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Tuesday, 9 December 2025

गोवा नाइटक्लब हादसा: अमीरों की फरारी, गरीबों के आंखो मे सैलाब – न्याय का इंतजार कौन करेगा?

गोवा नाइटक्लब हादसा: अमीरों की फरारी, गरीबों के आंखो मे सैलाब – न्याय का इंतजार कौन करेगा?
गोवा की रंगीन रातें अक्सर पर्यटकों को लुभाती हैं, लेकिन 7 दिसंबर 2025 की रात को 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में लगी आग ने यह मिथक तोड़ दिया। आग की लपटों ने 25 जिंदगियों को लील लिया – ज्यादातर स्टाफ सदस्य, दो भाई जो अगले साल शादी करने वाले थे, और दिल्ली के एक परिवार के चार सदस्य। यह सिर्फ एक हादसा नहीं था; यह लापरवाही, भ्रष्टाचार और अमीर-गरीब की खाई का काला चेहरा था। और सबसे शर्मनाक? क्लब के मालिक लूथरा ब्रदर्स – गौरव और सौरभ – ने घटना के महज कुछ घंटों बाद देश छोड़ दिया।

 रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग लगने के बाद रविवार सुबह 3 बजे दोनों भाई दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे और इंडिगो की फ्लाइट 6E-1073 से 5:30 बजे फुकेत, थाईलैंड उड़ चले। गोवा पुलिस के डीजीपी अलोक कुमार ने इसे "जांच से बचने की साफ मंशा" बताया। एफआईआर में उन्हें भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 125 (जीवन को खतरे में डालना) और 287 (आग से लापरवाही) के तहत नामजद किया गया है। पुलिस ने दिल्ली में उनके घर और ऑफिस पर छापेमारी की, लेकिन वे गायब। अब इंटरपोल से ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करवाया गया है, ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक हो सके। 

सोशल मीडिया पर सौरभ लूथरा ने "गहन शोक" व्यक्त किया, लेकिन अपनी लोकेशन का जिक्र तक नहीं किया। क्या यह पछतावा था या सिर्फ दिखावा? क्लब में सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति साफ दिख रही है – अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की कमी, और ओवरक्राउडिंग। गोवा पुलिस ने पांच मैनेजमेंट स्टाफ को गिरफ्तार किया है, जिसमें ऑपरेशंस हेड भारत कोहली भी शामिल है। एक पार्टनर अजय गुप्ता की तलाश जारी है। लेकिन असली सवाल: आखिर ऐसे हादसों के जिम्मेदार कभी सलाखों के पीछे क्यों नहीं पहुंचते? 

यह घटना भारत की उस कड़वी हकीकत को उजागर करती है, जहां हादसों का कोई मालिक नहीं। याद कीजिए भोपाल गैस कांड, या हाल के रेल हादसे – दोषियों को सजा मिलने में साल लग जाते हैं। यहां तो मालिक ही भाग गए! और इंडिगो फ्लाइट? आम आदमी के लिए उड़ानें महंगी या कैंसल, लेकिन 'पैसे वालों' के लिए सब चालू। यह अमीरों की विशेषाधिकार वाली दुनिया का नंगा नाच है। क्या लोकआउट सर्कुलर जारी होने से पहले ही इमिग्रेशन ने सोचा? या सिस्टम में ही सेंध है?

 पीड़ित परिवारों का दर्द देखिए – दिल्ली का एक परिवार पूरी तरह बर्बाद, स्टाफ के परिजन बेरोजगार और बेबस। सरकार ने मुआवजे की घोषणा की, लेकिन क्या यह काफी? गोवा के पर्यटन उद्योग पर असर पड़ेगा, लेकिन असली चोट उन परिवारों को लगी है जो सपनों के पीछे भागे थे।

 देश सुरक्षित हाथों में है, कहते हैं। लेकिन जब मालिक भागते हैं और कानून सोता है, तो आम आदमी का भरोसा कहां बचेगा? हमें सख्त कानून चाहिए – फायर सेफ्टी पर जीरो टॉलरेंस, त्वरित जांच, और फरारियों को लाने के लिए तेज कार्रवाई। इंटरपोल की मदद से लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जाए, ताकि न्याय हो। वरना, ऐसे हादसे फिर दोहराए जाएंगे।

 यह समय है जागने का। हादसों को सिर्फ खबर न बनने दें – सबक बनाएं। पीड़ितों को न्याय मिले, और सिस्टम जवाबदेह बने। जय हिंद! 

सज्जाद अली नायाणी✍🏼