वॉशिंगटन और कराकास के बीच बढ़ते तनाव के बीच, वेनेज़ुएला में हजारों लोग शनिवार को सड़कों पर उतर आए। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित इन विरोध प्रदर्शनों में लोगों ने कैरिबियन क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी नीतियों को राष्ट्रीय संप्रभुता पर खतरा बताते हुए जोरदार नारे लगाए।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुए जब अमेरिका ने कैरिबियन सागर में अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड, कई युद्धपोत और हजारों सैनिक शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन इसे ड्रग तस्करी रोकने की कार्रवाई बता रहा है, लेकिन वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसे संप्रभुता पर हमला करार दिया है। सितंबर से अब तक अमेरिकी हमलों में दर्जनों नावें डुबोई गईं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे गए।
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी हस्तक्षेप को 'साम्राज्यवादी आक्रमण' बताया और मादुरो सरकार का समर्थन किया। कराकास सहित कई शहरों में लोग वेनेज़ुएला के झंडे लहराते हुए सड़कों पर उतरे। कुछ जगहों पर विशाल झंडे प्रदर्शित किए गए, जबकि नारे लगाए गए कि 'अमेरिका बाहर निकलो!' और 'संप्रभुता की रक्षा करो!'।
यह विरोध अमेरिकी दबाव के जवाब में है, जिसमें हाल ही में एक वेनेज़ुएलन तेल टैंकर को जब्त करना शामिल है। मादुरो ने इसे 'समुद्री डकैती' कहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई देशों ने अमेरिकी कार्रवाइयों की आलोचना की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने संयम बरतने की अपील की।
वेनेज़ुएला की जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन सकता है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का जोश दिखाता है कि वे बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
सज्जाद अली नायाणी ✍