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Friday, 26 December 2025

बांग्लादेश की अस्थिरता: गुजरात के सूरत टेक्सटाइल उद्योग पर गहरा संकट, करोड़ों रुपये फंसे, रोजगार खतरे में

बांग्लादेश की अस्थिरता: गुजरात के सूरत टेक्सटाइल उद्योग पर गहरा संकट, करोड़ों रुपये फंसे, रोजगार खतरे में
सज्जाद अली नायाणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 27 दिसंबर 2025
गुजरात का सूरत – भारत का 'टेक्सटाइल कैपिटल' – इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता ने दोनों देशों के बीच व्यापार को लगभग ठप्प कर दिया है। जहां पहले कोलकाता रूट से रोजाना करीब 7 करोड़ रुपये का टेक्सटाइल माल बांग्लादेश पहुंचता था, वहीं अब न तो डिलीवरी हो पा रही है और न ही पुराने बकाया पैसे लौट रहे हैं। व्यापारियों का अनुमान है कि सूरत के टेक्सटाइल कारोबारियों के लगभग 150-200 करोड़ रुपये बांग्लादेश में फंसे हुए हैं, जबकि हर महीने इतनी ही राशि का नया निर्यात पूरी तरह बंद हो चुका है। 

व्यापार का पुराना रिश्ता और अचानक झटका 

सूरत भारत का सबसे बड़ा सिंथेटिक टेक्सटाइल और साड़ी उत्पादन केंद्र है। बांग्लादेश, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक होने के नाते, सूरत से कपड़ा, यार्न और फैब्रिक का बड़ा खरीदार रहा है। दोनों देशों के बीच सालाना सैकड़ों करोड़ का यह व्यापार मुख्य रूप से कोलकाता पोर्ट और लैंड रूट से होता था। लेकिन 2024 के अंत से शुरू हुई बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता – जिसमें बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, बैंक बंदी और सीमा पर रुकावटें शामिल हैं – ने इस सप्लाई चेन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

 ट्रेडर्स एसोसिएशन के सूत्रों के अनुसार, पुराने सप्लाई के पेमेंट अब तक अटके हुए हैं। बैंकिंग सिस्टम में व्यवधान और मुद्रा संकट के चलते लाखों-करोड़ों की रकम फंस गई है। एक प्रमुख निर्यातक ने बताया, "हमारे पास महीने भर का 6-7 करोड़ का माल तैयार रहता था, जो सीधे बांग्लादेश चला जाता था। अब गोदाम भरे पड़े हैं, नए ऑर्डर जीरो, और पुराने पैसे की वसूली का कोई रास्ता नहीं दिख रहा।" 

बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक दबाव इस संकट का असर सिर्फ व्यापारियों तक सीमित नहीं है। सूरत के टेक्सटाइल सेक्टर में लाखों मजदूर, बुनकर और छोटे-मोटे कारोबारी जुड़े हुए हैं। निर्यात ठप होने से उत्पादन घटा है, जिसके चलते फैक्टरियां कम शिफ्ट चला रही हैं या वर्करों की छंटनी कर रही हैं। महीने में करोड़ों का कारोबार रुकने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट देश की आंतरिक अस्थिरत के साथ-साथ पड़ोसी देश की अस्थिरता से जुड़ा है। जो भी ताकतें बांग्लादेश में अशांति फैला रही हैं, उनका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत के इस महत्वपूर्ण उद्योग पर पड़ रहा है। सूरत जैसे हब पर निर्भर लाखों परिवारों की आजीविका दांव पर लग गई है। 

 क्या है आगे का रास्ता? ट्रेडर्स अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश में हैं, लेकिन इतने बड़े स्केल पर तुरंत बदलाव मुश्किल है। सरकार से अपील है कि निर्यात प्रोत्साहन, क्रेडिट गारंटी और डिप्लोमेटिक प्रयासों से फंसे पैसे वापस लाए जाएं। फिलहाल, सूरत का टेक्सटाइल उद्योग एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है – जहां न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि रोजगार और स्थिरता भी खतरे में है।

 यह समय है कि दोनों देश जल्द से जल्द सामान्य संबंध बहाल करें, ताकि व्यापार फिर पटरी पर आए और पड़ोसी की अस्थिरता हमारे आर्थिक इंजन को नुकसान न पहुंचाए। 
सज्जाद अली नायाणी✍🏼 
फ्राइडे वर्ल्ड 27 दिसंबर 2025