार ने 14 उत्पादों का लाइसेंस सस्पेंड किया। 

3. गुणवत्ता की पोल खुली: घी से जूस तक फेल - घी में फंगस (2015): पतंजलि के गाय के घी में फंगस पाई गई, जिसे कंपनी ने खारिज किया। - 

आमला जूस (2017): 82 सैंपल्स में से 32 फेल, जिसमें डिव्या आमला जूस और शिवलिंगी बीज शामिल। CSD ने बिक्री रोकी। - 

नूडल्स विवाद (2015): FSSAI ने बिना अप्रूवल के 'आटा नूडल्स' लॉन्च करने पर कार्रवाई की। - 

पुत्रजीवक बीज (2015): बांझपन के इलाज का दावा, लेकिन नाम से 'पुत्र प्राप्ति' का भ्रम। डॉक्टरों ने असर पर सवाल उठाए, संसद में चर्चा हुई। ####

 4. मिसब्रांडिंग: शाकाहारी उत्पाद में मांस 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने डिव्या मंजन (दांत पाउडर) पर नोटिस जारी किया। पैकेजिंग पर हरा डॉट (शाकाहारी) था, लेकिन सामग्री में समुद्रफेन (कटलफिश बोन से) मिला। ब्राह्मण उपभोक्ता ने मुकदमा दायर किया। 

5. अन्य विवाद: जमीन घोटाले और श्रम शोषण उत्तराखंड सरकार ने रामदेव के खिलाफ 100 केस दर्ज किए, जिनमें 81 ZALR एक्ट और स्टांप एक्ट उल्लंघन के। फैक्ट्री में मजदूरों को ₹6,000 मासिक, 12 घंटे शिफ्ट पर काम, वेतन वृद्धि पर 'सेवा' का बहाना। 2025 में शरबत जीहाद विवाद: रामदेव ने प्रतिद्वंद्वी ब्रांड पर 'मस्जिद-मदरसे' फंडिंग का आरोप लगाया। 

ये विवाद पतंजलि की ₹10,000 करोड़+ टर्नओवर वाली इंपायर को झकझोर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य दावों पर सख्ती बरती जाए। कंपनी अक्सर नियमों को 'साजिश' बताकर बचाव करती है, लेकिन उपभोक्ताओं का भरोसा डगमगा रहा है। क्या यह आयुर्वेद की छवि खराब कर रहा है?