सूरत के कठोर सब-डिवीजन में तैनात DGVCL के सीनियर क्लर्क संतोष भगवान सोनवणे (48) की लालच भरी कहानी उस वक्त खत्म हो गई जब गुजरात ACB ने उसे और उसके दोस्त लेबर कॉन्ट्रैक्टर भरत रमणीक सावलिया को 70 हज़ार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।
क्लर्क को हर महीने 85 हज़ार रुपये से ज़्यादा वेतन मिलता है। 23 साल से सरकारी नौकरी कर रहा है। फिर भी एक साधारण किसान से नया बिजली कनेक्शन देने के बदले 70 हज़ार रुपये की मांग की। इतनी बड़ी रकम लेने के लिए खुद सामने नहीं आया, अपने विश्वासी लेबर कॉन्ट्रैक्टर मित्र भरत सावलिया को भेजा।
ACB को जैसे ही शिकायत मिली, टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही भरत ने किसान से नकद 70 हज़ार रुपये लिए और फोन पर क्लर्क संतोष को सूचना दी, उसी पल दूसरी ACB टीम ने फील्ड में काम कर रहे संतोष सोनवणे को दबोच लिया। रिश्वत का ज़िक्र होते ही क्लर्क के हाथ-पैर फूल गए और पसीना छूट गया।
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है
– 2025 में इस क्लर्क ने कितने बिजली मीटर जारी किए? कितने किसानों-उपभोक्ताओं से इसी तरह मोटी रकम वसूली? क्या इस 70 हज़ार में सब-डिवीजन के दूसरे कर्मचारियों का भी हिस्सा था?
ACB अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि कठोर सब-डिवीजन में गहन जाँच होगी तो कई और भोपालें (घोटाले) सामने आ सकते हैं।
लोग पूछ रहे हैं – 85 हज़ार सैलरी लेने वाला कर्मचारी इतना लालची कैसे? और ऐसे कितने संतोष सोनवणे अभी भी सिस्टम में बैठे हैं?
सज्जाद अली नायाणी✍️