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Monday, 8 December 2025

“वन्दे मातरम् पर जिन्ना के आगे घुटने टेक दिए थे नेहरू जी…” संसद में PM मोदी का धारदार हमला!

“वन्दे मातरम् पर जिन्ना के आगे घुटने टेक दिए थे नेहरू जी…” संसद में PM मोदी का धारदार हमला!
नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में आज ‘वन्दे मातरम्’ पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस पर करारा प्रहार किया। उन्होंने खुलासा किया कि 1937 में जब जिन्ना और मुस्लिम लीग ने ‘वन्दे मातरम्’ का विरोध किया, तो नेहरू जी को अपनी कुर्सी डगमगाती दिखी और उन्होंने जिन्ना को जवाब देने की बजाय खुद ‘वन्दे मातरम्’ की जाँच बैठा दी! 

जिन्ना डर गए, नेहरू घबरा गए! पीएम मोदी ने कहा, “1937 में जिन्ना ने कहा – हमें वन्दे मातरम् मंज़ूर नहीं। नेहरू जी को लगा कि अगर मुसलमान नाराज़ हो गए तो सत्ता चली जाएगी। फिर क्या था
 – कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 26 अक्टूबर 1937 को मीटिंग बुलाई और वन्दे मातरम् की समीक्षा शुरू कर दी! जिस गीत ने लाखों भारतीयों को फाँसी के फंदे पर झूलने की ताकत दी, उसी गीत को नेहरू जी ने ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के तराजू में तौलना शुरू कर दिया।” 

 अंग्रेज भी डरते थे इस जयघोष से प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि: - 1857 के बाद अंग्रेज ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर पहुँचाना चाहते थे, ओर एक ऐसा संगठन जो अंग्रेज के साथ मिलकर स्वतंत्र सेनानी की मुखबिर करता था 
- अंग्रेजों ने ‘वन्दे मातरम्’ बोलने पर कानून बना दिया, सजा का प्रावधान कर दिया। 

- बंगाल की वीरांगना सरोजिनी बोस ने कहा था – “प्रतिबंध नहीं हटेगा तो मैं अपनी चूड़ियाँ तोड़ दूँगी!” - छोटे-छोटे बच्चे प्रभात फेरी निकालते हुए ‘वन्दे मातरम्’ गाते और जेल जाते, उन पर कोड़े बरसाए जाते। 

 इमरजेंसी में भी दबाया गया था गीत पीएम ने इंदिरा गांधी के जमाने का भी ज़िक्र किया: “वन्दे मातरम् के 100 साल पूरे हो रहे थे, तब देश इमरजेंसी की जंजीरों में जकड़ा था। ओर आज वंदेमातरम की बात करने वाले बंगडी पहनकर अज्ञात वास मे चले गए थे

 संविधान का गला घोंटा जा रहा था। देशभक्तों को जेल में ठूँसा जा रहा था। उस समय भी ‘वन्दे मातरम्’ को दबाया गया।” 

आज 150 साल का गौरवशाली सफर प्रधानमंत्री ने गर्व से कहा, “दुनिया के इतिहास में कोई दूसरा काव्य नहीं जो 150 साल तक करोड़ों लोगों को एक लक्ष्य के लिए प्रेरित करता रहा हो।

 वन्दे मातरम् सिर्फ़ गीत नहीं, भारत की आत्मा है, भारत का संकल्प है।” 

अंत में पीएम का सीधा सवाल: “जो लोग आज भी वन्दे मातरम् से परहेज़ करते हैं, क्या वे जिन्ना की सोच के वारिस नहीं हैं?” 

संसद में गूँज उठा – भारत माता की जय! वन्दे मातरम्!! 
सज्जाद अली नायाणी✍