फ्राइडे वर्ल्ड 30,12,2025
दक्षिण एशिया में शांति की उम्मीदें एक बार फिर संकट के घेरे में। अमेरिका की प्रतिष्ठित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने अपने वार्षिक रिपोर्ट Conflicts to Watch in 2026" में सबसे ज्यादा चिंताजनक परिदृश्यों में भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष को शामिल किया है।
रिपोर्ट में इस संभावना को मध्यम" (Moderate Likelihood) श्रेणी में रखा गया है, लेकिन इसकी गंभीरता इतनी ज्यादा बताई गई है कि यह वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष: क्या 2026 युद्ध का साल बन सकता है?
CFR की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत-पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष की संभावना मध्यम स्तर की है। मुख्य कारण बताए गए हैं:
- कश्मीर में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियां* और सीमा पार से हमले
- दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच गलतफहमी या तेज प्रतिक्रिया का खतरा
- पाकिस्तान की दोहरी चुनौती – एक तरफ भारत, दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर बढ़ता तनाव
रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कूटनीतिक और रणनीतिक कदम नहीं उठाए गए, तो यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर न सिर्फ दक्षिण एशिया, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
मई 2025 का 'मिनी युद्ध' – एक खतरनाक पूर्वसंकेत रिपोर्ट में 2025 के मई महीने में हुए चार दिवसीय 'मिनी युद्ध' का विशेष उल्लेख है। इस दौरान:
- पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर' चलाया
- भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए
- पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में भारतीय क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल दागे
- चार दिनों में दोनों तरफ से दर्जनों हमले हुए, लेकिन बड़े पैमाने पर जमीनी घुसपैठ या पूर्ण युद्ध नहीं हुआ
CFR का कहना है कि यह 'मिनी युद्ध' दोनों देशों के बीच नई सामान्य स्थिति की ओर इशारा करता है, जहां छोटे-छोटे टकराव आसानी से बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं।
पाकिस्तान के लिए दो मोर्चों का संकट पाकिस्तान की स्थिति रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई गई है। एक तरफ भारत के साथ लोकप्रियता और सैन्य दबाव दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ 2,600 किमी लंबी डूरंड लाइन पर तनाव।
- तालिबान शासित अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन को मान्यता देने से इनकार कर दिया है
- सीमा पर नियमित गोलीबारी और छोटे-मोटे संघर्ष जारी हैं
- टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) जैसे आतंकी संगठनों को अफगानिस्तान से समर्थन मिलने की आशंका
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि पाकिस्तान दो मोर्चों पर एक साथ लड़ने की स्थिति में आ सकता है, जो उसकी सेना और अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और बढ़ता जोखिम
भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति अब जीरो टॉलरेंस वाली है। यदि पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद नहीं रुका, तो भारत निर्णायक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। CFR की रिपोर्ट में इसे एक ट्रिगर पॉइंट के रूप में देखा गया है।
दूसरी तरफ पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता। और सेना पर बढ़ता दबाव भी युद्ध जैसी स्थिति को बढ़ावा दे सकता है।
वैश्विक प्रभाव: अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर असर यदि भारत-पाकिस्तान के बीच बड़ा संघर्ष हुआ तो:
- वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल
- दक्षिण एशियाई व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर
- परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का डर वैश्विक बाजारों में भय पैदा कर सकता है
- अमेरिका, चीन और रूस जैसे बड़े देशों को कूटनीतिक रूप से सक्रिय होना पड़ेगा
अंत में: शांति की उम्मीद या युद्ध की तैयारी? CFR की यह रिपोर्ट न तो युद्ध की भविष्यवाणी है और न ही शांति का आश्वासन। यह एक चेतावनी है – कि दक्षिण एशिया की स्थिति बेहद नाजुक है।
2026 में क्या होगा – यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश कितनी जल्दी **कूटनीति, संवाद और आतंकवाद पर नियंत्रण** की दिशा में कदम उठाते हैं।
फिलहाल तो दुनिया सांस थामकर देख रही है – क्या दक्षिण एशिया 2026 में इतिहास के सबसे खतरनाक पन्नों में से एक का गवाह बनेगा?
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 30,12,2025