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Friday, 19 December 2025

भारत का मूक पलायन: हर साल 2 लाख से ज्यादा भारतीय क्यों छोड़ रहे हैं अपनी नागरिकता?

भारत का मूक पलायन: हर साल 2 लाख से ज्यादा भारतीय क्यों छोड़ रहे हैं अपनी नागरिकता?
भारत से एक चुप्पी भरा पलायन चल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2024 तक कुल 20.6 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी है। इसमें से आधी से ज्यादा – यानी करीब 9-10 लाख – ने पिछले पांच सालों (2020-2024) में ही यह कदम उठाया। 2022 में रिकॉर्ड 2.25 लाख, 2023 में 2.16 लाख और 2024 में 2.06 लाख भारतीयों ने भारतीय पासपोर्ट सरेंडर किया। औसतन हर साल 2 लाख लोग देश छोड़कर विदेशी नागरिकता अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। 

यह आंकड़े विदेश मंत्रालय ने संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए। कोविड के दौरान 2020 में संख्या घटकर 85 हजार रह गई थी, लेकिन सीमाएं खुलते ही 2021 में 1.63 लाख और उसके बाद लगातार 2 लाख से ऊपर। विशेषज्ञ इसे महामारी के बैकलॉग का हिस्सा मानते हैं, लेकिन 2023-2024 में भी ऊंची संख्या बताती है कि यह नया ट्रेंड बन चुका है। 

क्यों छोड़ रहे हैं लोग भारतीय नागरिकता? सरकार का कहना है कि कारण "व्यक्तिगत" हैं – जैसे नौकरी, शिक्षा या परिवार। लेकिन गहराई में देखें तो मुख्य वजहें स्पष्ट हैं:

 1. दोहरी नागरिकता की कमी: भारत में डुअल सिटीजनशिप नहीं है। विदेश में लंबे समय तक रहने वाले भारतीयों को वोटिंग राइट, सोशल सिक्योरिटी, सरकारी नौकरियां या परमानेंट रेसिडेंसी के लिए विदेशी नागरिकता लेनी पड़ती है। OCI कार्ड केवल वीजा-फ्री ट्रैवल और कुछ आर्थिक अधिकार देता है, राजनीतिक अधिकार नहीं। 

2. बेहतर अवसर और जीवन स्तर: अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन जैसे देशों में ज्यादा सैलरी, बेहतर शिक्षा, हेल्थकेयर, स्वच्छ वातावरण और स्थिर गवर्नेंस मिलता है। कुशल भारतीय प्रोफेशनल्स (आईटी, मेडिसिन, इंजीनियरिंग) वहां आसानी से सेटल हो जाते हैं। 

3. ग्लोबल मोबिलिटी: विदेशी पासपोर्ट से ज्यादा देशों में वीजा-फ्री यात्रा मिलती है। भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग कम होने से बिजनेस और ट्रैवल में दिक्कत आती है। 

4. परिवार और बच्चों का भविष्य: कई लोग बच्चों की बेहतर शिक्षा और सिक्योर फ्यूचर के लिए स्थायी रूप से विदेश बसना चाहते हैं।

 यह "ब्रेन ड्रेन" भारत के लिए चिंता की बात है, क्योंकि ज्यादातर जाने वाले शिक्षित और कुशल लोग हैं। लेकिन सरकार इसे "ग्लोबल वर्कप्लेस का हिस्सा" मानती है और डायस्पोरा को देश की ताकत बताती है।

 क्या यह ट्रेंड रुकेगा? जब तक भारत में अवसर, जीवन स्तर और पॉलिसी में बड़े बदलाव नहीं आएंगे, यह मूक पलायन जारी रहेगा।
सज्जाद अली नायाणी ✍