नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025– दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे इन दिनों युद्धग्रस्त रिफ्यूजी कैंप जैसे दिख रहे हैं। फर्श पर कंबल-चादर बिछाकर सोते बच्चे, रोती महिलाएँ, बीमार बुजुर्ग और टूटते सपने। IndiGo ने पिछले 48 घंटों में अचानक 1000 से ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दीं। वजह बताई जा रही है – “नए पायलट रेस्ट नियम” और “क्रू की कमी”। लेकिन सवाल यही है: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन को ये बात पहले क्यों नहीं पता थी?
सुबह 4 बजे से लोग कतार में हैं। बोर्डिंग पास हाथ में, लेकिन गेट पर ताला। कोई घोषणा नहीं, कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं। लाउंज में पैड तक खत्म, महिलाएँ शर्मिंदगी से गुज़र रही हैं। एक माँ का कैंसर का अपॉइंटमेंट मिस हो गया, अब अगली तारीख तीन महीने बाद। एक लड़की UPSC इंटरव्यू के लिए जा रही थी, रोते-रोते काउंटर पर बैठ गई। बारातियां दूल्हे के साथ एयरपोर्ट पर ही फँस गईं। बच्चे भूख से बिलख रहे हैं, दवाइयाँ खत्म हो गईं।
यात्री बता रहे हैं: “24 घंटे से पानी की बोतल तक नहीं मिली।” “रिफंड का कोई अता-पता नहीं।” “कस्टमर केयर का फोन बार-बार कट रहा है।”
DGCA का बयान: “हम जाँच कर रहे हैं।” IndiGo का बयान: “रविवार तक सब नॉर्मल हो जाएगा।” यात्रियों का जवाब: “हमारी ज़िंदगी रविवार तक रुकेगी नहीं!”
ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, पूरी तरह मानव-निर्मित संकट है। नया पायलट रेस्ट नियम 1 दिसंबर से लागू हुआ। सवाल ये कि इतनी बड़ी एयरलाइन ने महीनों पहले से बैकअप क्रू, अतिरिक्त पायलट या वैकल्पिक प्लान क्यों नहीं बनाया? यात्री नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी को बंधक बनाकर “सॉरी” बोल देना काफी है क्या?
ये वही अमृतकाल है जहाँ नोटबंदी अचानक, लॉकडाउन अचानक, कानून अचानक, और अब हवाई यात्रा अचानक ठप। कोई पूर्व तैयारी नहीं, कोई स्टेकहोल्डर से बात नहीं, बस आदेश थोप दो और जनता से कहो– “झेलो”!
जब तक सरकार और DGCA सिर्फ़ “जाँच” और “मॉनिटरिंग” करते रहेंगे, तब तक हज़ारों लोग एयरपोर्ट की ठंडी फ़र्श पर ही सोते रहेंगे।
विश्वगुरु बनने की बातें करने वाले, पहले अपने एयरपोर्ट को इंसानों का ठिकाना तो बना लें!
सज्जाद अली नायाणी✍️