बिहार के नवादा जिले में 5 दिसंबर 2025 की शाम एक साधारण कपड़ा फेरीवाला मोहम्मद अतहर हुसैन अपनी साइकिल पर घर लौट रहा था। पिछले 20 सालों से वह रोह प्रखंड और आसपास के गांवों में कपड़े बेचकर परिवार का पेट पालता था। मेहनती, शांत स्वभाव का इंसान, जिसे इलाके का हर बच्चा जानता था। लेकिन उस शाम भट्टा गांव के पास उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
साइकिल का टायर पंचर हो गया। पंचर ठीक कराने की दुकान पूछने वह कुछ लोगों के पास रुका, जो आग ताप रहे थे। पहले पता पूछा, फिर नाम। जैसे ही अतहर ने कहा – "मोहम्मद अतहर हुसैन" – सब कुछ बदल गया। नशे में धुत 6-8 युवकों ने उसे साइकिल से उतारा, जेब से करीब 18 हजार रुपये लूट लिए, कपड़े और साइकिल छीन ली। फिर हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीटा और बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं।
लाठी-डंडों, ईंटों और गर्म लोहे की रॉड से पीटा। सीने और शरीर पर रॉड से दागा। प्लायर से उंगलियां तोड़ीं, कान काटे। धर्म की पुष्टि के लिए जबरन कपड़े उतारे। बेहोश होने पर पानी छिड़ककर फिर पीटा। मौत से पहले अस्पताल में रिकॉर्ड बयान में अतहर ने खुद यह दर्द भरी दास्तान सुनाई थी – "मैं जान की भीख मांगता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना।"
गंभीर हालत में उसे नवादा सदर अस्पताल ले जाया गया, फिर बिहार शरीफ और पावापुरी रेफर किया गया। लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि 12 दिसंबर की रात अतहर ने दम तोड़ दिया। उनकी पत्नी शबनम परवीन और बच्चे अब इंसाफ की आस लिए बैठे हैं। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ मारपीट नहीं, धार्मिक नफरत से प्रेरित मॉब लिंचिंग थी। पुलिस ने मामला दर्ज किया। पत्नी की FIR में 10 नामजद और 15 अज्ञात आरोपी हैं। अब तक 8 से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जांच जारी है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान परिवार से मिले और आर्थिक मदद का चेक सौंपा। कई संगठनों ने प्रदर्शन किए, तेज सजा और मुआवजे की मांग की।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, पूरे समाज के लिए शर्मनाक है। नाम और धर्म के आधार पर इंसान को इस कदर यातना देना – क्या यही हमारा समाज है? नवादा में 2025 में मॉब लिंचिंग की यह तीसरी घटना है। क्या हम नफरत की इस आग को बुझा पाएंगे, या ऐसे और अतहर खोते रहेंगे?
समाज को सोचना होगा – इंसानियत पहले, नफरत बाद में। परिवार को पूरा इंसाफ मिले, दोषियों को सख्त सजा। क्योंकि अगर आज अतहर के साथ हुआ, कल किसी और के साथ हो सकता है।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼