फ्राइडे वर्ल्ड 31,12,2025
31 दिसंबर 2025 को, जब दुनिया नए साल की तैयारी में व्यस्त है, ईरान के विदेश मंत्री **सैयद अब्बास अराघची** ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज बुलंद की। लंदन के प्रतिष्ठित अखबार **द गार्डियन** में प्रकाशित अपने लेख "You’ll never defeat us in Iran, President Trump: but with real talks, we can both win" में अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि ईरान **न्यायपूर्ण, पारस्परिक सम्मान और लाभ** पर आधारित समझौते के लिए तैयार है, लेकिन अपने परमाणु अधिकारों से कभी समझौता नहीं करेगा।
यह लेख 30 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हुआ, ठीक उस समय जब ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच परमाणु मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं। जून 2025 में हुए 12-दिवसीय ईरान-इजरायल युद्ध के बाद, जहां अमेरिका-इजरायल ने ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमले किए, तेहरान ने अपनी "अधिकतम प्रतिरोध" नीति को और मजबूत किया। अराघची ने लिखा कि इजरायल की "अजेयता" की मिथक टूट चुकी है, और अब अमेरिका में भी कई लोग मान रहे हैं कि इजरायल "सहयोगी" कम और "बोझ" ज्यादा है।
परमाणु कार्यक्रम: धार्मिक, नैतिक और रणनीतिक आधार
ईरान के विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और यह फैसला **धार्मिक, नैतिक तथा सुरक्षा** आधार पर लिया गया है। उन्होंने इसे "तेल अवीव से रचित काल्पनिक संकट" करार दिया, जिसे इजरायल के प्रभाव में अमेरिकी नीति ने बढ़ावा दिया। 2015 के JCPOA (संयुक्त व्यापक कार्य योजना) को याद करते हुए अराघची ने कहा कि ट्रंप की पहली पारी में "अधिकतम दबाव" नीति ने ईरान को कमजोर नहीं, बल्कि अधिक मजबूत** बनाया। अब "अधिकतम प्रतिरोध" की क्षमता बढ़ चुकी है।
उन्होंने जून युद्ध का उदाहरण दिया, जहां ईरान ने संयम दिखाया, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। अराघची ने चेतावनी दी कि यह संयम अनंत नहीं है।
अमेरिका-इजरायल गठजोड़ पर सवाल लेख में अराघची ने ट्रंप को सीधे चुनौती दी:
- इजरायल ने अमेरिका को ईरान से टकराव में खींचने की कोशिश की, जो "महंगा और अभूतपूर्व" साबित हुआ।
- अब बढ़ती संख्या में अमेरिकी मान रहे हैं कि इजरायल "सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि अतिरिक्त बोझ" है।
- नेहरू-न्याय ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को "मिथकीय खतरा" बना दिया, लेकिन वास्तविकता अलग है।
उन्होंने क्षेत्रीय बदलावों का जिक्र किया, जहां ईरान और अमेरिका के साझा मित्र (संभवतः खाड़ी देश) अब बातचीत के लिए अभूतपूर्व इच्छुक हैं। अराघची ने दावा किया कि क्षेत्रीय बदलाव किसी नए समझौते को लागू करने का "नया तरीका" प्रदान कर सकते हैं।
समझौते की शर्तें और समय की सीमा ईरान स्पष्ट है:
- समझौता पारस्परिक सम्मान और साझा लाभ पर आधारित होना चाहिए।
- प्रतिबंधों का वास्तविक और सत्यापन योग्य हटना अनिवार्य है।
- ईरान NPT (परमाणु अप्रसार संधि) के तहत अपने शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।
अराघची ने चेतावनी दी कि "न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समझौते" के लिए समय की खिड़की सीमित है। इसमें साहस और हिम्मत की जरूरत है। "Fortune favours the brave" (भाग्य बहादुरों का साथ देता है) कहते हुए उन्होंने पुरानी दुश्मनी के चक्र को तोड़ने की अपील की।
कूटनीति या टकराव? अराघची का यह लेख सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन के लिए एक खुला पत्र है। ईरान न तो युद्ध चाहता है, न ही आत्मसमर्पण। वह गंभीर वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन शर्तों पर।
दुनिया अब देख रही है कि क्या अमेरिका इजरायल के दबाव से ऊपर उठकर वास्तविक कूटनीति चुनता है, या फिर पुरानी "अधिकतम दबाव" नीति को दोहराता है।
ईरान का संदेश साफ है: **हम अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे लेकिन **न्यायपूर्ण समझौते के लिए दरवाजा खुला है।
समय कम है, साहस ज्यादा चाहिए।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 31,12,2025