ढाका: बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव के बीच देवबंदी नेता मुफ्ती हारुन इज्जहार ने एक विवादास्पद बयान देकर चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि भारतीय हाई कमीशन और उसकी शाखाओं की सुरक्षा उनके अनुयायी करेंगे, साथ ही हिंदुओं तथा उनके मंदिरों की रक्षा भी वे ही संभालेंगे।
यह बयान हाल ही में चटगांव में भारतीय सहायक हाई कमीशन पर पत्थरबाजी की घटना के बाद आया है। इस घटना में 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, और हारुन इज्जहार खुद पुलिस स्टेशन जाकर उन्हें रिहा कराने की मांग करने गए थे। वहां उन्होंने कहा, "भारत एक आक्रामक और आतंकवादी देश है, लेकिन यहां का भारतीय दूतावास एक निर्दोष संस्था है। उसकी रक्षा हम करेंगे। किसी भी भीड़ को इकट्ठा होने नहीं देंगे।"
हारुन का यह दावा होने के बावजूद उनका पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह विरोधाभासी है। 2009 में उन्हें लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के साथ मिलकर भारतीय और अमेरिकी दूतावासों पर हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 2021 में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। खुफिया रिपोर्टों में उन्हें अल-कायदा और LeT से जुड़ा हुआ माना जाता है।
बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत कट्टरपंथियों का प्रभाव बढ़ा है। हाल के दिनों में भारत विरोधी प्रदर्शन, अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले और मंदिरों को नुकसान पहुंचाने की खबरें आ रही हैं।
भारत ने इस मुद्दे पर बांग्लादेशी राजदूत को चेतावनी दी है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। हारुन जैसे नेताओं के बयान देश में कट्टरपंथ के बढ़ते दबदबे के संकेत देते हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
सज्जाद अली नायाणी✍