बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित 2016 बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप मामले में आज विशेष पोक्सो कोर्ट ने पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक पर कुल 1.81 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट काउंसल (एडीजीसी) वरुण कौशिक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट ने अपने फैसले में साफ संदेश दिया है कि ऐसे अपराधियों को सभ्य समाज से दूर रखा जाना चाहिए।
यह जघन्य घटना 29 जुलाई 2016 की रात की है, जब नोएडा से शाहजहांपुर एक गमी में शामिल होने जा रहा परिवार नेशनल हाईवे-91 पर दोस्तपुर के पास लुटेरों का शिकार बना।
हथियारबंद अपराधियों ने कार पर कुछ फेंककर उसे रोका। जैसे ही परिवार के पुरुष सदस्य गाड़ी जांचने उतरे, 5-7 हमलावरों ने उन्हें बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया। परिवार के साथ मारपीट की गई और मां तथा नाबालिग बेटी के साथ करीब ढाई घंटे तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया। लूटपाट के बाद अपराधी फरार हो गए।
इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था। शुरुआती जांच में स्थानीय पुलिस की लापरवाही उजागर हुई, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने 5 नवंबर 2016 को तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और 18 अप्रैल 2018 को तीन अन्य के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की। कुल छह आरोपियों में से एक सलीम की ट्रायल के दौरान 2019 में जेल में मौत हो गई थी। शेष पांच – जुबैर उर्फ सुनील उर्फ परवेज, साजिद, धर्मवीर उर्फ जितेंद्र, नरेश उर्फ संदीप और सुनील कुमार उर्फ सागर – को बीते 20 दिसंबर को कोर्ट ने दोषी ठहराया था।
एडीजीसी वरुण कौशिक ने बताया, "यह केस फोरेंसिक सबूतों और पीड़ितों के बयानों पर टिका था। एक आरोपी का डीएनए पीड़िता की मां के कपड़ों पर मिला, जो निर्णायक साबित हुआ। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे अपराधी समाज के लिए खतरा हैं और उन्हें आजीवन जेल में रखा जाना जरूरी है।"
पीड़ित परिवार ने नौ साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिले इस फैसले पर राहत की सांस ली है, हालांकि ट्रॉमा आज भी उन्हें सताता है। एक पीड़िता, जो अब लॉ की छात्रा हैं, ने कहा कि यह फैसला उम्मीद जगाता है, लेकिन घाव कभी पूरी तरह नहीं भरेंगे।
यह सजा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में न्यायिक सख्ती का प्रतीक है। कोर्ट का यह कदम हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा और अपराधियों को कड़ी सजा की मिसाल पेश करता है।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼