Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 15 December 2025

अमेरिका पर ईरान का कड़ा संदेश: "भरोसेमंद नहीं, लेकिन कूटनीति का रास्ता बंद नहीं"

अमेरिका पर ईरान का कड़ा संदेश: "भरोसेमंद नहीं, लेकिन कूटनीति का रास्ता बंद नहीं"
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने अल-जज़ीरा नेटवर्क को दिए साक्षात्कार में अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तेहरान ने कभी भी वाशिंगटन को एक ईमानदार वार्ताकार के रूप में भरोसेमंद नहीं माना। यह साक्षात्कार शनिवार शाम प्रसारित हुआ, जिसमें अराक़ची ने मध्य पूर्व की तनावपूर्ण स्थिति, इजरायल के संभावित हमलों और अमेरिका के साथ संबंधों पर खुलकर बात की। 

अराक़ची ने स्पष्ट शब्दों में कहा: "हम युद्ध नहीं चाहते, बल्कि मुद्दों का समाधान कूटनीति के माध्यम से चाहते हैं।" उन्होंने आगे जोड़ा, "हमने कभी अमेरिका को एक ईमानदार वार्ताकार के रूप में भरोसेमंद नहीं माना है। अमेरिका किसी भी मामले में ईमानदार नहीं रहा और मेरे विचार में कोई भी अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकता।" फिर भी, उन्होंने जोर दिया कि यह अविश्वास कूटनीति के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं करता। ईरान हमेशा बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते दूसरी पक्ष ईमानदारी दिखाए।

 यह बयान हाल की घटनाओं के संदर्भ में आया है, जहां जून 2025 में इजरायल ने ईरान पर 12 दिनों का हमला किया था, जिस दौरान अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ताएं चल रही थीं। अराक़ची ने इजरायल की धमकियों को "मनोवैज्ञानिक युद्ध" का हिस्सा बताया। इजरायल के दोबारा हमले की अफवाहों पर उन्होंने कहा: "हम अक्सर सुनते हैं कि ज़ायोनी शासन फिर हमला कर सकता है। यह मनोवैज्ञानिक युद्ध वास्तविक युद्ध का हिस्सा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम युद्ध की संभावना को नजरअंदाज करते हैं।" 

ईरानी विदेश मंत्री ने देश की तैयारियों पर जोर देते हुए कहा: "हम पूरी तरह तैयार हैं। हमारी सशस्त्र सेनाएं और हमारे लोग हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बमबारी से इमारतें और उपकरण नष्ट हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र की इच्छाशक्ति और तकनीकी ज्ञान को मिटाया नहीं जा सकता।

 अराक़ची के इन बयानों से ईरान की स्थिति स्पष्ट होती है: तेहरान क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति चाहता है, लेकिन किसी भी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार है। अमेरिका के साथ अविश्वास के बावजूद, ईरान ने बार-बार कहा है कि परमाणु मुद्दे पर अप्रत्यक्ष बातचीत संभव है, यदि वाशिंगटन ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों का सम्मान करे।

 यह साक्षात्कार मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां इजरायल की आक्रामकता और अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान की यह सख्त लेकिन संयमित नीति क्षेत्र में नई गतिविधियों को जन्म दे सकती है। क्या अमेरिका ईरान के साथ विश्वास बहाली की दिशा में कदम उठाएगा? यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
सज्जाद अली नायाणी ✍