ब्रिटेन में अवैध प्रवासन और कामगारों पर सरकार की सख्त कार्रवाई जारी है। हाल ही में सरे में स्थित केम्पटन पार्क मार्केट (जो क्रिसमस मार्केट के रूप में जाना जाता है) में बड़ी रेड के दौरान भारतीयों सहित कुल 11 व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई। यह कार्रवाई होम ऑफिस की इमिग्रेशन एन्फोर्समेंट टीम, सरे पुलिस और साउथ ईस्ट रीजनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम यूनिट के संयुक्त प्रयास से की गई।
यह घटना पिछले 11 दिसंबर को हुई, जब मार्केट से 9 पुरुषों की गिरफ्तारी की गई। इनमें भारतीय, इराकी और चीनी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, पास के आवासीय इलाके से दो और भारतीय नागरिकों को पकड़ा गया।
होम ऑफिस के अनुसार, ये सभी व्यक्ति अवैध रूप से काम करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार 11 में से 5 व्यक्तियों को देश से निर्वासन (डेपोर्टेशन) की प्रक्रिया के लिए हिरासत में रखा गया है, जबकि बाकी 6 को इमिग्रेशन बेल पर रिहा किया गया है। इन लोगों को होम ऑफिस के सामने नियमित रूप से उपस्थित होना होगा।
गिरफ्तार व्यक्तियों के नाम या अन्य व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
होम ऑफिस के इमिग्रेशन एन्फोर्समेंट इंस्पेक्टर सैम मल्होत्रा ने इस मामले में कहा कि, "इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई छिपने की जगह नहीं है। हम दिन-रात काम कर रहे हैं और जो भी अवैध रूप से काम करते पाए जाएंगे, उन्हें गिरफ्तार कर देश से निकाल दिया जाएगा।" उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां पूरे ब्रिटेन में रिकॉर्ड स्तर पर चल रही हैं।
यह घटना ब्रिटेन सरकार की व्यापक इमिग्रेशन क्रैकडाउन का हिस्सा है। अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक 11,000 से अधिक रेड में 8,000 से ज्यादा अवैध व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई है। सरकार का कहना है कि अवैध कामगार स्थानीय मजदूरों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं और इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन करते हैं।
इस कार्रवाई से भारतीय समुदाय में भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि हाल के समय में कई भारतीय ऐसी रेड में पकड़े गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में वैध रूप से रहना और काम करना अब और अधिक कठिन हो गया है।
सज्जाद अली नायाणी✍