10 दिसंबर 2025, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में लगभग ढाई घंटे का भाषण दिया। भाषण खत्म हुआ तो सोशल मीडिया पर एक आँकड़ा वायरल हो गया: -
वंदे मातरम् — 121 बार -
भारत — 35 बार -
अंग्रेज — 34 बार -
बंगाल — 17 बार -
कांग्रेस — 99 बार -
नेहरू — 31 बार -
मुस्लिम लीग — 5 बार -
जिन्ना — 3-बार
लेकिन इन ढाई घंटों में एक भी बार नहीं लिया गया इन शब्दों का नाम:
✘ प्रदूषण
✘ दिल्ली बम धमाके (2008 केस की ताज़ा सुनवाई)
✘ इंडिगो की उड़ानों का बुरा हाल
✘ जंगलों की अंधाधुंध कटाई और आदिवासी विद्रोह
✘ लगातार गिरता रुपया (82.80 के पार)
बंगाल-बंगाल चिल्लाते रहे, बिहार भूल गए!
भाषण के दौरान बंगाल का ज़िक्र 17 बार हुआ, ममता बनर्जी पर तीखे हमले हुए, “घुसपैठिए” शब्द कई बार गूँजा। लेकिन बिहार? जिस राज्य में अभी चुनाव होने वाले हैं, उसका ज़ीक़र न के बराबर। लगता है बिहार अब “पुराना दोस्त” हो गया, नया प्यार बंगाल बन गया है।
पूंजीपति का दोस्त, जनता की चिंता का दुश्मन?
जिस समय दिल्ली में लोग ज़हरीली हवा में साँस लेने को मजबूर हैं, आदिवासी अपने जंगल बचाने के लिए सड़कों पर हैं, रुपया हर दिन नई तली छू रहा है — उस समय संसद में सिर्फ़ नेहरू, कांग्रेस और 1940 के किस्से।
लोग पूछ रहे हैं — ये प्रधानमंत्री हैं या चुनावी रैली का स्थायी स्पीकर?
और हाँ, घुसपैठिए भी परेशान हैं…
कहा जा रहा है कि बंगाल में घुसपैठिए पहुँचना चाहते हैं, पर इंडिगो की फ्लाइट्स की हालत देखकर वे भी सोच रहे हैं — “अब तो ट्रेन ही ठीक है भाई!”
लोग मजाक नहीं कर रहे, दर्द बयाँ कर रहे हैं। जब तक “वंदे मातरम्” के नारे असली मुद्दों को दबाने का हथियार बनते रहेंगे, तब तक जनता यही पूछती रहेगी
— असली भारत कब बोलेगा प्रधानमंत्री जी?
सज्जाद अली नायाणी✍️