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Monday, 15 December 2025

ट्रंप की धमकियों को नजरअंदाज कर भारत ने रूसी तेल आयात बढ़ाया: सस्ता क्रूड मिल रहा है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दामों में राहत कहाँ?

ट्रंप की धमकियों को नजरअंदाज कर भारत ने रूसी तेल आयात बढ़ाया: सस्ता क्रूड मिल रहा है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दामों में राहत कहाँ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पश्चिमी देशों ने रूसी तेल आयात पर कड़े प्रतिबंधों की धमकियां दी थीं, लेकिन भारत ने इनकी परवाह किए बिना नवंबर 2025 में रूसी क्रूड ऑयल का आयात 4 फीसदी बढ़ाकर 2.6 अरब यूरो (लगभग 3 अरब डॉलर) तक पहुंचा दिया। यह आंकड़ा पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। यूरोपीय थिंकटैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत चीन के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बना हुआ है।

 नवंबर में रूस की कुल क्रूड निर्यात में चीन का हिस्सा 47 फीसदी, भारत का 38 फीसदी, तुर्की का 6 फीसदी और यूरोपीय संघ का 6 फीसदी रहा। अक्टूबर में भारत ने 2.5 अरब यूरो का रूसी तेल खरीदा था, जिसमें नवंबर में बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी उस समय हुई जब अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए, जिनकी असर दिसंबर से ज्यादा दिखेगी। 

भारत की निजी रिफाइनरियां जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आयात में थोड़ा कमी की, लेकिन सरकारी कंपनियों ने 22 फीसदी की बढ़ोतरी की। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने रूसी क्रूड को रिफाइंड करके ऑस्ट्रेलिया में 69 फीसदी ज्यादा निर्यात किया। नवंबर में भारत और तुर्की की रिफाइनरियों ने रूसी क्रूड से बने 80.7 करोड़ यूरो के ईंधन का निर्यात किया, जिसमें बड़ा हिस्सा यूरोप, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा गया।

 लेकिन इस सस्ते रूसी तेल का फायदा आम जनता को क्यों नहीं मिल रहा? दिसंबर 2025 में भी दिल्ली में पेट्रोल का दाम करीब 94.77 रुपये और मुंबई में डीजल 90.03 रुपये के आसपास स्थिर है। पिछले एक साल से बड़े बदलाव के बिना ये दाम घटे नहीं हैं, जबकि तेल कंपनियां और रिफाइनरियां भारी मुनाफा कमा रही हैं। सस्ता क्रूड आयात कर रिफाइंड प्रोडक्ट्स की निर्यात से उद्योगपति मालामाल हो रहे हैं, लेकिन जनता की जेब को राहत नहीं मिली। 

CREA के अनुसार, दिसंबर में भी आयात बढ़ सकता है, क्योंकि प्रतिबंधों से पहले लोड हुए जहाज पहुंच रहे हैं। भारत की यह नीति वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण है – सस्ता तेल हासिल कर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, लेकिन इसका लाभ सभी तक पहुंचाना भी जरूरी है।
सज्जाद अली नायाणी ✍