जयपुर-राजस्थान में ग्रामीण मजदूरों और सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार के नए 'विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी 'वीबी-जी राम जी' कानून का पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। मजदूर संगठनों ने इसे 'मजदूरों के हितों पर सीधा प्रहार' करार देते हुए मनरेगा की जगह लेने वाले इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की है। राज्य में प्रदर्शन और रैलियां निकाली जा रही हैं, जबकि सोमवार को जयपुर के पिंकसिटी प्रेस क्लब में संयुक्त मजदूर संगठनों की प्रेस वार्ता हुई।
इस प्रेस वार्ता में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और निखिल डे ने मुख्य भूमिका निभाई। दोनों ने मिलकर 'मनरेगा नहीं तो वोट नहीं' का नारा दिया। अरुणा रॉय ने कहा, "मनरेगा के लिए हुआ आंदोलन खून-पसीने से लड़ा गया था। यह योजना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई थी, क्योंकि इसमें ग्रामीण गरीबों को काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। अब 'वीबी-जी राम जी' कानून एक व्यक्ति की गरिमा पर चोट है। इससे देश के 26 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। हम हर ग्राम सभा में मनरेगा वापस लाने के लिए दबाव डालेंगे।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह कानून जल्दबाजी में बनाया गया। "दो दिन में कानून बना दिया, न स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा और न ही चर्चा का समय दिया। यह लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। हम वार्ड पंच, सरपंच, प्रधान, विधायक और सांसदों के पास जाएंगे। प्रधानमंत्री को लाखों चिट्ठियां भेजेंगे।"
निखिल डे ने कानून की खामियां गिनाईं। उन्होंने कहा, "नाम बदल रहे हैं और दिन बढ़ा रहे हैं, लेकिन यह भ्रमित करने वाला है। इसमें सवा सौ दिन की गारंटी नहीं है, एक दिन की भी गारंटी नहीं है। मनरेगा में काम मांगने पर 15 दिन में काम नहीं मिलने पर भत्ता मिलता था। अब नए कानून के सेक्शन 5 में कहा गया है कि यह केवल उन ग्रामीण इलाकों में लागू होगा जहां केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी। इससे गारंटी पूरी तरह छिन जाएगी।"
मजदूर संगठनों का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण भारत की जीवनरेखा थी, जो सूखे, बाढ़ या महामारी जैसे संकटों में गरीबों का सहारा बनती थी। नए कानून में रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा किया गया है, लेकिन गारंटी की जगह इसे केंद्र की मर्जी पर छोड़ दिया गया है। साथ ही, राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और काम केवल चुनिंदा क्षेत्रों में सीमित हो जाएगा।
राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस) जैसे संगठन, जिन्होंने कभी मनरेगा और आरटीआई जैसे कानूनों के लिए संघर्ष किया, अब इस नए कानून के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। संगठनों की संयुक्त मांग है कि 'वीबी-जी राम जी' कानून को तुरंत वापस लिया जाए और मनरेगा को मजबूत बनाया जाए।
यह विरोध केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देशभर में किसान-मजदूर संगठन और विपक्षी दल इसे मजदूर-विरोधी बता रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रदर्शन और तेज होने की संभावना है।
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼