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Monday, 22 December 2025

टॉय गन और क्रिकेट बॉल से हाईजैक: इंदिरा की रिहाई के लिए 'ड्रामा' करने वाले दो नौजवानों बाद में बनाए विधायक!

टॉय गन और क्रिकेट बॉल से हाईजैक: इंदिरा की रिहाई के लिए 'ड्रामा' करने वाले दो नौजवानों बाद में बनाए विधायक!
नई दिल्ली। 20 दिसंबर 1978 की सर्द शाम। इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-410 कलकत्ता (अब कोलकाता) से लखनऊ होते हुए दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड करने वाली थी। बोइंग 737 में 126 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे। फ्लाइट महज 15 मिनट की दूरी पर थी, जब 15वीं रो में बैठे दो नौजवान – भोलानाथ पांडेय और देवेंद्र पांडेय – अचानक उठे और कॉकपिट की ओर बढ़े।

 एक ने बेहद शालीनता से एयर होस्टेस इंदिरा ठाकरी से कॉकपिट जाने की इजाजत मांगी। क्रू मेंबर जीवी डे उन्हें कप्तान तक पहुंचाने ही वाले थे कि दूसरे नौजवान ने होस्टेस की कोहनी पकड़ ली और दोनों ने जोर लगाकर कॉकपिट का मैग्नेटिक दरवाजा खोल लिया। अंदर घुसते ही उन्होंने पायलट को बंदूक की नोक पर लिया और फ्लाइट को वाराणसी डायवर्ट करने का आदेश दिया।

 यात्रियों को इंटरकॉम पर ऐलान हुआ – "यह फ्लाइट हाईजैक हो चुकी है।" हाईजैकर्स ने खुद को यूथ कांग्रेस का सदस्य बताया और अपनी मांगें रखीं: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तत्काल रिहाई, उनके बेटे संजय गांधी पर लगे सभी केस वापस और जनता पार्टी सरकार का इस्तीफा।

 देश भर में हड़कंप मच गया। फ्लाइट वाराणसी उतरी, जहां उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव ने चार्टर प्लेन से पहुंचकर बातचीत की। सुबह तक बातचीत चली और हाईजैकर्स ने आत्मसमर्पण कर दिया। कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ – "बंदूक" असल में एक टॉय पिस्टल थी और "बम" कपड़े में लिपटी एक क्रिकेट बॉल!

 यह घटना इमरजेंसी के बाद के राजनीतिक उबाल का प्रतीक थी। जनता पार्टी सरकार ने इंदिरा गांधी को गिरफ्तार किया था, जिसके विरोध में यूथ कांग्रेस के इन कार्यकर्ताओं ने यह "ड्रामा" रचा। कई लोगों ने इसे "स्काईजोकिंग" कहा, क्योंकि हथियार नकली थे और मकसद सिर्फ प्रदर्शन।

 लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 1980 में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी के बाद दोनों हाईजैकर्स पर चल रहा मुकदमा वापस ले लिया गया। कांग्रेस ने उन्हें इनाम स्वरूप टिकट दिए। भोलानाथ पांडेय बलिया की दोआबा (अब बैरिया) सीट से 1980-85 और 1989-91 तक विधायक बने। देवेंद्र पांडेय भी दो टर्म तक विधायक रहे। भोलानाथ तो बाद में लोकसभा चुनाव भी कई बार लड़े।

 यह घटना भारतीय राजनीति की उस दौर की मिसाल है, जहां निष्ठा को कानून से ऊपर रखा गया। टॉय गन से शुरू हुआ "हाईजैक" आखिरकार सत्ता की सीढ़ी बन गया। भोलानाथ पांडेय का 2024 में निधन हो गया, लेकिन यह किस्सा आज भी चर्चा में रहता है – एक अजीबोगरीब राजनीतिक ड्रामा!
सज्जाद अली नायाणी✍🏼