वॉशिंगटन, 5 दिसंबर 2025 – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी कूटनीतिक कौशल का लोहा मनवाते हुए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और रवांडा के नेताओं की मेजबानी की। व्हाइट हाउस में आयोजित समारोह में दोनों देशों के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिसेकेदी और पॉल कागामे ने 'वॉशिंगटन एकोर्ड्स' नामक शांति और आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने इसे "दुनिया के लिए महान दिन" करार दिया, लेकिन पूर्वी कांगो में जारी हिंसा सवालों के घेरे में खड़ी है।
यह समझौता जून में वॉशिंगटन में विदेश मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित प्रारंभिक शांति करार का विस्तार है, जिसमें नवंबर में कतर में ढांचागत समझौता हुआ था। ट्रंप प्रशासन ने इसे आठवां "युद्ध समाप्ति" बताते हुए जश्न मनाया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जमीनी स्तर पर संघर्ष थमा नहीं है। "हमने कई असफल प्रयासों के बाद सफलता हासिल की है," ट्रंप ने डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में कहा, जहां समारोह आयोजित हुआ। रवांडा के कागामे ने ट्रंप को "निष्पक्ष मध्यस्थ" बताते हुए धन्यवाद दिया, जबकि कांगो के त्शिसेकेदी ने इसे "क्षेत्र के लिए टर्निंग पॉइंट" कहा।
संघर्ष की जड़ें 1994 के रवांडा नरसंहार में हैं, जहां हutu विद्रोहियों ने कांगो में शरण ली। दशकों से चले आ रहे इस विवाद ने पूर्वी कांगो को खनिजों से भरपूर युद्धक्षेत्र बना दिया है। इस साल की शुरुआत में एम23 विद्रोही समूह ने उत्तर किवू प्रांत के महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्जा किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका रवांडा-समर्थित मानते हैं। जून के समझौते के बावजूद, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाया। एम23 ने कांगो के साथ चल रही शांति वार्ता से बाहर निकलने की धमकी दी, और ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार जुलाई में इस समूह ने कम से कम 319 नागरिकों की हत्या की, जिसमें रवांडा डिफेंस फोर्सेस की भूमिका भी शामिल थी।
समझौते के प्रमुख बिंदु आकर्षक हैं। इसमें स्थायी संघर्षविराम, गैर-राज्य सेनाओं का विघटन, शरणार्थियों की वापसी और अपराधियों के लिए न्याय सुनिश्चित करना शामिल है। आर्थिक पैकेज में अमेरिका को क्षेत्र के कोबाल्ट, कोल्टन और अन्य दुर्लभ खनिजों तक पहुंच मिलेगी, जो चीन पर निर्भरता कम करेगा। ट्रंप ने वादा किया कि अमेरिकी कंपनियां इन खनिजों की खरीद बढ़ाएंगी, जिससे दोनों देशों में निवेश और बुनियादी ढांचे का विकास होगा। कतर की मध्यस्थता से हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर और खनन पर सहयोग का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
हालांकि, आलोचक सतर्क हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुक्वेगे ने कहा, "यह शांति नहीं, खनिजों की होड़ है।" समारोह से ठीक पहले उविरा शहर के पास भारी झड़पें हुईं, जहां कांगो की सेना और एम23 के बीच गोलीबारी में कई मौतें हुईं। कांगो के अधिकारी पैट्रिक मुयाया ने रवांडा पर शांति न चाहने का आरोप लगाया, जबकि रवांडा एम23 समर्थन से इनकार करता है। विश्लेषक जेसन स्टर्न्स का मानना है कि कांगो ने साफ कहा है कि रवांडा की सेनाएं पीछे न हटने तक आर्थिक सौदे आगे नहीं बढ़ेंगे।
ट्रंप ने अपनी वैश्विक शांति भूमिका पर जोर दिया, दावा किया कि यह उनके नेतृत्व में आठवां ऐसा समझौता है। अन्य अफ्रीकी नेता जैसे केन्या, अंगोला और युगांडा के उपराष्ट्रपति भी साक्षी बने। लेकिन सोमालिया पर ट्रंप की अपमानजनक टिप्पणियां अफ्रीकी कूटनीति पर सवाल उठाती हैं।
यदि यह समझौता सफल रहा, तो पूर्वी कांगो के लाखों विस्थापितों को राहत मिलेगी। लेकिन जमीनी अमल पर नजरें टिकी हैं। ट्रंप की आशावादी भविष्यवाणी – "तुरंत परिणाम दिखेंगे" – परीक्षा की घड़ी में है। क्या यह वाकई शांति का नया दौर लाएगा, या खनिजों की चमक के पीछे रक्तपात जारी रहेगा? समय बताएगा।
सज्जाद अली नायाणी✍️