बिहार की राजधानी पटना में 15 दिसंबर 2025 को एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान हुई एक घटना ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नव नियुक्त आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंप रहे थे। इसी दौरान जब एक मुस्लिम महिला डॉक्टर नुसरत परवीन मंच पर आईं, तो नीतीश कुमार ने उनकी हिजाब (नकाब) को खींचकर नीचे कर दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिला असहज हो गईं, जबकि मंच पर मौजूद कुछ लोग हंसते नजर आए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि महिलाओं की निजी जगह (पर्सनल स्पेस) और धार्मिक स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल उठाती है। इस्लाम में हिजाब महिलाओं की गरिमा, सम्मान और modesty का प्रतीक है। कुरान और हदीस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि महिलाओं को अपनी बाउंड्री निर्धारित करने का अधिकार है। न तो कोई उनकी बाउंड्री में अनावश्यक हस्तक्षेप कर सकता है, और न ही किसी की बाउंड्री को लांघना चाहिए। जैसा कि एक विद्वान ने कहा, "इस्लाम ने आपके लिए एक बाउंड्री निर्धारित की है... न तो आप अपनी बाउंड्री में किसी को आने दें और न ही किसी दूसरे की बाउंड्री में जाएं।"
महिला का अपना एक व्यक्तिगत स्पेस होता है, जो उसकी स्वतंत्रता और सुरक्षा का आधार है। नीतीश कुमार का यह कृत्य न केवल अपमानजनक है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी माना जा रहा है। भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और निजी गरिमा की रक्षा करता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे महिला की गरिमा, स्वायत्तता और पहचान पर हमला करार दिया है। विपक्षी दलों – कांग्रेस, राजद, समाजवादी पार्टी – ने इसे महिलाओं के खिलाफ घोर अपराध बताया और नीतीश कुमार से इस्तीफा या माफी की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि राज्य के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति अगर सार्वजनिक रूप से ऐसा करता है, तो महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं?
घटना के बाद डॉक्टर नुसरत परवीन ने अपनी नौकरी जॉइन नहीं की, जो इस अपमान की गहराई को दर्शाता है। कश्मीर से लेकर पाकिस्तान तक इसकी निंदा हुई, हालांकि भारत में कई नेताओं ने इसे आंतरिक मामला बताकर विदेशी हस्तक्षेप ठुकराया। सत्ता पक्ष में कुछ मंत्री ने इसे "पितृवत व्यवहार" बताया, लेकिन जनता और विशेषज्ञ इसे अस्वीकार कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के विवादित बयान ने आग में घी डाला, जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया।
यह विवाद हमें याद दिलाता है कि सत्ता में बैठे लोग कितनी आसानी से सीमाएं लांघ सकते हैं। मुस्लिम महिला का हिजाब हटाना एक अपमानजनक कृत्य है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि पूरे समाज में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। क्या कोई पुरुष किसी महिला की मर्जी के खिलाफ उसकी पसंद पर हाथ डाल सकता है? जवाब स्पष्ट है – नहीं। नीतीश कुमार को इस पर खेद व्यक्त करना चाहिए, ताकि संदेश जाए कि कोई भी बाउंड्री का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना बताती है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सहिष्णुता और सम्मान कितने जरूरी हैं। उम्मीद है कि यह विवाद सबक बनेगा और भविष्य में ऐसी हरकतें नहीं दोहराई जाएंगी। महिलाओं की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है – इसे कोई नहीं छीन सकता।
सज्जाद अली नायाणी ✍