पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने वोटर लिस्ट में चौंकाने वाली अनियमितताएं उजागर की हैं। 2002 की पुरानी लिस्ट से तुलना करने पर
85 लाख से ज्यादा वोटर्स के पिता के नाम में गड़बड़ी मिली है। सबसे हैरान करने वाला फैक्ट:
लगभग 13.5 लाख मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम मां और पिता दोनों के कॉलम में दर्ज है – जैसे किसी परिवार में पिता का नाम गलती से मां के जगह डाल दिया गया हो! चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, ये त्रुटियां सामान्य नहीं लगतीं। अन्य प्रमुख अनियमितताएं: -
11.95 लाख मामलों में पिता की उम्र बच्चे से 15 साल या उससे कम ज्यादा
3.29 लाख मामलों में दादा की उम्र पोते से 40 साल से कम ज्यादा
- 24.21 लाख से ज्यादा केस जहां एक व्यक्ति के 6 या उससे अधिक बच्चे दिखाए गए
। ये "रहस्यमयी डेटा" SIR के पहले फेज में प्रोगेनी मैपिंग (परिवारिक संबंध जांच) से सामने आए। आयोग अब 1 करोड़ से ज्यादा एंट्रीज की दोबारा जांच करेगा। राज्य में कुल 7.66 करोड़ वोटर्स हैं, जिनमें से 58 लाख से ज्यादा नाम (मृत, शिफ्टेड, डुप्लीकेट) हटाए जा सकते हैं। ड्राफ्ट लिस्ट 16 दिसंबर को आएगी, उसके बाद सुनवाई होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में गड़बड़ियां वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले ये सफाई जरूरी है, लेकिन राजनीतिक विवाद भी बढ़ा रही है। आयोग सख्त कार्रवाई का आश्वासन दे रहा है।
सज्जाद अली नायाणी ✍