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Monday, 1 December 2025

अमेरिका में अब भारतीयों के लिए मुश्किल दौर शुरू!

अमेरिका में अब भारतीयों के लिए मुश्किल दौर शुरू!
H-1B वीज़ा अप्रूवल में भयानक गिरावट, 2015 से अब तक 70% तक की कमी! 

अमेरिका में भारतीय IT प्रोफेशनल्स के अच्छे दिन अब बीते ज़माने की बात लगने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीतियों का सीधा असर H-1B वीज़ा पर पड़ा है। USCIS के ताज़ा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है: - पिछले एक साल में H-1B अप्रूवल रेट में करीब 40% की भारी गिरावट - 2015 से अब तक कुल 70% तक की कमी - इस दशक में भारतीय कंपनियों को सबसे कम – सिर्फ 4,500 H-1B वीज़ा ही मिल सके 


नए वीज़ा लेने वालों में 40% तक की कटौती भारत से नए H-1B वीज़ा पाने वालों की संख्या में भयानक गिरावट आई है। सबसे बड़ा नाम TCS भी नहीं बच सका: - 

TCS का रिजेक्शन रेट 2024 में 4% से बढ़कर 7% हो गया - 

नए भारतीय कर्मचारियों को मिले वीज़ा: 2023 के 1,452 से घटकर सिर्फ 846 रह गए

 - कुल TCS कर्मचारियों को कंटिन्यूएशन मिला 5,293, लेकिन नया वीज़ा लगभग आधा रह गया

 इंफोसिस, HCL, LTIMindtree और विप्रो जैसी कंपनियों का रिजेक्शन रेट भले ही 1-2% हो, लेकिन सच ये है कि ये कंपनियाँ अब पहले जितनी अर्जियाँ डाल ही नहीं रही हैं। टॉप-25 H-1B स्पॉन्सर लिस्ट में कोई भी बड़ी भारतीय कंपनी नहीं है – ऊपर हैं सिर्फ़ Amazon, Google, Microsoft, Meta जैसी अमेरिकी टेक दिग्गज। 

एलन मस्क ने भी उठाई आवाज़ टेस्ला और X के मालिक एलन मस्क ने खुलकर भारतीय टैलेंट का पक्ष लिया है। हाल ही में उन्होंने कहा: “अमेरिका की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सबसे बड़ा योगदान भारतीय और चीनी इमिग्रेंट्स का है।

 दुनिया की टॉप कंपनियों के CEO भारतीय मूल के हैं। H-1B सिस्टम को और बेहतर करना चाहिए, न कि खत्म करना चाहिए।” 

हालाँकि ट्रम्प और मस्क के बीच तनातनी की खबरें हैं, लेकिन भारतीय प्रतिभा के समर्थन में मस्क अड़े हुए हैं। 

आगे क्या? 2025 में ट्रम्प 2.0 का कार्यकाल शुरू होने वाला है। उनकी पुरानी “Buy American, Hire American” नीति फिर से लागू होने की पूरी संभावना है। इसका मतलब:

 - और सख्त स्क्रूटनी - 

ज्यादा RFE (Request for Evidence) -

 प्रीमियम प्रोसेसिंग भी देरी से

 जो लोग अभी अमेरिका में हैं, उनके लिए एक्सटेंशन मिलना मुश्किल होगा और नए लोगों के लिए तो दरवाज़े लगभग बंद ही नज़र आ रहे हैं। 

भारतीय IT इंडस्ट्री के लिए ये सबसे बड़ा संकट बनता जा रहा है। आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
सज्जाद अली नायाणी✍️