लातविया के एक छोटे से देश में इन दिनों कुछ ऐसा हो रहा है, जो सुनने में फिल्मी लगता है, लेकिन हकीकत है। यहाँ महिलाएँ घंटों के हिसाब से पति किराए पर ले रही हैं!जी हाँ, बिल्कुल सही पढ़ा आपने।
ये किराए का पति न तो शादी करता है, न ही हमेशा के लिए घर बसाता है। बस कुछ घंटों के लिए आता है, घर का काम करता है, साथ देता है, बातें करता है और फिर चला जाता है।
वजह चौंकाने वाली है! लातविया में पुरुषों की भारी कमी हो गई है। आंकड़े बताते हैं कि यहाँ हर 100 महिलाओं के पीछे सिर्फ 85 पुरुष हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है –
पुरुषों की कम उम्र में मौत। धूम्रपान, शराब की लत, खराब लाइफस्टाइल और तनाव की वजह से लातविया के पुरुषों का औसत जीवनकाल महिलाओं से करीब 10 साल कम है। नतीजा? गाँवों से लेकर शहरों तक, हर जगह औरतें अकेली रह गई हैं।
त्योहार भी अकेले, शादी भी मुश्किल राजधानी रीगा में रहने वाली डेनिया नाम की एक महिला बताती हैं, “मेरी सारी सहेलियाँ लड़कियाँ हैं। त्योहार मनाने के लिए भी मर्द नहीं मिलता। पार्टी आयोजित करो तो वेटर तक औरतें ही होती हैं।”
कई महिलाएँ तो शादी के लिए रूस, जर्मनी या ब्रिटेन तक पति ढूंढने जाती हैं।
अब चल रहा है “Husband for an Hour” का बिज़नेस इस कमी ने एक नया कारोबार खड़ा कर दिया है।
अब लातविया में कई वेबसाइट्स और ऐप्स हैं जो पति घंटे के हिसाब से मुहैया कराते हैं। ये किराए के पति सिर्फ़ प्लंबर या इलेक्ट्रीशियन का काम नहीं करते, बल्कि: घर का सामान ठीक करते हैंफर्नीचर जोड़ते हैं खाना बनाने में मदद करते हैं साथ में कॉफ़ी पीते हैं, गपशप करते हैंअकेलापन दूर करते हैं एक घंटे की फीस करीब 20-40 यूरो (लगभग 1800-3500 रुपये) तक होती है। माँग इतनी है कि बुकिंग के लिए हफ्तों इंतज़ार करना पड़ता है!
क्या ये भविष्य की तस्वीर है? विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर पुरुषों ने अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखा तो कई देशों में यही हाल होगा। लातविया आज दुनिया के लिए एक आईना बन गया है
– जहाँ औरतें मजबूरी में “किराए का पति” चुनने को मजबूर हैं।
तो अगली बार जब कोई कहे कि “औरतें आज़ाद हो गई हैं”, तो सोचना – क्या ये आज़ादी है या मजबूरी की नई परिभाषा?