सज्जाद अली नायानी ✍🏼 फ्राइडे वर्ल्ड 24/12/2025
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक जघन्य गैंगरेप मामले में विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुख्य आरोपी महंत सीताराम दास उर्फ समर्थ त्रिपाठी सहित पांच दोषियों को न्यायाधीश पद्मा जाटव की अदालत ने
आजीवन कारावास-(अंतिम सांस तक जेल) की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
घटना की भयावह तफसील- यह सनसनीखेज घटना 28 मार्च 2022 को हुई थी। रीवा में भागवत कथा के आयोजन के लिए आए महंत सीताराम दास ने एक नाबालिग लड़की को काम के बहाने सर्किट हाउस के कमरे में बुलाया। वहां उसने और उसके साथियों ने लड़की को जबरदस्ती शराब पिलाई और सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया। पीड़िता ने अद्भुत साहस दिखाते हुए चलती कार से कूदकर अपनी जान बचाई और तुरंत पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
कोर्ट का फैसला और दोषी- विशेष POCSO अदालत ने महंत सीताराम दास, विनोद पांडे, धीरेंद्र मिश्रा, अंशुल मिश्रा और मोनू प्यासी को दोषी करार दिया है। इन पांचों को IPC की धारा 376D (गैंगरेप), 376AB (नाबालिग के साथ गैंगरेप), POCSO एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, सबूतों के अभाव में संजय त्रिपाठी, रविशंकर शुक्ला, जानवी दुबे और तौसीद अंसारी नामक चार आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
सबूतों की मजबूती- पुलिस ने इस केस में 22 गवाहों के बयान, 140 से अधिक दस्तावेजी सबूत, डीएनए रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे तकनीकी सबूत पेश किए थे। इन सभी सबूतों के आधार पर अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई है।
समाज को कड़ा संदेश- सरकारी परिसर में एक कथित धर्मगुरु द्वारा किए गए इस अमानवीय अपराध के फैसले ने पूरे देश में कड़ा संदेश दिया है। इस निर्णय से नाबालिगों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। पीड़िता के साहस और पुलिस-प्रशासन के प्रयासों को भी सलाम है।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि धर्म के नाम पर किसी भी अपराध को बख्शा नहीं जाएगा।
सज्जाद अली नायानी ✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 24/12/2025