सना (यमन): यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन (हूती) के नेता सैयद अब्दुल मलिक बद्रुद्दीन अल-हूती ने अमेरिका में एक चुनावी उम्मीदवार द्वारा पवित्र कुरआन का अपमान करने की घटना की तीव्र निंदा की है। उन्होंने इसे इस्लामी पवित्रताओं के खिलाफ संगठित युद्ध का हिस्सा करार देते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया।
अमेरिकी उम्मीदवार का विवादास्पद कृत्य
हाल ही में अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी की एक उम्मीदवार वैलेंटिना गोमेज ने चुनावी प्रचार के दौरान एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने फ्लेमथ्रोअर से कुरआन की प्रतिलिपि जलाते हुए इस्लाम विरोधी बयान दिए। गोमेज ने वीडियो में कहा कि वह "इस्लाम को खत्म करने" की कोशिश करेंगी। इस घटना ने विश्व भर में मुस्लिम समुदायों में आक्रोश पैदा किया है और कई देशों में निंदा की गई है।
हूती नेता का कड़ा संदेश
सैयद अब्दुल मलिक अल-हूती ने अपने संदेश में इस अपमान को "धरती की सबसे पवित्र धार्मिक किताब के खिलाफ घृणित अपराध" बताया। उन्होंने कहा कि यह कृत्य यहूदी-जायोनी लॉबी के निरंतर युद्ध का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगी पूरी तरह शामिल हैं। हूती नेता ने चेतावनी दी कि इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ ऐसे अपमान एवं हमलों पर चुप्पी बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने गाजा में इजरायली अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में जायोनी शासन के अपराध पूरी दुनिया के सामने उजागर हो चुके हैं, फिर भी वह फिलिस्तीन में रोजाना अपराध कर रहा है और मस्जिद अल-अक्सा की पवित्रता का उल्लंघन जारी है।
जनता से रैली में भागीदारी की अपील
हूती नेता ने यमनी जनता से आगामी शुक्रवार की रैली में बड़े पैमाने पर भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी फिलिस्तीनी पीड़ितों के प्रति ईमानी प्रतिबद्धता का प्रतीक होगी और यमन की जनता की सजगता दिखाएगी कि वह किसी भी साजिश का मुकाबला करने को तैयार है।
यमनी विद्वान की प्रतिक्रिया
यमन के प्रख्यात विद्वान और उलेमा संघ के सदस्य अल्लामा फुआद नाजी ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने कुरआन के अपमान को उकसावे वाली और आतंकवादी कार्रवाई बताया, जो इस्लाम की सबसे बड़ी पवित्रता को निशाना बनाती है। नाजी ने कहा कि यह कृत्य अमेरिकी-जायोनी शत्रुता का हिस्सा है और यमन में जनाक्रोश को बढ़ाएगा।
उन्होंने अतीत की कमजोर प्रतिक्रियाओं को जिम्मेदार ठहराया कि आज अमेरिकी राजनीति में कुरआन अपमान को चुनावी हथियार बनाया जा रहा है। विद्वान ने मुस्लिम उम्माह से दुश्मनों की असली प्रकृति पहचानने और एकजुट होने की अपील की।
यह घटना मुस्लिम दुनिया में अमेरिकी नीतियों के खिलाफ विरोध को और मजबूत कर रही है। यमन की जनता ने ऐसे अपमानों के खिलाफ अपनी सजगता पहले भी दिखाई है और अब भी मजबूत रुख अपनाने को तैयार है।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼